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Uttarkashi News: नसीब में जर्जर ट्राली, फाइलों में कैद पुल, स्यूणा के ग्रामीणों का छलका दर्द
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Tue, 20 Jan 2026 06:40 PM IST
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जर्जर ट्राली में कई बार फंस जाते हैं महिलाओं के दुपट्टा व बाल
डीएम से लगाई जल्द समस्या हल करने की मांग
उत्तरकाशी। स्यूणा गांव के लिए लगी ट्राली से आवाजाही खतरनाक बनी हुई है। ट्राली में कई बार महिलाओं के दुपट्टा और बाल फंसने के कारण अनहोनी का खतरा बना रहता है। गांव के लिए पुल की स्वीकृति मिलने के बाद उस पर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हुई थी लेकिन करीब दो वर्ष बाद भी उस पर कार्रवाई नहीं हो पाई है।
स्यूणा गांव के लोगों का कहना है कि जर्जर ट्राली में कई बार महिलाओं के दुपट्टा और बाल फंसने के कारण अनहोनी का खतरा बना रहता है। गांव के लिए पुल की स्वीकृति मिलने के बाद उस पर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हुई थी लेकिन करीब दो वर्ष बाद भी उस पर आगे कार्रवाई नहीं हो पाई है। स्यूणा गांव के ग्रामीण प्रवीन तिवारी, सीमा सजवाण, कविता, रजनी, अंजू, सुनीता आदि भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हरीश डंगवाल के नेतृत्व में जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे।
उन्होंने बताया कि जनपद मुख्यालय से महज तीन किमी की दूरी पर बसे स्यूणा गांव आज तक सड़क से नहीं जुड़ पाया है। उन्हें आज भी भागीरथी नदी के ऊपर ट्राली से आवाजाही करने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्षों पूर्व लगी ट्राली जर्जर होने के कारण उसमें खतरा बना हुआ है। ट्राली को खिंचते हुए कई लोगों चोटिल हो चुके हैंं।
बुजुर्ग और बच्चों के साथ सबसे अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है। करीब दो वर्ष ग्रामीणों ने जब गंगोत्री हाईवे जाम किया था तो उस समय शासन-प्रशासन ने आनन फानन में पुल स्वीकृत किया और उसकी टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हुई लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीएम प्रशांत आर्य ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जल्द ही संबंधित विभाग को निर्देशित कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
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डीएम से लगाई जल्द समस्या हल करने की मांग
उत्तरकाशी। स्यूणा गांव के लिए लगी ट्राली से आवाजाही खतरनाक बनी हुई है। ट्राली में कई बार महिलाओं के दुपट्टा और बाल फंसने के कारण अनहोनी का खतरा बना रहता है। गांव के लिए पुल की स्वीकृति मिलने के बाद उस पर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हुई थी लेकिन करीब दो वर्ष बाद भी उस पर कार्रवाई नहीं हो पाई है।
स्यूणा गांव के लोगों का कहना है कि जर्जर ट्राली में कई बार महिलाओं के दुपट्टा और बाल फंसने के कारण अनहोनी का खतरा बना रहता है। गांव के लिए पुल की स्वीकृति मिलने के बाद उस पर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हुई थी लेकिन करीब दो वर्ष बाद भी उस पर आगे कार्रवाई नहीं हो पाई है। स्यूणा गांव के ग्रामीण प्रवीन तिवारी, सीमा सजवाण, कविता, रजनी, अंजू, सुनीता आदि भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हरीश डंगवाल के नेतृत्व में जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे।
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उन्होंने बताया कि जनपद मुख्यालय से महज तीन किमी की दूरी पर बसे स्यूणा गांव आज तक सड़क से नहीं जुड़ पाया है। उन्हें आज भी भागीरथी नदी के ऊपर ट्राली से आवाजाही करने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्षों पूर्व लगी ट्राली जर्जर होने के कारण उसमें खतरा बना हुआ है। ट्राली को खिंचते हुए कई लोगों चोटिल हो चुके हैंं।
बुजुर्ग और बच्चों के साथ सबसे अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है। करीब दो वर्ष ग्रामीणों ने जब गंगोत्री हाईवे जाम किया था तो उस समय शासन-प्रशासन ने आनन फानन में पुल स्वीकृत किया और उसकी टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हुई लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीएम प्रशांत आर्य ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जल्द ही संबंधित विभाग को निर्देशित कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

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