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Uttarkashi News: 27 साल से एक कमरे में चल रहा आयुर्वेदिक अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Tue, 20 Jan 2026 06:44 PM IST
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ग्रामीणों ने भूमि दान दी लेकिन नहीं बना अस्पताल का भवन
कंडीसौड़ (टिहरी)। थौलधार ब्लॉक के दूरस्थ कटखेत में स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल लकवाग्रस्त हो गया है। क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए वर्ष 1999 में आयुर्वेदिक अस्पताल की स्वीकृति मिली लेकिन 27 साल बीतने के बाद भी अस्पताल का अपना भवन नहीं बन सका। स्थापना के बाद से अस्पताल किराये के एक छोटे से कमरे में संचालित हो रहा है।
अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर और फार्मासिस्ट को अस्पताल में बैठने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। संसाधनों के अभाव में क्षेत्र के ग्रामीणों को आयुर्वेदिक चिकित्सा का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों ने 6 जून 1999 को निजी भूमि निशुल्क विभाग को दान दी थी।
भूमि की रजिस्ट्री विभाग के नाम दर्ज है। इसके बावजूद पिछले ढाई दशक में भवन निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल के लिए कम से कम चार कमरों की आवश्यकता है लेकिन वर्षों से एक ही कमरे में जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। ग्राम प्रधान राधा कृष्ण जोशी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य जयवीर सिंह रावत, राजेंद्र प्रसाद जोशी, उत्तम सिंह राणा, प्रेम सिंह नेगी ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते भवन बन जाता तो दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती थी।
इस संबंध में जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र का कहना है कि अस्पताल के लिए भूमि दान की जानकारी उन्हें कुछ दिन पहले ही प्राप्त हुई है। जल्द ही भूमि की खाता-खतौनी की नकल निकलवाकर भू-वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद इस वित्तीय वर्ष में भवन निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
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कंडीसौड़ (टिहरी)। थौलधार ब्लॉक के दूरस्थ कटखेत में स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल लकवाग्रस्त हो गया है। क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए वर्ष 1999 में आयुर्वेदिक अस्पताल की स्वीकृति मिली लेकिन 27 साल बीतने के बाद भी अस्पताल का अपना भवन नहीं बन सका। स्थापना के बाद से अस्पताल किराये के एक छोटे से कमरे में संचालित हो रहा है।
अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर और फार्मासिस्ट को अस्पताल में बैठने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। संसाधनों के अभाव में क्षेत्र के ग्रामीणों को आयुर्वेदिक चिकित्सा का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों ने 6 जून 1999 को निजी भूमि निशुल्क विभाग को दान दी थी।
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भूमि की रजिस्ट्री विभाग के नाम दर्ज है। इसके बावजूद पिछले ढाई दशक में भवन निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल के लिए कम से कम चार कमरों की आवश्यकता है लेकिन वर्षों से एक ही कमरे में जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। ग्राम प्रधान राधा कृष्ण जोशी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य जयवीर सिंह रावत, राजेंद्र प्रसाद जोशी, उत्तम सिंह राणा, प्रेम सिंह नेगी ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते भवन बन जाता तो दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती थी।
इस संबंध में जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र का कहना है कि अस्पताल के लिए भूमि दान की जानकारी उन्हें कुछ दिन पहले ही प्राप्त हुई है। जल्द ही भूमि की खाता-खतौनी की नकल निकलवाकर भू-वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद इस वित्तीय वर्ष में भवन निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

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