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Uttarkashi News: 18 साल में बनी महज पांच किमी सड़क
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Wed, 14 Jan 2026 05:35 PM IST
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विकास की राह देख रही बडियार पट्टी, पैदल रास्ता भी आपदा में हो गया है क्षतिग्रस्त
बड़कोट। पुरोला तहसील के दूरस्थ बडियार पट्टी के आठ गांव आज भी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क स्वीकृत होने के बावजूद ग्रामीणों को कई किमी की पैदल दूरी नापकर गांव जाना पड़ता है। गांवों को जोड़ने वाला सात किमी का पैदल रास्ता भी पिछली आपदा में जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया जिससे ग्रामीणों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
आज जहां पहाड़ में लगभग हर गांव सड़क से जुड़ गया है वहीं बडियार पट्टी के सर गांव, लेवटाड़ी, डिंगाड़ी, कासलों, किडार, पौंटी, गौल व छानिका सहित आठ गांव सड़क पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों को आज भी करीब सरनौल गांव तक या फिर मराड़ी तक पैदल सड़क तक पहुंचना पड़ता है। लगभग सात किमी के पैदल मार्ग पर बने मराड़ी पुल की एप्रोच क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीणों को जान जोखिम में डाल कर आवागमन करना पड़ रहा।
कालिया नाग मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय रावत, पुजारी दया प्रसाद गैरोला, व्यापार मंडल महामंत्री सोहन गैरोला का कहना है कि ग्रामीणों को रास्ता क्षतिग्रस्त होने के कारण जोखिम भरी आवाजाही करनी पड़ रही है। पिछली आपदा के समय पैदल मार्ग पर बने पुल की एप्रोच क्षतिग्रस्त हो गई थी लेकिन इसको ठीक करने की कोई सुध नहीं ले रहा है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं, वर्ष 2008 में इन आठ गांव को जोड़ने के लिए साढ़े 12 किमी सड़क स्वीकृत हुई थी जो अभी तक सिर्फ लगभग पांच किमी तक ही बन पाई है। सड़क तैयार नहीं होने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ईई लोनिवि बड़कोट तरुण काम्बोज का कहना है कि जो सड़क बनी है उसे दुरुस्त रखने का प्रयास किया जा रहा है। आगे जो भी सड़क तैयार की जानी है। उसकी देखभाल और निर्माण कार्य पीएमजीएसवाई पुरोला डिवीजन करेगा।
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बड़कोट। पुरोला तहसील के दूरस्थ बडियार पट्टी के आठ गांव आज भी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क स्वीकृत होने के बावजूद ग्रामीणों को कई किमी की पैदल दूरी नापकर गांव जाना पड़ता है। गांवों को जोड़ने वाला सात किमी का पैदल रास्ता भी पिछली आपदा में जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया जिससे ग्रामीणों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
आज जहां पहाड़ में लगभग हर गांव सड़क से जुड़ गया है वहीं बडियार पट्टी के सर गांव, लेवटाड़ी, डिंगाड़ी, कासलों, किडार, पौंटी, गौल व छानिका सहित आठ गांव सड़क पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों को आज भी करीब सरनौल गांव तक या फिर मराड़ी तक पैदल सड़क तक पहुंचना पड़ता है। लगभग सात किमी के पैदल मार्ग पर बने मराड़ी पुल की एप्रोच क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीणों को जान जोखिम में डाल कर आवागमन करना पड़ रहा।
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कालिया नाग मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय रावत, पुजारी दया प्रसाद गैरोला, व्यापार मंडल महामंत्री सोहन गैरोला का कहना है कि ग्रामीणों को रास्ता क्षतिग्रस्त होने के कारण जोखिम भरी आवाजाही करनी पड़ रही है। पिछली आपदा के समय पैदल मार्ग पर बने पुल की एप्रोच क्षतिग्रस्त हो गई थी लेकिन इसको ठीक करने की कोई सुध नहीं ले रहा है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं, वर्ष 2008 में इन आठ गांव को जोड़ने के लिए साढ़े 12 किमी सड़क स्वीकृत हुई थी जो अभी तक सिर्फ लगभग पांच किमी तक ही बन पाई है। सड़क तैयार नहीं होने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ईई लोनिवि बड़कोट तरुण काम्बोज का कहना है कि जो सड़क बनी है उसे दुरुस्त रखने का प्रयास किया जा रहा है। आगे जो भी सड़क तैयार की जानी है। उसकी देखभाल और निर्माण कार्य पीएमजीएसवाई पुरोला डिवीजन करेगा।