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Uttarkashi News: दाम इतने कम कि बेचने से ज्यादा नुकसान
Wed, 22 Jul 2026 06:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Wed, 22 Jul 2026 06:13 PM IST
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सड़क पर टमाटर फेंकने को मजबूर हैं किसान
पुरोला। उत्तरकाशी की रवाईं घाटी में इस बार टमाटर की अच्छी पैदावार किसानों के लिए खुशहाली नहीं बल्कि आर्थिक संकट का कारण बन गई है। मंडियों में टमाटर के औने-पौने दाम और लगातार बढ़ती परिवहन लागत ने किसानों को ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है कि वे अपनी मेहनत की फसल को मंडी तक पहुंचाने के बजाय सड़कों पर फेंकने और खेतों में सड़ने के लिए छोड़ने को मजबूर हैं।
किसानों का कहना है कि टमाटर को मंडियों तक पहुंचाने में वाहन किराया, मजदूरी, पैकिंग और अन्य खर्च बिक्री से मिलने वाली रकम से कहीं अधिक पड़ रहा है। ऐसे में फसल बेचने पर भी नुकसान ही हाथ लग रहा है। यही वजह है कि कई किसान टमाटर खेतों में ही छोड़ रहे हैं जबकि कई सड़कों पर फेंकने को विवश हैं।
टमाटर उत्पादक किसान हरदेव सिंह, प्रदीप सिंह, धर्मेंद्र, सोवेंद्र सिंह और राजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने खेती के लिए बैंकों और सहकारी समितियों से ऋण लिया है। बेहतर उत्पादन के बावजूद उचित मूल्य नहीं मिलने से अब कृषि ऋण चुकाना मुश्किल हो गया है। खेती से होने वाली आय पर ही परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च निर्भर हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर संकट में डाल दिया है।
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किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो घाटी के बड़ी संख्या में किसान टमाटर की खेती छोड़ने को मजबूर होंगे। उन्होंने टमाटर का समर्थन मूल्य घोषित करने, स्थानीय स्तर पर खरीद केंद्र खोलने, परिवहन पर अनुदान देने और किसानों को आर्थिक राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
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पुरोला। उत्तरकाशी की रवाईं घाटी में इस बार टमाटर की अच्छी पैदावार किसानों के लिए खुशहाली नहीं बल्कि आर्थिक संकट का कारण बन गई है। मंडियों में टमाटर के औने-पौने दाम और लगातार बढ़ती परिवहन लागत ने किसानों को ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है कि वे अपनी मेहनत की फसल को मंडी तक पहुंचाने के बजाय सड़कों पर फेंकने और खेतों में सड़ने के लिए छोड़ने को मजबूर हैं।
किसानों का कहना है कि टमाटर को मंडियों तक पहुंचाने में वाहन किराया, मजदूरी, पैकिंग और अन्य खर्च बिक्री से मिलने वाली रकम से कहीं अधिक पड़ रहा है। ऐसे में फसल बेचने पर भी नुकसान ही हाथ लग रहा है। यही वजह है कि कई किसान टमाटर खेतों में ही छोड़ रहे हैं जबकि कई सड़कों पर फेंकने को विवश हैं।
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टमाटर उत्पादक किसान हरदेव सिंह, प्रदीप सिंह, धर्मेंद्र, सोवेंद्र सिंह और राजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने खेती के लिए बैंकों और सहकारी समितियों से ऋण लिया है। बेहतर उत्पादन के बावजूद उचित मूल्य नहीं मिलने से अब कृषि ऋण चुकाना मुश्किल हो गया है। खेती से होने वाली आय पर ही परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च निर्भर हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर संकट में डाल दिया है।
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किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो घाटी के बड़ी संख्या में किसान टमाटर की खेती छोड़ने को मजबूर होंगे। उन्होंने टमाटर का समर्थन मूल्य घोषित करने, स्थानीय स्तर पर खरीद केंद्र खोलने, परिवहन पर अनुदान देने और किसानों को आर्थिक राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।