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Uttarkashi News: आवारा पशु खेती के दुश्मन बने, ग्रामीणों ने दूरस्थ खेतों में फसल बोनी छोड़ी
Fri, 24 Jul 2026 07:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Fri, 24 Jul 2026 07:15 PM IST
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नौगांव (उत्तरकाशी)।क्षेत्र में बढ़ती आवारा पशुओं की संख्या किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। खेतों में खड़ी फसल और घास को नुकसान पहुंचने के कारण कई ग्रामीणों ने गांव से दूर स्थित तोकों में खेती करना बंद कर दिया है। सड़कों पर घूम रहे पशु खेतों में घुसकर किसानों की मेहनत बर्बाद कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार जुलाई-अगस्त में घास और फसलों की सुरक्षा के लिए रकीत बंधान कर चौकीदारी की जाती है, लेकिन खुले छोड़े गए पशु इस व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ पशुपालक कमजोर, चोटिल या बांझ पशुओं के कानों से सरकारी टैग हटाकर उन्हें छोड़ देते हैं। पशुपालन विभाग पर भी टैग लगे पशुओं की पहचान और जिम्मेदार पशुपालकों पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप हैं। कई गांवों में महिला मंगल दल फसल बचाने के लिए पशुओं को खदेड़ रहे हैं, लेकिन वे दूसरे गांवों में नुकसान पहुंचा रहे हैं। बजलाड़ी गांव के सामाजिक कार्यकर्ता जयेंद्र सिंह राणा ने सरकार से पशुपालन विभाग की जवाबदेही तय करने, पशुपालकों की पहचान के लिए अभियान चलाने और पशु छोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो खेती करना और मुश्किल हो जाएगा।
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नौगांव (उत्तरकाशी)।क्षेत्र में बढ़ती आवारा पशुओं की संख्या किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। खेतों में खड़ी फसल और घास को नुकसान पहुंचने के कारण कई ग्रामीणों ने गांव से दूर स्थित तोकों में खेती करना बंद कर दिया है। सड़कों पर घूम रहे पशु खेतों में घुसकर किसानों की मेहनत बर्बाद कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार जुलाई-अगस्त में घास और फसलों की सुरक्षा के लिए रकीत बंधान कर चौकीदारी की जाती है, लेकिन खुले छोड़े गए पशु इस व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ पशुपालक कमजोर, चोटिल या बांझ पशुओं के कानों से सरकारी टैग हटाकर उन्हें छोड़ देते हैं। पशुपालन विभाग पर भी टैग लगे पशुओं की पहचान और जिम्मेदार पशुपालकों पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप हैं। कई गांवों में महिला मंगल दल फसल बचाने के लिए पशुओं को खदेड़ रहे हैं, लेकिन वे दूसरे गांवों में नुकसान पहुंचा रहे हैं। बजलाड़ी गांव के सामाजिक कार्यकर्ता जयेंद्र सिंह राणा ने सरकार से पशुपालन विभाग की जवाबदेही तय करने, पशुपालकों की पहचान के लिए अभियान चलाने और पशु छोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो खेती करना और मुश्किल हो जाएगा।