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Uttarkashi News: चार विभागों की खींचतान में कचरा हुई स्वच्छता योजना
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 10 Jan 2026 06:51 PM IST
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करोड़ों के प्लांट पर लटका हुआ है ताला
कहीं बिजली नहीं, कहीं प्लांट टूटा, उत्तरकाशी में धूल फांक रहे कॉम्पेक्टर
उत्तरकाशी। ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक उन्मूलन और ठोस कूड़ा प्रबंधन के लिए बनाए गए कॉम्पेक्टर प्लांटों का संचालन चार विभागों के फेर में फंसा हुआ है। एक मात्र भटवाड़ी विकासखंड के मनेरी गांव में प्लांट का संचालन किया जा रहा है लेकिन वहां पर भी कूड़ा नहीं पहुंच पा रहा है। दूसरी ओर डुंडा, चिन्यालीसौड़, नौगांव में संचालन अभी शुरू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, मोरी में अभी निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कूड़ा प्रबंधन के लिए शासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज, स्वजल, जिला पंचायत और विकासखंड कार्यालय को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें भूमि चयन की जिम्मेदारी पंचायती राज और प्लांट स्थापना की स्वजल और संचालन के लिए जिला पंचायत और वाहनों से कूड़ा एकत्रिकरण के लिए विकासखंड को दी गई।
इसके बाद भटवाड़ी के मनेरी और डुंडा के धनारी, चिन्यालीसौड़ के मलाण गांव और नौगांव के तुनाल्का में इनका निर्माण किया गया लेकिन अभी तक इनका संचालन शुरू नहीं हो पाया। मनेरी में संचालन तो किया जा रहा है लेकिन वहां पर विकासखंड के वाहनों से कूड़ा नहीं पहुंच पा रहा है। वहां पर कार्य कम होने के कारण उसके संचालन पर भी खतरा बना हुआ है।
डुंडा के प्लांट में अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं लग पाया है। दूसरी ओर चिन्यालीसौड़ के प्लांट भी शुरू नहीं किया गया। साथ ही तुनाल्का में प्लांट इस वर्ष आपदा की भेंट चढ़ने के कारण क्षतिग्रस्त हुआ है। मोरी में अभी तक प्लांट का निर्माण नहीं शुरू हो पाया। स्थिति यह है कि जिला पंचायत को इन क्षेत्रों में कूड़ा ही नहीं मिल रहा है।
इन विभागों के बीच समन्वय न होने के कारण यह शासन-प्रशासन के स्वच्छ भारत मिशन पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक स्वच्छता को लेकर कोई उचित उपाय नहीं किए गए। जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी मोनिका भंडारी ने कहा कि चार विभागों को जिम्मेदारी होने के कारण संचालन में परेशानी हो रही है। मनेरी में संचालन जारी है लेकिन वहां पर विकासखंड की गाड़ी से कूड़ा नहीं पहुंच पा रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कूड़ा प्रबंधन के लिए शासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज, स्वजल, जिला पंचायत और विकासखंड कार्यालय को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें भूमि चयन की जिम्मेदारी पंचायती राज और प्लांट स्थापना की स्वजल और संचालन के लिए जिला पंचायत और वाहनों से कूड़ा एकत्रिकरण के लिए विकासखंड को दी गई।
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इसके बाद भटवाड़ी के मनेरी और डुंडा के धनारी, चिन्यालीसौड़ के मलाण गांव और नौगांव के तुनाल्का में इनका निर्माण किया गया लेकिन अभी तक इनका संचालन शुरू नहीं हो पाया। मनेरी में संचालन तो किया जा रहा है लेकिन वहां पर विकासखंड के वाहनों से कूड़ा नहीं पहुंच पा रहा है। वहां पर कार्य कम होने के कारण उसके संचालन पर भी खतरा बना हुआ है।
डुंडा के प्लांट में अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं लग पाया है। दूसरी ओर चिन्यालीसौड़ के प्लांट भी शुरू नहीं किया गया। साथ ही तुनाल्का में प्लांट इस वर्ष आपदा की भेंट चढ़ने के कारण क्षतिग्रस्त हुआ है। मोरी में अभी तक प्लांट का निर्माण नहीं शुरू हो पाया। स्थिति यह है कि जिला पंचायत को इन क्षेत्रों में कूड़ा ही नहीं मिल रहा है।
इन विभागों के बीच समन्वय न होने के कारण यह शासन-प्रशासन के स्वच्छ भारत मिशन पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक स्वच्छता को लेकर कोई उचित उपाय नहीं किए गए। जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी मोनिका भंडारी ने कहा कि चार विभागों को जिम्मेदारी होने के कारण संचालन में परेशानी हो रही है। मनेरी में संचालन जारी है लेकिन वहां पर विकासखंड की गाड़ी से कूड़ा नहीं पहुंच पा रहा है।