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सिर्फ मादुरो के लिए नहीं था वेनेजुएला में सैन्य अभियान?: ट्रंप की चीन को चेतावनी- अमेरिका महाद्वीप से दूर रहो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 11 Jan 2026 08:40 PM IST
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सार
वेनेजुएला में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने सिर्फ निकोलस मादुरो की सत्ता का अंत नहीं किया, बल्कि इसके जरिये अमेरिका ने चीन को भी एक कड़ा और साफ संदेश दिया। जिस कार्रवाई को अचानक और गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया, उसने यह दिखा दिया कि अमेरिका अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में किसी दूसरी महाशक्ति की बढ़ती मौजूदगी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। मादुरो की गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले तक चीन काराकास में सक्रिय नजर आ रहा था, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने बिना किसी रुकावट के अपना ऑपरेशन पूरा कर लिया। विस्तार से पढ़ें रिपोर्ट-
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
पिछले हफ्ते अमेरिकी सेना के अभियान में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया गया। इस अभियान के कई मकसद थे। इनमें एक अहम मकसद चीन को संदेश देना भी था कि वह अमेरिका महाद्वीप से दूर रहे। चीन दो दशक से लैटिन अमेरिका में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद केवल आर्थिक अवसर हासिल करना नहीं, बल्कि अपने सबसे बड़े भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी अमेरिका के नजदीक रणनीतिक पकड़ बनाना भी है।
अर्जेंटीना में उपग्रह ट्रैकिंग स्टेशन, पेरू में एक बंदरगाह और वेनेजुएला को आर्थिक मदद जैसे कदमों के जरिये चीन की बढ़ती मौजूदगी अमेरिका की सरकारों के लिए परेशानी का कारण रही है। इसमें डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन भी शामिल है।
ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारियों ने रॉयटर्स से कहा कि मादुरो के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति की कार्रवाई का एक मकसद चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को रोकना भी था। अधिकारियों ने कहा कि कर्ज के बदले वेनेजुएला से सस्ता तेल लेने की चीन की रणनीति के दिन अब खत्म हो गए हैं।
ये भी पढ़ें: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी, हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा 200 पार; स्थिति तनावपूर्ण
तेल कंपनियों के साथ बैठक में ट्रंप ने क्या संदेश दिया?
चीन के लिए क्यों झटका थी वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई?
तीन जनवरी की सुबह की गई कार्रवाई में अमेरिकी कमांडो काराकास में घुसे और वेनेजुएला के राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी को पकड़कर अपने देश ले गए। यह चीन के हितों और प्रतिष्ठा के लिए बड़ा झटका थी। जिन हवाई सुरक्षा प्रणालियों को अमेरिकी बलों ने जल्दी ही निष्क्रिय कर दिया था, वे चीन और रूस की आपूर्ति की हुई थीं। ट्रंप ने कहा कि प्रतिबंधों के तहत रोका गए तीन से पांच करोड़ बैरल तेल अब अमेरिका भेजा जाएगा। इनमें से ज्यादातर तेल पहले चीनी बंदरगाहों पर जाने वाला था।
विश्लेषकों का कहना है कि मादुरो की गिरफ्तारी ने यह दिखा दिया कि अमेरिका महाद्वीप में चीन की दबदबा बनाने की क्षमता सीमित है। थिंक टैंक 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' के चीन विशेषज्ञ क्रेग सिंगलटन ने कहा कि इस हमले ने पश्चिमी गोलार्ध में चीन की 'महाशक्ति जैसी बातों और उसकी वास्तविक पहुंच' के बीच की खाई उजागर कर दी। उन्होंने कहा, 'बीजिंग कूटनीतिक विरोध तो कर सकता है, लेकिन जब वाशिंगटन सीधे दबाव डालने का फैसला करता है, तो वह अपने साझेदारों या संपत्तियों की रक्षा नहीं कर पाता।'
चीनी दूतावास ने क्या प्रतिक्रिया दी?
व्हाइट हाउस ने इस पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। हालांकि प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि चीन को पश्चिमी गोलार्ध में अपनी स्थिति को लेकर चिंतित होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्र के उसके साझेदार अब समझ रहे हैं कि चीन उनकी रक्षा नहीं कर सकता।
चीन पर ट्रंप की अस्पष्ट नीति
ट्रंप प्रशासन की चीन नीति विरोधाभासी दिखती है। एक ओर व्यापार युद्ध को शांत करने के लिए रियायतें दी जाती हैं, तो दूसरी ओर ताइवान को लेकर अमेरिका का समर्थन ज्यादा आक्रामक नजर आता है। वेनेजुएला की कार्रवाई से लगा कि अमेरिकी नीति अब ज्यादा सख्त रुख की ओर झुक रही है। इस हमले के समय ने चीन की असहजता और बढ़ा दी।
वेनेजुएला में कार्रवाई की जानकारी चीन को नहीं थी?
मादुरो को हटाए जाने से कुछ ही घंटे पहले उन्होंने काराकास में लैटिन अमेरिका के लिए चीन के विशेष दूत किउ शियाओची से मुलाकात की थी। यह उनकी आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी थी, जिसके बाद वह अमेरिकी हिरासत में चले गए। कैमरों के सामने हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई, जब अमेरिकी सैन्य बल गोपनीय रूप से अपनी कार्रवाई शुरू करने के लिए तैयार थे। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इससे लगता है कि चीन को पहले से जानकारी नहीं थी। अधिकारी ने कहा, अगर उन्हें पता होता, तो वे इतनी सार्वजनिक बैठक नहीं करते।
ये भी पढ़ें: संघर्षों में फंसा ईरान: कौन पकड़ेंगा ट्रंप की नाक? अमेरिका मध्य एशिया में अपने सपने पूरे करने की ताक में
वर्षों तक चीन ने वेनेजुएला की तेल रिफाइनरी और बुनियादी ढांचे में पैसा लगाया। 2017 से अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से प्रतिबंध कड़े किए जाने के बाद यह देश के लिए आर्थिक सहारा बना। रूस के साथ मिलकर चीन ने वेनेजुएला की सेना को पैसे और हथियार भी दिए। इसमें रडार प्रणाली भी शामिल थी, जिनके बारे में कहा गया था कि रडारी प्रणाली अमेरिकी उन्नत सैन्य विमानों का पता लगा सकती हैं। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ये प्रणालियां उस कार्रवाई को रोकने में नाकाम रहीं, जिसे बिना किसी नुकसान के अंजाम दिया गया।
हडसन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ माइकल सोबोलिक ने कहा, दुनिया का कोई भी देश जिसके पास चीनी रक्षा उपकरण हैं, वह अब अपनी हवाई सुरक्षा जांच रहा है और सोच रहा है कि वह अमेरिका से कितना सुरक्षित है। उन्होंने कहा, वे यह भी देख रहे हैं कि ईरान और वेनेजुएला को लेकर चीन के कूटनीतिक आश्वासन तब बेकार साबित हुए, जब अमेरिकी सेना पहुंची। खुफिया जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, चीन अब यह अध्ययन कर रहा है कि उन सुरक्षा प्रणालियों में क्या कमी रह गई, ताकि वह अपने प्रणाली को मजबूत कर सके।
क्षेत्र में चीन के सामने अन्य चुनौतियां क्या हैं?
क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी चीन पर दबाव बढ़ सकता है। उसने क्यूबा में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है और अमेरिका को संदेह है कि वहां चीन एक खुफिया अभियान चला रहा है। चीन इससे इनकार करता है, लेकिन पिछले साल उसने क्यूबा के साथ खुफिया सहयोग बढ़ाने का वादा किया था। वेनेजुएला की कार्रवाई के बाद के दिनों में ट्रंप ने कहा कि क्यूबा में अमेरिकी सैन्य दखल शायद जरूरी नहीं होगा, क्योंकि वेनेजुएला के तेल की आपूर्ति कम होने से वहां हालात खुद ही बिगड़ते दिख रहे हैं। ट्रंप प्रशासन पनामा नहर के आसपास बंदरगाह संचालन से चीनी कंपनियों को दूर रखने की कोशिश भी जारी रखे हुए है। यह नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ने वाला अहम जलमार्ग है।
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अर्जेंटीना में उपग्रह ट्रैकिंग स्टेशन, पेरू में एक बंदरगाह और वेनेजुएला को आर्थिक मदद जैसे कदमों के जरिये चीन की बढ़ती मौजूदगी अमेरिका की सरकारों के लिए परेशानी का कारण रही है। इसमें डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन भी शामिल है।
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ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारियों ने रॉयटर्स से कहा कि मादुरो के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति की कार्रवाई का एक मकसद चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को रोकना भी था। अधिकारियों ने कहा कि कर्ज के बदले वेनेजुएला से सस्ता तेल लेने की चीन की रणनीति के दिन अब खत्म हो गए हैं।
ये भी पढ़ें: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी, हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा 200 पार; स्थिति तनावपूर्ण
तेल कंपनियों के साथ बैठक में ट्रंप ने क्या संदेश दिया?
- शुक्रवार को ट्रंप ने तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक में साफ कहा कि अमेरिका चीन को अपने क्षेत्र में नहीं चाहता।
- उन्होंने कहा कि चीन और रूस जैसे देशों का पड़ोसी बनना उन्हें असहज करता है।
- ट्रंप ने चीन और रूस दोनों से कहा कि अमेरिका उनके साथ अच्छे संबंध रखता है और उन्हें पसंद भी करता है, लेकिन फिर भी उनकी मौजूदगी यहां मंजूर नहीं है।
- ट्रंप ने कहा कि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि चीन और रूस यहां नहीं रहेंगे।
- उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका कारोबार के लिए खुला है और चीन चाहे तो अमेरिका से या अमेरिका में रहकर जितना चाहे उतना तेल खरीद सकता है।
चीन के लिए क्यों झटका थी वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई?
तीन जनवरी की सुबह की गई कार्रवाई में अमेरिकी कमांडो काराकास में घुसे और वेनेजुएला के राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी को पकड़कर अपने देश ले गए। यह चीन के हितों और प्रतिष्ठा के लिए बड़ा झटका थी। जिन हवाई सुरक्षा प्रणालियों को अमेरिकी बलों ने जल्दी ही निष्क्रिय कर दिया था, वे चीन और रूस की आपूर्ति की हुई थीं। ट्रंप ने कहा कि प्रतिबंधों के तहत रोका गए तीन से पांच करोड़ बैरल तेल अब अमेरिका भेजा जाएगा। इनमें से ज्यादातर तेल पहले चीनी बंदरगाहों पर जाने वाला था।
विश्लेषकों का कहना है कि मादुरो की गिरफ्तारी ने यह दिखा दिया कि अमेरिका महाद्वीप में चीन की दबदबा बनाने की क्षमता सीमित है। थिंक टैंक 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' के चीन विशेषज्ञ क्रेग सिंगलटन ने कहा कि इस हमले ने पश्चिमी गोलार्ध में चीन की 'महाशक्ति जैसी बातों और उसकी वास्तविक पहुंच' के बीच की खाई उजागर कर दी। उन्होंने कहा, 'बीजिंग कूटनीतिक विरोध तो कर सकता है, लेकिन जब वाशिंगटन सीधे दबाव डालने का फैसला करता है, तो वह अपने साझेदारों या संपत्तियों की रक्षा नहीं कर पाता।'
चीनी दूतावास ने क्या प्रतिक्रिया दी?
- वॉशिंगटन में चीनी दूतावास ने रॉयटर्स को दिए बयान में अमेरिका के कदम की आलोचना की।
- चीनी दूतावास ने इस कार्रवाई को एकतरफा और गैरकानूनी बताया।
- दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा कि चीन के लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।
- उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच सहयोग जारी है।
- लियू पेंगयू के मुताबिक, हालात चाहे जैसे भी हों, चीन इन देशों का दोस्त और साझेदार बना रहेगा।
व्हाइट हाउस ने इस पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। हालांकि प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि चीन को पश्चिमी गोलार्ध में अपनी स्थिति को लेकर चिंतित होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्र के उसके साझेदार अब समझ रहे हैं कि चीन उनकी रक्षा नहीं कर सकता।
चीन पर ट्रंप की अस्पष्ट नीति
ट्रंप प्रशासन की चीन नीति विरोधाभासी दिखती है। एक ओर व्यापार युद्ध को शांत करने के लिए रियायतें दी जाती हैं, तो दूसरी ओर ताइवान को लेकर अमेरिका का समर्थन ज्यादा आक्रामक नजर आता है। वेनेजुएला की कार्रवाई से लगा कि अमेरिकी नीति अब ज्यादा सख्त रुख की ओर झुक रही है। इस हमले के समय ने चीन की असहजता और बढ़ा दी।
वेनेजुएला में कार्रवाई की जानकारी चीन को नहीं थी?
मादुरो को हटाए जाने से कुछ ही घंटे पहले उन्होंने काराकास में लैटिन अमेरिका के लिए चीन के विशेष दूत किउ शियाओची से मुलाकात की थी। यह उनकी आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी थी, जिसके बाद वह अमेरिकी हिरासत में चले गए। कैमरों के सामने हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई, जब अमेरिकी सैन्य बल गोपनीय रूप से अपनी कार्रवाई शुरू करने के लिए तैयार थे। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इससे लगता है कि चीन को पहले से जानकारी नहीं थी। अधिकारी ने कहा, अगर उन्हें पता होता, तो वे इतनी सार्वजनिक बैठक नहीं करते।
ये भी पढ़ें: संघर्षों में फंसा ईरान: कौन पकड़ेंगा ट्रंप की नाक? अमेरिका मध्य एशिया में अपने सपने पूरे करने की ताक में
वर्षों तक चीन ने वेनेजुएला की तेल रिफाइनरी और बुनियादी ढांचे में पैसा लगाया। 2017 से अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से प्रतिबंध कड़े किए जाने के बाद यह देश के लिए आर्थिक सहारा बना। रूस के साथ मिलकर चीन ने वेनेजुएला की सेना को पैसे और हथियार भी दिए। इसमें रडार प्रणाली भी शामिल थी, जिनके बारे में कहा गया था कि रडारी प्रणाली अमेरिकी उन्नत सैन्य विमानों का पता लगा सकती हैं। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ये प्रणालियां उस कार्रवाई को रोकने में नाकाम रहीं, जिसे बिना किसी नुकसान के अंजाम दिया गया।
हडसन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ माइकल सोबोलिक ने कहा, दुनिया का कोई भी देश जिसके पास चीनी रक्षा उपकरण हैं, वह अब अपनी हवाई सुरक्षा जांच रहा है और सोच रहा है कि वह अमेरिका से कितना सुरक्षित है। उन्होंने कहा, वे यह भी देख रहे हैं कि ईरान और वेनेजुएला को लेकर चीन के कूटनीतिक आश्वासन तब बेकार साबित हुए, जब अमेरिकी सेना पहुंची। खुफिया जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, चीन अब यह अध्ययन कर रहा है कि उन सुरक्षा प्रणालियों में क्या कमी रह गई, ताकि वह अपने प्रणाली को मजबूत कर सके।
क्षेत्र में चीन के सामने अन्य चुनौतियां क्या हैं?
क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी चीन पर दबाव बढ़ सकता है। उसने क्यूबा में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है और अमेरिका को संदेह है कि वहां चीन एक खुफिया अभियान चला रहा है। चीन इससे इनकार करता है, लेकिन पिछले साल उसने क्यूबा के साथ खुफिया सहयोग बढ़ाने का वादा किया था। वेनेजुएला की कार्रवाई के बाद के दिनों में ट्रंप ने कहा कि क्यूबा में अमेरिकी सैन्य दखल शायद जरूरी नहीं होगा, क्योंकि वेनेजुएला के तेल की आपूर्ति कम होने से वहां हालात खुद ही बिगड़ते दिख रहे हैं। ट्रंप प्रशासन पनामा नहर के आसपास बंदरगाह संचालन से चीनी कंपनियों को दूर रखने की कोशिश भी जारी रखे हुए है। यह नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ने वाला अहम जलमार्ग है।