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Uttarkashi News: झील में डूबे मंदिरों और रास्तों का नहीं हुआ पुनर्निर्माण
Mon, 19 Oct 2026 05:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Mon, 19 Oct 2026 05:16 PM IST
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स्नान घाटों का अभाव, श्रद्धालुओं को स्नान में हो रही है दिक्कत
चिन्यालीसौड़। चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा के दावे किए जा रहे हैं लेकिन टिहरी से उत्तरकाशी तक भागीरथी नदी के किनारे बुनियादी धार्मिक सुविधाओं का अभाव इन दावों की हकीकत बयां कर रहा है। स्थिति यह है कि श्रद्धालुओं को नदी में स्नान करना तो दूर, आचमन तक के लिए उचित स्थान नहीं मिल पा रहा है।
चिन्यालीसौड़ से उत्तरकाशी मुख्यालय तक नदी किनारे न तो पर्याप्त स्नान घाट हैं और न ही मंदिरों तक पहुंचने के सुगम रास्ते। टिहरी बांध परियोजना की झील का विस्तार होने से टिहरी से चिन्यालीसौड़ और धरासू क्षेत्र तक कई धार्मिक स्थल प्रभावित हुए। शिव, माता, नागराज, नरसिंह, कृष्ण और भैरव के मंदिरों समेत दर्जनों मंदिर झील में डूब गए। नदी तक पहुंचने वाले कई रास्ते भी जलमग्न और क्षतिग्रस्त हो गए।
देवीसौड़ स्थित माता मंदिर का निर्माण टीएचडीसी ने कराया, लेकिन अन्य प्रभावित धार्मिक स्थलों और रास्तों के पुनर्विकास की जरूरत बनी है। पालिकाध्यक्ष मनोज कोहली, ब्लॉक प्रमुख रणवीर महंत, भरत सिंह नाथ, चंदन सिंह का कहना है कि नदी किनारे सुरक्षित स्नान घाट, मंदिरों तक पहुंच मार्ग और पूजा-अर्चना की सुविधाएं विकसित की जाए तो चारधाम यात्रियों को राहत मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है। डीएम प्रशांत आर्य ने कहा कि इस संबंध में सिंचाई विभाग को प्रस्ताव बनाने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
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चिन्यालीसौड़। चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा के दावे किए जा रहे हैं लेकिन टिहरी से उत्तरकाशी तक भागीरथी नदी के किनारे बुनियादी धार्मिक सुविधाओं का अभाव इन दावों की हकीकत बयां कर रहा है। स्थिति यह है कि श्रद्धालुओं को नदी में स्नान करना तो दूर, आचमन तक के लिए उचित स्थान नहीं मिल पा रहा है।
चिन्यालीसौड़ से उत्तरकाशी मुख्यालय तक नदी किनारे न तो पर्याप्त स्नान घाट हैं और न ही मंदिरों तक पहुंचने के सुगम रास्ते। टिहरी बांध परियोजना की झील का विस्तार होने से टिहरी से चिन्यालीसौड़ और धरासू क्षेत्र तक कई धार्मिक स्थल प्रभावित हुए। शिव, माता, नागराज, नरसिंह, कृष्ण और भैरव के मंदिरों समेत दर्जनों मंदिर झील में डूब गए। नदी तक पहुंचने वाले कई रास्ते भी जलमग्न और क्षतिग्रस्त हो गए।
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देवीसौड़ स्थित माता मंदिर का निर्माण टीएचडीसी ने कराया, लेकिन अन्य प्रभावित धार्मिक स्थलों और रास्तों के पुनर्विकास की जरूरत बनी है। पालिकाध्यक्ष मनोज कोहली, ब्लॉक प्रमुख रणवीर महंत, भरत सिंह नाथ, चंदन सिंह का कहना है कि नदी किनारे सुरक्षित स्नान घाट, मंदिरों तक पहुंच मार्ग और पूजा-अर्चना की सुविधाएं विकसित की जाए तो चारधाम यात्रियों को राहत मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है। डीएम प्रशांत आर्य ने कहा कि इस संबंध में सिंचाई विभाग को प्रस्ताव बनाने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
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