छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। आरक्षित वन (रिजर्व फॉरेस्ट) की भूमि पर अतिक्रमण के आरोपों से घिरे बाबा बालक दास के जामडीपाठ (पाटेश्वर धाम) आश्रम में प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है। आगामी 20 जून को आदिवासी समाज द्वारा घोषित 'संरक्षण जातरा' आंदोलन से ठीक पहले पूरा आश्रम परिसर छावनी में तब्दील हो चुका है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने आश्रम से 5 किलोमीटर पहले से ही कड़ा पहरा बैठा दिया है।
सुबह से ही कलेक्टर दिव्या मिश्रा, पुलिस अधीक्षक (SP) योगेश पटेल और वन मंडल अधिकारी (DFO) अभिषेक अग्रवाल सहित जिले के तमाम आला अधिकारी दलबल के साथ मौके पर मुस्तैद हैं। पाटेश्वर धाम में जलकैना के पास नवनिर्मित बाउंड्री वॉल को ढहाने के लिए प्रशासन का बुलडोजर गरज रहा है।
पुलिस के साए में आदिवासियों ने की पूजा
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, पुलिस की कड़ी सुरक्षा में आज आदिवासी समाज के लोग अपने पारंपरिक देव स्थल पर पूजा-पाठ करने पहुँचे। समाज ने साफ कर दिया है कि वे अपने जल, जंगल, जमीन और संस्कृति के हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। आदिवासियों ने आगामी 20 जून को इस पूरे मामले को लेकर बड़े पैमाने पर 'संरक्षण जातरा' का आव्हान किया है। माना जा रहा है कि प्रशासन की यह अचानक हुई कार्रवाई 20 जून के इस बड़े आंदोलन के असर को कम करने और आदिवासियों के गुस्से को शांत करने की एक कोशिश है।
हम समाज के साथ, आदिवासियों के हक पर डाका बर्दाश्त नहीं: अनिला भेड़िया
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। डौंडीलोहारा विधायक और पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने इस विवाद में कूदते हुए सीधे तौर पर शासन-प्रशासन और आश्रम प्रबंधन को घेरा है विधायक भेड़िया ने कहा अगर कोई गरीब आदिवासी पट्टा मांगता है या छोटा किसान एक डिसमिल जमीन की गुहार लगाता है, तो सरकार उसे दुत्कार देती है। लेकिन यहाँ बिना वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के इतने बड़े आरक्षित वन क्षेत्र में कई हेक्टेयर जमीन धाम के नाम पर अलॉट कर दी गई। पंचायतों पर दबाव बनाकर अवैध रूप से सरकारी योजनाओं का पैसा वहाँ लगवाया गया। यह आदिवासियों की आस्था, परंपरा और उनके हक पर डाका है। मैं हर कदम पर अपने समाज के साथ खड़ी हूँ।
सामंजस्य की कोशिशें नाकाम, आर-पार की लड़ाई के मूड में समाज
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन ने पिछले कुछ दिनों में आदिवासी समाज और बाबा बालक दास के बीच बातचीत के जरिए सामंजस्य बनाने की कोशिश की थी, लेकिन यह वार्ता पूरी तरह नाकाम रही। आदिवासी समाज अपनी मांगों को लेकर अडिग है।
संत का पक्ष: 'बातचीत के रास्ते खुले हैं'
दूसरी ओर, इस पूरी कार्रवाई पर संत बाबा बालक दास ने अभी तक कोई आधिकारिक या लिखित बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, ऑफ-द-रिकॉर्ड बात करते हुए उन्होंने केवल इतना कहा कि बातचीत के लिए हमारे द्वार हमेशा खुले हैं, संत का पक्ष हमेशा निष्पक्ष और शांतिप्रिय होता है।फिलहाल मौके पर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बनी हुई है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब पूरे प्रदेश की नजरें 20 जून को होने वाले आदिवासियों के 'संरक्षण जातरा' आंदोलन पर टिक गई हैं।

आश्रम में बुलडोजर कार्रवाई - फोटो : credit
आश्रम में बुलडोजर कार्रवाई - फोटो : credit
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