देश भर में बड़ी परीक्षाओं की साख पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच बालोद जिले के घनश्याम सिंह गुप्त महाविद्यालय में एलएलबी द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में गंभीर लापरवाही सामने आई है। परीक्षा प्रबंधन की एक बड़ी चूक के कारण परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ। इस घटना से छात्रों में मानसिक तनाव की स्थिति निर्मित हो गई है।
घनश्याम सिंह गुप्त महाविद्यालय में एलएलबी द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा चल रही थी। निर्धारित समय सारणी के अनुसार छात्रों को 'क्रिमिनोलॉजी, पेनोलॉजी एवं विक्टिमोलॉजी' विषय का प्रश्नपत्र दिया जाना था। परीक्षा कक्ष में वीक्षकों ने प्रश्नपत्र वितरित कर दिए। छात्रों ने उसे हल करना भी शुरू कर दिया था। इसी दौरान कुछ छात्राओं को प्रश्नपत्र के प्रश्नों और उसके स्वरूप पर संदेह हुआ। छात्राओं ने तुरंत इसकी जानकारी कक्ष में मौजूद शिक्षकों को दी। शिक्षकों ने बारीकी से मिलान किया तो कॉलेज प्रबंधन के पैरों तले जमीन खिसक गई। परीक्षार्थियों को 'क्रिमिनोलॉजी, पेनोलॉजी एवं विक्टिमोलॉजी' की जगह 'क्रिमिनोलॉजी एवं पेनोलॉजी' विषय का गलत प्रश्नपत्र थमा दिया गया था।
गलती का अहसास होते ही महाविद्यालय प्रबंधन में हड़कंप मच गया। कॉलेज प्रशासन ने आनन-फानन में विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग से संपर्क साधा। उन्होंने मामले की पूरी जानकारी विश्वविद्यालय को दी। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए तुरंत ईमेल के माध्यम से सही प्रश्नपत्र भेजा। विश्वविद्यालय से सुबह ठीक 11 बजकर 9 मिनट पर सही प्रश्नपत्र का सेट ईमेल के जरिए कॉलेज को प्राप्त हुआ। इसके बाद कॉलेज कर्मचारियों ने युद्धस्तर पर प्रश्नपत्रों की प्रतियां निकालीं। इन प्रतियों को तुरंत विद्यार्थियों को वितरित किया गया। इस पूरी अव्यवस्था और अफरा-तफरी के कारण परीक्षा अपने निर्धारित समय से लगभग आधे घंटे की देरी से शुरू हो सकी।
जिम्मेदारी को लेकर दोषारोपण
इस घटना के बाद से विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रबंधन के बीच जिम्मेदारी को लेकर रस्साकशी शुरू हो गई है। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि विश्वविद्यालय द्वारा जो प्रश्नपत्र पैकेट में भेजा गया था, वही वितरित किया गया। वे अपनी ओर से किसी गलती से इन्कार कर रहे हैं। वहीं, छात्र संगठन इस पूरी परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। परीक्षार्थियों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से परीक्षा कक्ष में उनका कीमती समय बर्बाद हुआ। उन्हें अनावश्यक रूप से मानसिक तनाव से भी गुजरना पड़ा। छात्र संगठन इस मामले में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
भविष्य की कार्रवाई पर सवाल
यह संवेदनशील मामला छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। परीक्षा में हुई इस चूक ने छात्रों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में संबंधित दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है। क्या इस लापरवाही के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। या फिर हर बार की तरह इस बार भी मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। छात्र और अभिभावक इस मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।
बालोद में बंटा गलत पेपर