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Babu Singh Kushwaha News: Action taken against a close aide of Babu Singh Kushwaha in Rs 100 crore property ca
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Babu Singh Kushwaha News:100 करोड़ संपत्ति मामले में बाबू सिंह कुशवाहा के करीबी पर कार्रवाई
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Wed, 21 Jan 2026 03:41 PM IST
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उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बेनामी संपत्तियों का मामला सुर्खियों में है। जौनपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद और पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के करीबी देशराज सिंह की कानपुर रोड स्थित करीब 100 करोड़ रुपये कीमत की जमीन अब पूरी तरह सरकारी हो चुकी है। इस जमीन को आयकर विभाग ने मार्च 2023 में बेनामी संपत्ति निषेध अधिनियम के तहत जब्त किया था, और अब नई दिल्ली स्थित निर्णायक प्राधिकारी ने विभाग की कार्रवाई को सही ठहराया है। इसके साथ ही आयकर विभाग को इस संपत्ति को अपने कब्जे में लेकर नीलाम करने का रास्ता साफ हो गया है।
यह कार्रवाई आयकर विभाग की लंबे समय से चल रही जांच का नतीजा है। विभाग को इस हाई-वैल्यू जमीन का सुराग मई 2022 में मिला था, जब कानपुर में देशराज सिंह के आवास पर छापा मारा गया। यह छापा राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स की बेनामी संपत्तियों को उजागर करने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन बाबू साहब-2’ के तहत किया गया था। छापेमारी के दौरान ऐसे दस्तावेज सामने आए, जिनसे यह साफ हुआ कि जमीन कागजों में किसी और के नाम थी, लेकिन वास्तविक नियंत्रण किसी और का था।
जांच में सामने आया कि बंथरा इलाके के जुनाबगंज स्थित पांच सितारा होटल के सामने मौजूद 1.6670 हेक्टेयर की यह जमीन पहले एक कंपनी के नाम दर्ज थी। बाद में इसे कागजों पर बाबू सिंह कुशवाहा के करीबी देशराज सिंह को बेचा गया। हालांकि, आयकर विभाग की जांच में पाया गया कि इस जमीन पर वास्तविक कब्जा और नियंत्रण बाबू सिंह कुशवाहा का ही था। यही नहीं, जमीन की खरीद-फरोख्त में फर्जी लेनदेन दिखाया गया। कागजों में चेक नंबरों का उल्लेख तो था, लेकिन भुगतान के ठोस प्रमाण नहीं मिले, जिससे सौदे को दिखावटी माना गया।
इस पूरे मामले की कड़ी 2022 के विधानसभा चुनाव से भी जुड़ती है। चुनावी माहौल के बीच आयकर विभाग ने सरोजनीनगर में उद्यमिता विकास संस्थान के निदेशक देवेंद्र पाल की कार से 30 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और लखनऊ, दिल्ली और गाजियाबाद में कई ठिकानों पर छापे मारे गए। इन छापों के दौरान पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के दो करीबी कानपुर निवासी राजू चौहान और देशराज सिंह कुशवाहा का नाम सामने आया, जो प्रॉपर्टी डीलर बताए गए।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि उपायुक्त उद्योग राजेश सिंह यादव की मां विमला यादव की समिति ने राजू चौहान और देशराज सिंह को 12-12 बीघा जमीन बेची थी। इस तरह कुल 24 बीघा जमीन की बिक्री महज 3.6 करोड़ रुपये में दिखाई गई, जबकि उस जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य करीब 20 करोड़ रुपये था। यही नहीं, समिति द्वारा अलग-अलग इलाकों में करीब 150 बीघा जमीन खरीदे जाने की बात भी सामने आई। वर्ष 2020-21 में इसी समिति ने राजू चौहान और देशराज सिंह को यह जमीन ट्रांसफर की थी।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी पहले से कार्रवाई कर चुका है। ईडी ने एनआरएचएम घोटाले से जुड़े मामलों में बाबू सिंह कुशवाहा की करीब 100 करोड़ रुपये कीमत की संपत्तियां पहले ही जब्त कर रखी हैं। बसपा सरकार में मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा इस घोटाले के आरोप में करीब चार साल जेल में भी रह चुके हैं। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने ‘जन अधिकार मंच’ नाम से अपनी पार्टी बनाई थी। बाद में समाजवादी पार्टी ने उन्हें जौनपुर से लोकसभा उम्मीदवार बनाया, जहां से वह सांसद चुने गए।
अब आयकर विभाग की इस ताजा कार्रवाई ने न सिर्फ बाबू सिंह कुशवाहा के राजनीतिक सफर पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेनामी संपत्तियों और काले धन को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
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