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BMC Election Results: Athawale suggests a way to the BMC Mayor post, Shinde-Fadnavis in a deadlock!
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BMC Election Results : BMC मेयर पद पर अठावले ने सुझाया रास्ता, शिंदे-फडणवीस में फंस गया पेंच!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Tue, 20 Jan 2026 04:30 AM IST
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केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, "जब 2-3 पार्टियां साथ होती हैं, तो जिस पार्टी के पास सबसे ज़्यादा सीटें होती हैं, उसे मेयर का पद मिलता है। मुंबई में, 227 सीटों में भाजपा की 89 और शिवसेना की 29 सीटें हैं। ऐसा कोई नियम नहीं है, लेकिन यह समझा जाता है कि जिस पार्टी के पास सबसे ज़्यादा सीटें होती हैं, उसे मेयर पद मिलता है, और जिस पार्टी के पास कम सीटें होती हैं, उसे डिप्टी मेयर पद मिलता है.देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे साथ बैठेंगे और फैसला लिया जाएगा मेयर महायुति गठबंधन का होगा।"
मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर पद को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज होती दिख रही है और इस बार नए समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं। देश की सबसे अमीर नगर निकाय मानी जाने वाली बीएमसी का मेयर पद हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा और शक्ति का प्रतीक रहा है। लंबे समय तक शिवसेना का दबदबा रहने के बाद बदले राजनीतिक हालात ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। राज्य की राजनीति में हुए विभाजन और गठबंधनों के फेरबदल का सीधा असर अब बीएमसी की राजनीति पर भी दिखाई दे रहा है। एक ओर जहां शिवसेना के दोनों गुट अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं, वहीं भाजपा भी मेयर पद पर कब्जा जमाने की रणनीति को अंतिम रूप देने में लगी है।
कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी बदले हालात में खुद को निर्णायक भूमिका में लाने की कोशिश कर रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार मेयर का चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा संदेश राज्य और राष्ट्रीय राजनीति तक जाएगा। संभावित चुनाव को देखते हुए दलों ने वार्ड स्तर पर समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं और पुराने पार्षदों के साथ-साथ नए चेहरों को भी महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि गठबंधन की राजनीति इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकती है, जहां किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में समर्थन और समझौते अहम होंगे। पर्दे के पीछे बातचीत का दौर तेज है और कुछ अप्रत्याशित गठजोड़ भी सामने आ सकते हैं।
बीएमसी के बजट, विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर दल एक-दूसरे पर हमला बोल रहे हैं, ताकि जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत की जा सके। साथ ही मराठी अस्मिता, शहरी विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों को भी चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। कुल मिलाकर, बीएमसी मेयर पद की लड़ाई इस बार बेहद दिलचस्प और बहुआयामी होती जा रही है, जहां पुराने राजनीतिक समीकरण टूटते और नए बनते नजर आएंगे, और इसका असर आने वाले समय में मुंबई की राजनीति और शासन व्यवस्था दोनों पर साफ तौर पर दिखाई देगा।
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