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Bijendra Yadav on Tejashwi Yadav: Deputy CM's Response to Nishant's Absence and Tejashwi's Statement
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Bijendra Yadav on Tejashwi Yadav: निशांत की गैरमौजूदगी और तेजस्वी के बयान पर डिप्टी सीएम का जवाब
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Wed, 15 Apr 2026 05:41 PM IST
बिहार की नई सरकार के गठन के बीच एक नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार। सरकार बनने से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है, लेकिन उन्होंने खुद को सत्ता से दूर रखने का फैसला किया। इतना ही नहीं, वे शपथ ग्रहण समारोह में भी नजर नहीं आए, जिससे सियासी हलकों में कई सवाल उठने लगे हैं।
इस पूरे मुद्दे पर अब नई सरकार के डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने साफ कहा कि राजनीति में आना या न आना निशांत कुमार का व्यक्तिगत निर्णय है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर निशांत संगठन में काम करना चाहते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा। यह बयान साफ तौर पर यह संकेत देता है कि जदयू के दरवाजे उनके लिए खुले हैं, लेकिन फैसला पूरी तरह निशांत पर ही निर्भर है।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी बयानबाजी को भी तेज कर दिया है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ‘लालू की पाठशाला’ से निकले हैं। जरा सुनए तेजस्वी यादव ने क्या कहा था।
इस बयान पर पलटवार करते हुए बिजेंद्र यादव ने कहा “वो खुद किसकी पाठशाला से निकले हैं? पहले तो सब जनता दल में ही थे।” इस बयान के जरिए उन्होंने राजनीतिक इतिहास की ओर इशारा करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा।
वहीं कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में पीछे नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने कहा कि जनता ने जिस चेहरे पर भरोसा कर वोट दिया, वह अचानक बदल गया। उनका कहना है कि नीतीश कुमार के नाम पर चुनाव लड़ा गया, लेकिन अब बीच कार्यकाल में उनका हटना बिहार की जनता के साथ एक तरह का ‘छल’ है।
दरअसल, बिहार की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि भरोसे और नेतृत्व को लेकर भी नई बहस छेड़ रहा है। एक तरफ जहां एनडीए इसे नई शुरुआत बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे जनादेश के साथ खिलवाड़ बता रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निशांत कुमार भविष्य में सक्रिय राजनीति में कदम रखेंगे? क्या जदयू उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देगी? और क्या यह पूरा घटनाक्रम बिहार की राजनीति में नए समीकरण पैदा करेगा?
फिलहाल, बिहार की सियासत में हर दिन नए मोड़ सामने आ रहे हैं और आने वाले वक्त में यह तस्वीर और भी साफ होगी।
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