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CAPF vs IPS: Former CAPF cadre officers make a big demand to the government to be involved in policy making!
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CAPF vs IPS: CAPF के पूर्व कैडर अफसरों ने की सरकार से पॉलिसी मेकिंग में शामिल होने की बड़ी मांग!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sat, 21 Mar 2026 12:33 AM IST
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केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026, जिसे पिछले सप्ताह ही कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दी है, सरकार अब इसे संसद में पेश किए जाने की तैयारी कर रही है। सीएपीएफ के पूर्व कैडर अफसरों का कहना है कि 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जीतने के बाद भी कैडर अफसरों को नाइंसाफी झेलनी पड़ रही है। वजह, सरकार ने इस फैसले को लागू नहीं किया। अवमानना केस की सुनवाई के दौरान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि वह इस मामले में वैधानिक हस्तक्षेप के लिए बिल ला रही है। सहायक कमांडेंट को पहली पदोन्नति के लिए 15 साल का इंतजार करना पड़ता है। इस बिल से कैडर अधिकारियों के हित प्रभावित होंगे। उनकी पदोन्नति में और ज्यादा देरी होगी। कैडर अफसरों की मांग है कि उन्हें पॉलिसी मेकिंग में शामिल किया जाए। उन्हें सरकार अपने से दूर न करे। इन सब मुद्दों को लेकर शुक्रवार को पूर्व कैडर अफसरों ने नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में अपना पक्ष रखा।
सभी केंद्रीय सेवाओं में यह नियम बनाया गया था कि अगर तय समय पर पदोन्नति नहीं मिले तो उसका वेतन 'एनएफएफयू' दे दिया जाए। ये नियम
केंद्रीय सुरक्षा बलों में लागू नहीं किया गया। इसके लिए बहुत से प्रतिवेदन दिए गए, लेकिन सरकार ने नहीं सुनी। नतीजा, दिल्ली हाईकोर्ट में जाना पड़ा। वहां से कैडर अफसरों के हक में फैसला आया। सरकार ने नहीं माना तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सरकार को छह माह में फैसला लागू करने के लिए कहा गया। इसके बावजूद सरकार ने इसे लागू नहीं किया। यह बिल सुप्रीम कोर्ट के आदेश को समाप्त करने के लिए लाया गया है।
शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला के अधिकारों के लिए फैसला दिया था, लेकिन सरकार ने उसे पलट दिया। कैडर अफसरों के केस में ऐसा ही हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू नहीं किया जा रहा। 17 साल के बाद जीती गई कानूनी लड़ाई को सरकार हराने का काम कर रही है। अगर ये कानून लागू होता है तो उससे कैडर अफसरों के करियर में अवसर प्रभावित होंगे। यह तर्क देना कि आईपीएस प्रतिनियुक्ति से समन्वय में सुधार होगा। इससे इंटेलिजेंस बढ़ेगी। अगर दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का फैसला देखेंगे तो उसमें इन तर्कों को रिजेक्ट कर दिया गया है। दस माह बाद भी कोर्ट का फैसला लागू नहीं हो रहा। इस बिल के द्वारा सरकार एक बिरादरी का पक्ष ले रही है।
हमारी बात सुननी चाहिए। हमें टेस्ट तो करो। हम एक अनुशासित बल के सदस्य हैं। राष्ट्र की सेवा में पूरा जीवन लगाया है। गोलियों के बीच नौकरी की है। हम यह सोचते रहे कि दिल्ली में जो लोग बैठे हैं, वे हमारा ख्याल रखेंगे। ऐसा कुछ नहीं हुआ, जो भी सर्विस रूल बने, वे हमारे लिए नहीं थी। शीर्ष पद भी हमें नहीं मिल सके। हम कुछ नहीं मांग रहे। हमारी मांग है कि कैडर अफसरों को पॉलिसी मेकिंग में शामिल करो। हमें अपने से दूर मत करो। रैंक हमारे लिए कोई मतलब नहीं रखता, जब तक हमें पॉलिसी बनाने में शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने बिना नाम लिए आईपीएस अफसरों से कहा, आप हमें छोटा भाई समझें।
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