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Jaya Bachchan Meets Mamata Banerjee: Why did Jaya Bachchan meet Mamata after Akhilesh? TMC Split
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Jaya Bachchan Meets Mamata Banerjee: अखिलेश के बाद जया बच्चन ने क्यों की ममता से मुलाकात? TMC Split
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Fri, 03 Jul 2026 02:10 AM IST
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद राज्य की राजनीति में हलचल लगातार जारी है। इसी बीच समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने कोलकाता में ममता बनर्जी से उनके कालीघाट स्थित आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ शिष्टाचार भेंट थी या फिर विपक्षी राजनीति में किसी नए समीकरण की शुरुआत? देखिए हमारी यह रिपोर्ट।
गुरुवार को समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से उनके कालीघाट स्थित आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब हालिया विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में इस मुलाकात के कई राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं।
दरअसल, कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता किरणमय नंदा ने कोलकाता दौरे के दौरान टीएमसी की हार के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि जनता उन्हें लगातार चौथी बार सत्ता में नहीं देखना चाहती थी। इस बयान के बाद माना जाने लगा कि INDIA गठबंधन के दो अहम सहयोगी दलों के बीच दूरी बढ़ रही है। लेकिन जया बच्चन की मुलाकात ने इन अटकलों को नया मोड़ दे दिया है।
हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इस मुलाकात को पूरी तरह गैर-राजनीतिक बताया है। पार्टी नेता कुणाल घोष का कहना है कि जया बच्चन और ममता बनर्जी के बीच वर्षों पुराने व्यक्तिगत संबंध हैं। दोनों लंबे समय से एक-दूसरे के संपर्क में हैं और यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट थी। इससे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी चुनाव परिणाम आने के बाद कोलकाता पहुंचकर ममता बनर्जी से मिले थे। उस मुलाकात को विपक्षी एकजुटता और समर्थन के संदेश के तौर पर देखा गया था।
वहीं, इस मुलाकात को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने भी तंज कसा है। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री और भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि किसी भी नेता का ममता बनर्जी से मिलना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर तृणमूल कांग्रेस में असली नेतृत्व किसके हाथ में है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी हार के बाद पार्टी कई गुटों में बंट चुकी है और अब यह तय करना मुश्किल हो गया है कि असली टीएमसी कौन-सी है। भाजपा का आरोप है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जया बच्चन और ममता बनर्जी की मुलाकात यह संकेत देती है कि सार्वजनिक बयानों और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विपक्षी दलों के बीच संवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि टीएमसी इसे सिर्फ निजी मुलाकात बता रही है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इस मुलाकात के राजनीतिक मायनों से इनकार भी नहीं किया जा सकता। अब आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित रहती है या विपक्षी राजनीति में किसी नए समीकरण की भूमिका तैयार करती है।
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