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No Confidence Motion Against CEC: Opposition to bring no-confidence motion against CEC, Congress-TMC united
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No Confidence Motion Against CEC: CEC के खिलाफ विपक्ष लाएगा अविश्वास प्रस्ताव कांग्रेस-TMC एकजुट
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Wed, 11 Mar 2026 03:32 AM IST
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भारत की राजनीति में एक नया विवाद तब सामने आया जब विपक्षी दलों ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ महाभियोग या अविश्वास प्रस्ताव लाने की संभावना पर चर्चा शुरू कर दी। इस मुद्दे पर प्रमुख विपक्षी दल Mallikarjun Kharge के नेतृत्व वाली Indian National Congress और All India Trinamool Congress (टीएमसी) सहित कई दलों के एकजुट होने की खबरें सामने आई हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली को लेकर पारदर्शिता और तटस्थता को लेकर संदेह पैदा हुआ है। इसी कारण विपक्ष इस मुद्दे को संसद में उठाकर संवैधानिक प्रक्रिया के तहत महाभियोग प्रस्ताव या अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति पर विचार कर रहा है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग देश की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक है और उसकी निष्पक्षता लोकतंत्र की नींव मानी जाती है। यदि इस संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरे चुनावी तंत्र के लिए चिंता का विषय बन जाता है। कांग्रेस और टीएमसी का मानना है कि चुनाव से जुड़ी कई हालिया घटनाओं और फैसलों ने विपक्षी दलों के बीच यह धारणा मजबूत की है कि आयोग की निष्पक्षता पर पुनर्विचार की जरूरत है। इसी कारण इन दलों ने मिलकर इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने के संकेत दिए हैं।
बताया जा रहा है कि विपक्ष इस विषय पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा कराने की कोशिश करेगा और यदि पर्याप्त समर्थन मिला तो मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर सकता है। हालांकि भारतीय संविधान के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है और इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। इस वजह से विपक्षी दल पहले व्यापक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि इस प्रस्ताव को राजनीतिक और संवैधानिक मजबूती मिल सके।
वहीं सत्तारूढ़ दल Bharatiya Janata Party (भाजपा) और उसके सहयोगियों ने विपक्ष के इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को राजनीतिक विवाद में घसीटना उचित नहीं है और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान हो सकता है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार और राजनीतिक असफलताओं के कारण इस तरह के आरोप लगा रहा है।
इस पूरे मुद्दे ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर विपक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ पक्ष इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष इस मुद्दे पर कितना समर्थन जुटा पाता है और क्या वास्तव में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव संसद में लाया जाता है या यह केवल राजनीतिक दबाव की रणनीति बनकर रह जाता है।
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