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'Operation Tiger' in final stage: Two MPs from the Uddhav faction join the Shinde faction—a double blow in a s
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'Operation Tiger' In Final Stage: उद्धव गुट के दो सांसदों ने थामा शिंदे गुट का दामन,एक दिन में लगा दोहरा झटका!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Mon, 22 Jun 2026 12:24 AM IST
रविवार को महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को दो सांसदों के रूप में बड़ा झटका लगा। हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का एलान किया। पिछले कई दिनों से उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपने फैसले पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में आष्टीकर ने कहा कि उन्होंने अपनी विचारधारा या हिंदुत्व के मूल सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी दूसरी विचारधारा वाली पार्टी में नहीं गए हैं, बल्कि “एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना” में शामिल हुए हैं। उनके अनुसार यह निर्णय किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण नहीं, बल्कि राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टी के भीतर उत्पन्न हालात को देखते हुए लिया गया है।
नागेश पाटिल आष्टीकर ने अपने संदेश में बताया कि 18 जून तक उन्होंने और कुछ अन्य सांसदों ने पार्टी छोड़ने या किसी अन्य राजनीतिक निर्णय को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं किया था। उनका कहना था कि वे लगातार स्थिति का आकलन कर रहे थे और संगठन के भीतर समाधान की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि, 18 जून के बाद उनके खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों और बयानों ने उन्हें गहराई से आहत किया। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों और सार्वजनिक रूप से की गई आलोचनाओं ने उन्हें आत्ममंथन के लिए मजबूर किया। आष्टीकर के अनुसार, जब उन्हें लगा कि उनके सम्मान और राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तब उन्होंने नया रास्ता चुनने का निर्णय लिया।
इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही थी। दूसरी ओर, एकनाथ शिंदे खेमे के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनके नेतृत्व वाली शिवसेना की राजनीतिक ताकत और प्रभाव बढ़ने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के दलबदल महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बना सकते हैं। नागेश पाटिल आष्टीकर के इस कदम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि शिवसेना के दोनों गुटों के बीच राजनीतिक संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले समय में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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