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Rajasthan Panchayat Elections: Those with more than 2 children will also contest Rajasthan civic elections, Do
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Rajasthan Panchayat Chunav: 2 से ज्यादा बच्चे वाले भी लडेंगे राजस्थान निकाय चुनाव, भड़क उठे डोटासरा!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Thu, 26 Feb 2026 03:30 AM IST
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राजस्थान की राजनीति में एक अहम बदलाव उस समय चर्चा का विषय बन गया जब राज्य में दो से अधिक संतान वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर लगी रोक को हटाने का फैसला किया गया। पहले राज्य के पंचायती राज कानून के तहत यह प्रावधान था कि जिन व्यक्तियों की दो से अधिक संतान हैं, वे स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते। यह नियम जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लागू किया गया था। हालांकि समय के साथ इस प्रावधान को लेकर विभिन्न स्तरों पर बहस होती रही। कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का तर्क था कि यह नियम व्यक्तिगत अधिकारों का हनन करता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी को सीमित करता है। उनका कहना था कि परिवार का आकार व्यक्तिगत निर्णय का विषय है और इसे चुनाव लड़ने की पात्रता से जोड़ना उचित नहीं है।
राज्य सरकार ने इन तर्कों पर विचार करते हुए संबंधित कानून में संशोधन का रास्ता अपनाया, जिससे अब दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति भी चुनावी मैदान में उतर सकेंगे। इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में संभावित उम्मीदवारों को राहत मिली है, जो पहले इस प्रावधान के कारण चुनाव लड़ने से वंचित रह जाते थे। सरकार का कहना है कि लोकतंत्र में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है और किसी भी नागरिक को केवल संतान संख्या के आधार पर अयोग्य ठहराना उचित नहीं है। वहीं विपक्षी दलों ने इस निर्णय पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली बताया, तो कुछ ने आशंका जताई कि इससे जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को झटका लग सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव का असर आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में देखने को मिल सकता है, क्योंकि अब उम्मीदवारों का दायरा पहले से व्यापक होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में यह मुद्दा खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां परिवार का आकार अक्सर बड़ा होता है। कुल मिलाकर, राजस्थान में दो से अधिक संतान वाले लोगों को चुनाव लड़ने की अनुमति देने का निर्णय राज्य की राजनीति और सामाजिक विमर्श दोनों में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो लोकतांत्रिक भागीदारी और जनसंख्या नीति के बीच संतुलन पर नई चर्चा को जन्म देता है।
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