Hindi News
›
Video
›
India News
›
Trump to leave NATO: Is the US withdrawing from NATO amid Iran, Israel war?
{"_id":"69ce97e2684ab81f0d05de26","slug":"trump-to-leave-nato-is-the-us-withdrawing-from-nato-amid-iran-israel-war-2026-04-02","type":"video","status":"publish","title_hn":"Trump to Leave NATO: ईरान इस्राइल के युद्ध के बीच क्या नाटो से अलग होने वाला है अमेरिका ?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Trump to Leave NATO: ईरान इस्राइल के युद्ध के बीच क्या नाटो से अलग होने वाला है अमेरिका ?
वीडियो डेस्क,अमर उजाला Published by: Sahil Suyal Updated Thu, 02 Apr 2026 09:53 PM IST
Link Copied
एक महीने पहले जब पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट तेज हुई और अमेरिका तथा इस्राइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, तब पूरी दुनिया में एक ही डर फैल गया था क्या यह संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले सकता है? विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि अगर ईरान जवाबी हमला करता है, तो अमेरिका के सहयोगी देश, खासकर नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्य, उसके साथ खड़े होंगे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, यह साफ होता गया कि यह युद्ध केवल हथियारों का नहीं, बल्कि कूटनीति, गठबंधनों और हितों का भी है। ईरान ने पलटवार जरूर किया, लेकिन जिस तरह की एकजुटता की उम्मीद अमेरिका को अपने सहयोगियों से थी, वह देखने को नहीं मिली।
कई यूरोपीय देशों ने साफ शब्दों में कह दिया कि यह संघर्ष अमेरिका ने खुद शुरू किया है, इसलिए वे इसमें सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे। यही वह मोड़ था, जहां से वैश्विक राजनीति में एक नई बहस ने जन्म लिया क्या नाटो अब भी उतना ही मजबूत और प्रभावी है, जितना कभी हुआ करता था? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस स्थिति से खासे नाराज नजर आए। उन्होंने न सिर्फ अपने सहयोगियों की आलोचना की, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर उन्होंने नाटो को “कागज का शेर” तक कह दिया। यह बयान सिर्फ गुस्से का इजहार नहीं था, बल्कि उस गहरी निराशा को दर्शाता था, जो अमेरिका को अपने पारंपरिक सहयोगियों के रवैये से हो रही थी।
यहीं से एक और बड़ा सवाल सामने आया क्या अमेरिका वास्तव में नाटो जैसे ऐतिहासिक सैन्य गठबंधन से बाहर निकल सकता है? और अगर ऐसा होता है, तो इसका असर दुनिया पर क्या पड़ेगा? नाटो, यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन, केवल एक सैन्य गठबंधन नहीं है, बल्कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी उस वैश्विक व्यवस्था का आधार स्तंभ है, जिसने दशकों तक यूरोप में शांति और संतुलन बनाए रखा। 1949 में वॉशिंगटन डीसी में 12 देशों ने मिलकर इसकी स्थापना की थी। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य था सोवियत संघ के बढ़ते प्रभाव को रोकना और पश्चिमी देशों की सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करना। नाटो का सबसे अहम सिद्धांत है आर्टिकल 5। इसका मतलब है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे पूरे गठबंधन पर हमला माना जाएगा। यानी सभी सदस्य देश मिलकर उसका जवाब देंगे। यही वह सिद्धांत है, जिसने नाटो को दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य गठबंधनों में से एक बनाया।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।