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UGC New Rule 2026 Row: Nitish Kumar differs from PM Modi on UGC Bill, causing uproar from Delhi to Bihar!
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UGC New Rule 2026 Row: UGC बिल पर नीतीश हुए पीएम मोदी से अलग, दिल्ली से बिहार तक मचा बवाल!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Thu, 29 Jan 2026 03:30 AM IST
यूजीसी बिल को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा न होना भारतीय संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों को लेकर उनकी लगातार बनी रही सोच को दर्शाता है। नीतीश कुमार लंबे समय से शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक विकास जैसे विषयों पर केंद्र सरकार के अत्यधिक केंद्रीकरण के आलोचक रहे हैं। उनका मानना है कि शिक्षा एक समवर्ती विषय होने के बावजूद राज्यों की भूमिका को कमजोर किया जा रहा है, जो न तो संविधान की भावना के अनुरूप है और न ही व्यावहारिक रूप से उचित। यूजीसी बिल में केंद्र को विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों पर अधिक नियंत्रण देने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, जिससे राज्यों की स्वायत्तता सीमित हो सकती है।
नीतीश कुमार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि बिहार जैसे राज्यों की शैक्षिक ज़रूरतें, सामाजिक संरचना और संसाधन केंद्र द्वारा बनाए गए एकरूप नियमों से पूरी तरह मेल नहीं खा सकतीं। वे मानते हैं कि यदि नीति निर्माण में राज्यों की सहमति और भागीदारी नहीं होगी, तो शिक्षा सुधार केवल कागज़ी साबित होंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जहां इस बिल को गुणवत्ता और मानकीकरण से जोड़कर देखती है, वहीं नीतीश कुमार इसे राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप के रूप में देखते हैं।
उनका यह रुख केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि एक वैचारिक असहमति भी है, जिसमें संघवाद, विकेंद्रीकरण और सहकारी संघवाद की अवधारणा प्रमुख है। नीतीश कुमार पहले भी नई शिक्षा नीति, जनगणना, और विशेष राज्य के दर्जे जैसे मुद्दों पर केंद्र से अलग राय रखते आए हैं। यूजीसी बिल पर असहमति जताकर वे यह संदेश देते हैं कि विकास केवल ऊपर से थोपे गए फैसलों से नहीं बल्कि ज़मीनी हकीकत को समझकर और राज्यों को विश्वास में लेकर ही संभव है। इस मुद्दे पर उनका प्रधानमंत्री के साथ न खड़ा होना यह भी दिखाता है कि वे अपनी राजनीतिक सुविधा से अधिक बिहार और अन्य राज्यों के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता देने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, यूजीसी बिल पर नीतीश कुमार का रुख भारतीय लोकतंत्र में बहस, असहमति और संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है, जो किसी भी मजबूत संघीय व्यवस्था की पहचान होती है।
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