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UGC New Rule 2026 Row: Congress made a big bet on the new UGC rule, citing the 1989 law!
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UGC New Rule 2026 Row: UGC के नए नियम पर कांग्रेस ने खेला बड़ा दांव, 1989 के कानून का दिया हवाला!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Wed, 28 Jan 2026 04:30 AM IST
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर देशभर में लगातार विरोध देखने को मिल रहा है, जिसने उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इन नए नियमों का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप भारतीय विश्वविद्यालयों को ढालना बताया जा रहा है, लेकिन छात्र संगठनों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग इन्हें व्यवहारिक और छात्रहित के विरुद्ध मान रहा है। विरोध करने वालों का कहना है कि यूजीसी के ये नियम शिक्षा को अधिक केंद्रीकृत और जटिल बना देंगे, जिससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम व प्रशासनिक निर्णय लेना मुश्किल हो जाएगा। कई शिक्षकों का तर्क है कि नई व्यवस्था में फैकल्टी नियुक्ति, पदोन्नति और शोध से जुड़े प्रावधान अस्पष्ट हैं, जिससे अस्थिरता और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
छात्र संगठनों ने भी इन नियमों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए हैं और आरोप लगाया है कि इससे शिक्षा महंगी होगी तथा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुँच और कठिन हो जाएगी। उनका कहना है कि नई क्रेडिट प्रणाली, ऑनलाइन शिक्षा पर बढ़ता ज़ोर और पाठ्यक्रम की संरचना में अचानक किए गए बदलाव छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों में शिक्षण सत्र प्रभावित हुआ है और शैक्षणिक माहौल में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा, राज्यों की सरकारों ने भी केंद्र और यूजीसी के बीच अधिकारों के बँटवारे को लेकर सवाल उठाए हैं और कहा है कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय होने के बावजूद राज्यों की भूमिका को कमज़ोर किया जा रहा है।
दूसरी ओर, यूजीसी और केंद्र सरकार का कहना है कि ये नियम दीर्घकालिक सुधारों की दिशा में एक आवश्यक कदम हैं और शुरुआती विरोध के बावजूद इससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उनका तर्क है कि नए नियमों से छात्रों को बहुविषयक शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय अवसर और रोजगार के बेहतर विकल्प मिलेंगे। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े शैक्षणिक सुधार को लागू करने से पहले सभी हितधारकों से व्यापक संवाद और ज़मीनी हकीकत को समझना ज़रूरी है। कुल मिलाकर, यूजीसी के नए नियमों को लेकर जारी यह विरोध शिक्षा सुधार बनाम व्यावहारिक चुनौतियों की टकराहट को दर्शाता है, और आने वाले समय में इस पर सरकार और आयोग की प्रतिक्रिया उच्च शिक्
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