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India-EU Trade Deal: On the India-EU FTA deal, CM Fadnavis explained how the youth will get employment?
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India-EU Trade Deal: भारत-EU FTA डील पर सीएम फडणवीस ने बताया कैसे मिलेगा युवाओं को रोजगार?
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Wed, 28 Jan 2026 01:28 AM IST
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भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India-EU FTA) वर्तमान समय में वैश्विक व्यापार और कूटनीति के लिहाज़ से एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यूरोपीय संघ भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और दोनों के बीच वस्तुओं व सेवाओं का व्यापार लगातार बढ़ रहा है। इस FTA का मुख्य उद्देश्य आयात-निर्यात शुल्क को कम करना, निवेश को प्रोत्साहित करना, बाज़ार तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करना और व्यापार से जुड़ी बाधाओं को हटाना है। यदि यह समझौता लागू होता है, तो भारतीय उत्पादों जैसे टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, आईटी सेवाओं और कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक अवसर मिल सकते हैं, जिससे निर्यात में वृद्धि और रोज़गार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। वहीं यूरोपीय संघ की कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाज़ार, बुनियादी ढाँचे, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
हालाँकि, इस समझौते को लेकर कुछ चुनौतियाँ और मतभेद भी सामने आते रहे हैं। बौद्धिक संपदा अधिकार, डेटा सुरक्षा, पर्यावरण मानक, श्रम कानून और कृषि क्षेत्र जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चर्चा चल रही है। भारत अपनी घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देता है, जबकि यूरोपीय संघ उच्च पर्यावरण और श्रम मानकों पर ज़ोर देता है।
इसके बावजूद, हाल के वर्षों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव, चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति और भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भारत-EU FTA को नई गति दी है। यह समझौता केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूती मिल सकती है। कुल मिलाकर, भारत-EU FTA अगर संतुलित और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम रूप लेता है, तो यह दोनों पक्षों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति पैदा कर सकता है और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में और मजबूत स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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