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Union Budget 2026: Athawale said a wonderful poem on the budget, the entire budget in simple language!
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Union Budget 2026:बजट पर अठावले ने सुनाई शानदार कविता, सरल भाषा में समझाया पूरा बजट!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Mon, 02 Feb 2026 01:49 AM IST
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अगर आप वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण को सुनकर बजट को नहीं समझ पाए हैं तो कोई बात नहीं हम आपको केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की कविता के माध्यम से बजट को समझाते हैं दरअसल केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले अपनी मजेदार कविताओं के माध्यम से अक्सर कठिन विषयों को समझाते आए हैं इस बार भी उन्होंने इसी अंदाज में बजट को समझाया है
केंद्रीय बजट पर अपनी अनोखी शैली के लिए मशहूर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इस बार भी कविता के माध्यम से बजट को आम जनता के सामने बेहद सरल और रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत किया। उनकी कविता न सिर्फ मनोरंजक थी, बल्कि बजट के जटिल आर्थिक प्रावधानों को भी आसान भाषा में समझाने का सशक्त माध्यम बनी। अठावले ने अपनी कविता में कहा कि यह बजट गरीब, किसान, मजदूर, महिला, युवा और मध्यम वर्ग सबको साथ लेकर चलने वाला है। उन्होंने तुकबंदी के जरिए बताया कि सरकार का लक्ष्य महंगाई को काबू में रखना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है। कविता में उन्होंने किसानों के लिए बढ़े हुए कृषि बजट, सिंचाई योजनाओं और फसल बीमा का जिक्र किया, जिससे ग्रामीण भारत को मजबूती मिलेगी। युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप और रोजगार योजनाओं को उन्होंने “हुनर से होगा विकास”
जैसी पंक्तियों में पिरोया। महिलाओं के लिए बजट में रखी गई योजनाओं को उन्होंने आत्मनिर्भरता और सम्मान से जोड़ते हुए बताया कि इससे नारी शक्ति को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। स्वास्थ्य और शिक्षा पर बढ़े खर्च को उन्होंने आम आदमी के जीवन से जोड़ते हुए कहा कि अब इलाज और पढ़ाई दोनों ज्यादा सुलभ होंगे। अठावले की कविता में इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, रेलवे और डिजिटल इंडिया जैसे विषय भी आए, जिन्हें उन्होंने देश की तरक्की की रीढ़ बताया। खास बात यह रही कि उन्होंने भारी-भरकम आर्थिक शब्दों की जगह रोज़मर्रा की भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे आम जनता भी बजट की मंशा आसानी से समझ सके। उनकी कविता का सार यही था कि यह बजट विकास और विश्वास का बजट है, जिसमें समाज के हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ है। संसद में उनकी प्रस्तुति ने माहौल को हल्का भी किया और गंभीर विषय को सहज बना दिया। कुल मिलाकर, अठावले की यह काव्यात्मक व्याख्या साबित करती है कि अगर बात दिल से और सरल भाषा में कही जाए, तो बजट जैसे जटिल विषय भी आम आदमी तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
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