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West Bengal SIR: Mamata to protest against SIR, big preparations to surround Election Commission!
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West Bengal SIR: SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगी ममता,चुनाव आयोग को घेरने की बड़ी तैयारी!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Fri, 06 Mar 2026 07:15 AM IST
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। All India Trinamool Congress (टीएमसी) की प्रमुख और West Bengal की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए विपक्षी मतदाताओं को सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर टीएमसी ने Election Commission of India के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने की रणनीति बनाई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य के कई इलाकों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं और उनसे नागरिकता से जुड़े दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिससे आम मतदाताओं में भ्रम और चिंता का माहौल बन गया है।
ममता बनर्जी का कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है और यदि किसी भी तरीके से वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाते हैं तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है और इससे खास समुदायों तथा गरीब तबकों के मतदाताओं को नुकसान हो सकता है। इसी वजह से टीएमसी ने राज्य भर में विरोध प्रदर्शन और रैलियां आयोजित करने का फैसला किया है। पार्टी के नेताओं के अनुसार, हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर चुनाव आयोग के फैसले का विरोध करेंगे और इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया जाएगा। दूसरी ओर Bharatiya Janata Party (भाजपा) ने टीएमसी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि SIR एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाना है ताकि फर्जी या दोहरे नाम हटाए जा सकें। भाजपा का दावा है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उस पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के बराबर है। इस बीच राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति को और अधिक गरमा सकता है।
टीएमसी इसे जनता के अधिकारों का मुद्दा बनाकर बड़े स्तर पर आंदोलन करना चाहती है, जबकि भाजपा इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रही है। कुल मिलाकर SIR को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप लेता जा रहा है और आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर और भी तीखी बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।
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