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West Bengal: चुनाव से पहले हिंसा भड़काने का आरोप, अभिषेक बनर्जी सीआईडी कार्यालय में होंगे पेश
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 16 Jun 2026 03:15 PM IST
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सार
टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। अब चुनाव पूर्व हिंसा भड़काने के आरोप में मंगलवार को अभिषेक बनर्जी को सीआईडी के सामने पेश होना है। इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में वे जांच एजेंसियों के सामने पेश हो चुके हैं।
टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी मंगलवार को दक्षिण कोलकाता के भवानी भवन में पश्चिम बंगाल पुलिस के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) के हेडक्वार्टर में पेश होंगे। यह मामला राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकाने और हिंसा भड़काने के आरोपों से जुड़ा है। पिछले महीने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बिधाननगर शहर पुलिस के अंतर्गत बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के अधिकारी पहले इस मामले की जांच कर रहे थे, लेकिन 11 जून को जांच सीआईडी को सौंप दी गई।
पहले भी अलग-अलग मामलों में जांच एजेंसियों के सामने पेश हुए अभिषेक बनर्जी
सीआईडी के अधिकारियों ने 12 जून को इस मामले में पूछताछ के लिए उन्हें नोटिस दिया और मंगलवार दोपहर तक मुख्यालय में उपस्थित रहने को कहा। पिछले दो दिनों में यानी 14-15 जून को अभिषेक को दो अन्य मामलों में कथित संलिप्तता के संबंध में दो जांच एजेंसियों द्वारा लंबी पूछताछ का सामना करना पड़ा है। रविवार को हस्ताक्षर बेमेल मामले में सीआईडी के अधिकारियों ने उनसे लगभग साढ़े आठ घंटे तक लंबी पूछताछ की।
हस्ताक्षर जालसाजी के मामले में फंसे अभिषेक
यह मामला तृणमूल कांग्रेस के विधायकों द्वारा राज्य विधानसभा में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित करने वाले प्रस्ताव पर किए गए हस्ताक्षरों में जालसाजी के आरोपों से जुड़ा है। प्रस्तुत दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण ही सीआईडी ने जांच शुरू की। फिर, 15 जून को उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों द्वारा कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में स्थित सॉल्ट लेक कार्यालय में स्कूल की नौकरी के बदले करोड़ों रुपए के नकद मामले के संबंध में 11 घंटे से अधिक समय तक लंबी पूछताछ का सामना करना पड़ा।
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अभिषेक बनर्जी ने दावा किया है कि इस तरह की लगातार और लंबी पूछताछ भारतीय जनता पार्टी की 'प्रतिशोध' की राजनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद राज्य में विपक्ष-विहीन राजनीतिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने खिलाफ शुरू की गई सभी जांचों में सहयोग करेंगे, लेकिन किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।
पहले भी अलग-अलग मामलों में जांच एजेंसियों के सामने पेश हुए अभिषेक बनर्जी
सीआईडी के अधिकारियों ने 12 जून को इस मामले में पूछताछ के लिए उन्हें नोटिस दिया और मंगलवार दोपहर तक मुख्यालय में उपस्थित रहने को कहा। पिछले दो दिनों में यानी 14-15 जून को अभिषेक को दो अन्य मामलों में कथित संलिप्तता के संबंध में दो जांच एजेंसियों द्वारा लंबी पूछताछ का सामना करना पड़ा है। रविवार को हस्ताक्षर बेमेल मामले में सीआईडी के अधिकारियों ने उनसे लगभग साढ़े आठ घंटे तक लंबी पूछताछ की।
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हस्ताक्षर जालसाजी के मामले में फंसे अभिषेक
यह मामला तृणमूल कांग्रेस के विधायकों द्वारा राज्य विधानसभा में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित करने वाले प्रस्ताव पर किए गए हस्ताक्षरों में जालसाजी के आरोपों से जुड़ा है। प्रस्तुत दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण ही सीआईडी ने जांच शुरू की। फिर, 15 जून को उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों द्वारा कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में स्थित सॉल्ट लेक कार्यालय में स्कूल की नौकरी के बदले करोड़ों रुपए के नकद मामले के संबंध में 11 घंटे से अधिक समय तक लंबी पूछताछ का सामना करना पड़ा।
अभिषेक बनर्जी ने दावा किया है कि इस तरह की लगातार और लंबी पूछताछ भारतीय जनता पार्टी की 'प्रतिशोध' की राजनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद राज्य में विपक्ष-विहीन राजनीतिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने खिलाफ शुरू की गई सभी जांचों में सहयोग करेंगे, लेकिन किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।