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Exclusive: जिस दल में जा रहे TMC के बागी, उसके पदाधिकारियों को मीडिया से पता चली विलय की बात, कौन-क्या बोला?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Tue, 16 Jun 2026 03:53 PM IST
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सार

टीएमसी के बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय की खबर जितनी चौंकाने वाली है, उससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि एनसीपीआई के कई पुराने नेताओं और पदाधिकारियों को भी इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए मिली। अमर उजाला ने पार्टी के पांच नेताओं से बात की, जिनमें 2023 विधानसभा चुनाव लड़ चुके उम्मीदवार, संस्थापक सदस्य और त्रिपुरा इकाई के पदाधिकारी शामिल हैं। आइए विस्तार से जानते हैं। 

TMC Rebels' Proposed Merger Leaves Even Host Party NCPI Leaders in the Dark; Here's What They Said
टीएमसी सांसदों के विलय पर क्या बोले एनसीपीआई के सदस्य? - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

त्रिपुरा की एक गुमनाम पार्टी में अचानक 20 लोकसभा सांसद शामिल हो जाते हैं। ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष को इसकी जानकारी देते हैं। इसके बाद शुरू होती है इस पार्टी को जानने की कोशिश। हर कोई इस पार्टी के इतिहास, वर्तमान, नेताओं और चुनावी प्रदर्शन के बारे में जानना चाहता है। 



जिस पार्टी में टीएमसी से बागी सांसद जा रहे हैं, उस पार्टी के नेताओं का क्या कहना है? इन नेताओं को इस विलय का पता कब चला? इन्होंने विलय की प्रक्रिया में क्या भूमिका निभाई? इन्ही सवालों के जवाब जानने के लिए हमने भी इस पार्टी के एक दो नहीं बल्कि पांच नेताओं से बात की। इस दौरान सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि जिस NCPI में सांसदों के शामिल होने की बात कही जा रही है, उसके कई संस्थापक नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए मिली। इन नेताओं ने अमर उजाला से बातचीत में क्या कहा? और इस पार्टी का इतिहास क्या है? आइये जानते हैं... 

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ये एनसीपीआई क्या है? 

एनसीपीआई त्रिपुरा का एक पंजीकृत गैर-मान्याप्राप्त दल है। इस पार्टी का गठन 2022 में हुआ था। शिवली कुंडू इसकी संस्थापक अध्यक्ष हैं। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। दोनों ही उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। एनसीपीआई का चुनाव चिन्ह पेन की नीब और सात किरणें हैं। 

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उनाकोटी जिले की कैलाशहर सीट से चुवाव लड़े जहांगीर अली को 285 वोट मिले थे। यहां टीएमसी उम्मीदवार को एनसीपीआई के उम्मीदवार को से ज्यादा (692) वोट मिले थे। वहीं, धलाई जिले की चावमानु सीट से चुनाव लड़े बरजेदा त्रिपुरा को 536 वोट से संतोष करना पड़ा था। बरजेदा से जब अमर उजाला ने टीएमसी के बागी विधायकों के विलय के संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें भी मीडिया के जरिए इस विलय के बारे में पता चला। बरजेदा खुद को पार्टी के संस्थापक सदस्यों में बताते हैं। 

2023 में चुनाव लड़े चेहरों ने इस विलय पर क्या कहा?

1. त्रिपुरा चुनाव 536 वोट पाने वाले उम्मीदवार ने कहा- मुझे तो मीडिया से पता चला 
अमर उजाला ने पार्टी का इतिहास और चुनावी प्रदर्शन देखने के बाद सबसे पहले पार्टी से चुनाव लड़े दोनों उम्मीदवारों से ही बात की।

  • हमने सबसे पहले 2023 त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में NCPI के उम्मीदवार रहे बरजेदा त्रिपुरा से बात की। बरजेदा ने कहा कि टीएमसी सांसदों के विलय की खबर उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स से रविवार को ही मिली। 
  • बरजेदा त्रिपुरा ने बताया कि वह 2012 तक कांग्रेस में थे। इसके बाद कई छोटे राजनीतिक दलों से जुड़े और 2023 में NCPI के टिकट पर चुनाव लड़ा। 
  • बरजेदा ने दावा किया पार्टी की अध्यक्ष के तौर पर शिवली कुंडू का नाम जरूर है लेकिन सबकुछ शांतनु डे देखते हैं। शांतनु पार्टी के संस्थापक सदस्य और राष्ट्रीय संगठन महासचिव हैं। सांसदों के विलय के बारे हमें ज्यादा जानकारी वही दे सकते हैं। 

2. पहले उम्मीदवार ने जिसके पास ज्यादा जानकारी की बात कही उसने भी वही जवाब दिया

  • बरजेदा से बातचीत के बाद हमने शांतनु डे से बात की, जिन्हें बरजेदा ने एनसीपीआई का संस्थापक सदस्य और राष्ट्रीय संगठन के महासचिव बताया था। 
  • शांतनु डे से भी जब विलय के बारे में पूछा गया तो वो कहते हैं कि विलय खबर उन्हें मीडिया से सुनने को मिली। उन्होंने कहा कि दल के पुराने सदस्यों से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया। उन्होंने जब दल के दूसरे सदस्यों से इस बारे में चर्चा की तो उन्हें भी खबरों के माध्यम से जानकारी मिली। 
  • टीएमसी के सासंदों के विलय को लेकर उन्होंने बताया कि केवल अध्यक्ष के बोलने से और मुख्य सचिव के बोलने भर से नहीं होगा। पूरे दल की अनुमति जरूरी होती है। दल के पुराने सदस्यों से कोई बात नहीं की गई है। 
  • उन्होंने दावा किया कि  उन्होंने ही 2022 में खड़ा किया, पार्टी के लोगो, फ्लैग से लेकर उद्देश्य भी उन्होंने ही निर्धारित किया। और 2023 में शिवली कुंडू को पार्टी का अध्यक्ष बनाकर पंजीकरण करवाया गया। 
  • शांतनु ने यह भी दावा किया कि पार्टी की अध्यक्ष शिवली कुंडू सिर्फ नाम की अध्यक्ष हैं, पार्टी का सारा काम उनके पति देखते हैं। 
  • शांतनु को इस बात का मलाल भी है कि उन्होंने 2023 के चुनाव में सक्रिया भूमिका निभाई और जंगलों में रहकर काम किया। इसके बावजूद इस विषय उनसे बात तक नहीं की गई।
  • हालांकि, बरजेदा की तरह शांतनु भी कहते हैं कि एनसीपीआई के नेता भाजपा को पसंद करते हैं, हम सनातनी है, अगर ऐसी स्थिति आती है तो हमलोग एनडीए का समर्थन करेंगे।

3. पार्टी के दूसरे उम्मीदवार ने कोई भी जानकारी देने से किया इनकार
2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में उनाकोटी जिले की कैलाशहर सीट से एसीपीआई के टिकट पर लड़े जहांगीर अली को 285 वोट मिले थे। जब हमने उनसे संपर्क किया तो उन्होंने इस विलय के बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। जहांगीर अली ने कहा कि विलय के बारे में ज्यादा जानकारी आपको त्रिपुरा एनसपीआई के सदस्य दिलबर हुसैन खान से मिलेगी। 

4.त्रिपुरा इकाई के सदस्य बोले- पार्टी अध्यक्ष कुंडू करेंगी प्रेस कॉन्फ्रेंस
जहांगीर अली के कहे अनुसार हमने आगे की जानकारी के लिए त्रिपुरा इकाई के सदस्य दिलबर हुसैन खान से बात की। 

  • दिलबर ने भी टीएमसी सांसदों के विलय के बार में कहा कि उन्हें भी रविवार को ही इसके बारे में पता लगा है। 
  • उन्होंने दावा किया कि पार्टी अध्यक्ष शिवली से उनकी बात हुई है। उन्होंने बताया कि पार्टी के सदस्य तरुण कुमार से भी उनकी बात हुई है। तरुण जी ने बताया कि सबकुछ ठीक है और पार्टी अध्यक्ष जल्द ही मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखेंगी। 
  • दिलबर हुसैन ने बताया कि वे पार्टी से 2023 से जुड़े हुए हैं। इसके पहले वे टीएमसी में थे और त्रिपुरा के यूथ प्रेसिडेंट थे। जब सुष्मिता देव टीएमसी से त्रिपुरा की इंचार्ज बनकर आईं, उसके बाद वो एनसीपीआई से जुड़ गए। यूथ टीएमसी के कुछ लोग टीएमसी से बाहर चले गए और एनसीपीआई की नींव रखी। 


5.पार्टी अध्यक्ष बोलीं- मैं 20 दिन पहले ही पद छोड़ चुकी, वर्तमान अध्यक्ष के बारे में जानकारी दी तो मुश्लि में आ जाऊंगी

  • अब तक की बातचीत में सभी ने शिवली कुंडू को पार्टी का अध्यक्ष बताया था। इसके बाद हमने पार्टी अध्यक्ष शिवली कुंडू से बात की। 
  • शिवली ने कहा कि लगभग 20 दिन पहले उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। 
  • जब हमने उनसे मौजूदा पार्टी अध्यक्ष के बारे में पूछा तो उन्होंने जानकारी देने से इनकार कर दिया। 
  • शिवली ने कहा कि इसकी जानकारी देना उनके लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। 
  • क्या उन्हें पहले से सांसदों के विलय के बारे में जानकारी थी? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सांसदों के विलय से पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। न ही कभी किसी टीएमसी या भाजपा नेता ने इस बारे में उनसे संपर्क किया था। 
  • हालांकि, जिस दिन सांसदों का विलय पार्टी से होने जा रहा था उस दिन मीडिया में जानकारी आने से पहले उन्हें  इसकी जानकारी मिल गई थी।  
  • शांतनु डे के बारे में पूछने में उन्होंने दावा किया शांतनु केवल त्रिपुरा विधानसभा चुनाव तक पार्टी के साथ थे। उसके बाद शांतनु ने पार्टी के साथ कोई संपर्क नहीं रखा, 2023 के बाद पार्टी की सदस्यता भी उनके पास नहीं है। जबकि दूसरी तरफ शांतनु मीडिया में पार्टी का संगठन महासचिव होने का दावा कर रहे हैं।
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