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Supreme Court Updates: लैंगिक संवेदीकरण समिति का हुआ पुनर्गठन, जस्टिस बीवी नागरत्ना बनीं अध्यक्ष

पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 16 Jun 2026 05:03 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 'लैंगिक संवेदीकरण और आंतरिक शिकायत समिति' का पुनर्गठन किया है। 12 सदस्यों वाली इस नई समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना करेंगी। इस पैनल में जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी सहित कई प्रमुख कानूनविदों को शामिल किया गया है।
 

supreme court updates reconstitutes gender sensitisation committee Justice BV Nagarathna
सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

देश की सर्वोच्च अदालत से एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 'लैंगिक संवेदीकरण और आंतरिक शिकायत समिति' (जीएसआईसीसी) का पुनर्गठन कर दिया है। महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिहाज से इस समिति को बेहद अहम माना जाता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के निर्देश पर इस उच्च स्तरीय समिति को नया स्वरूप दिया गया है।


जस्टिस बीवी नागरत्ना को कमान
इस नवगठित 12 सदस्यीय समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरत्ना को सौंपी गई है। उन्हें इस बेहद महत्वपूर्ण पैनल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। कार्यालय आदेश के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के लैंगिक संवेदीकरण और यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) विनियम, 2013 के तहत मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस समिति का पुनर्गठन किया है।
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कई दिग्गजों के नाम शामिल
इस नई समिति में न्यायपालिका और कानून के क्षेत्र से जुड़े कई बड़े नामों को शामिल किया गया है। समिति के अन्य सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह और रजिस्ट्रार कावेरी शामिल हैं। इनके अलावा देश की जानी-मानी वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और वरिष्ठ अधिवक्ता लिज मैथ्यू को भी इस पैनल का हिस्सा बनाया गया है। यह विविधता समिति को और अधिक प्रभावी बनाएगी।
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वकीलों और सलाहकारों को जगह
पैनल में वकालत और कानूनी पेशा जगत के अन्य प्रतिनिधियों को भी पर्याप्त स्थान दिया गया है। समिति के अन्य सम्मानित सदस्यों में अधिवक्ता नीना गुप्ता, सौम्यजीत पाणि, साक्षी बंगा, प्रभा स्वामी और माहेरविश रीन शामिल हैं। इनके अलावा, सुप्रीम कोर्ट बार क्लर्क्स एसोसिएशन की प्रतिनिधि सुषमा रावत और 'विविधता कंसल्टिंग' की संस्थापक स्नेह शर्मा को भी इस 12 सदस्यीय विशेष पैनल में जगह दी गई है।

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सुप्रीम कोर्ट का एयरपोर्ट्स के पास शहरी निर्माण पर नियम बनाने से इनकार, अहमदाबाद विमान हादसे का दिया गया था हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने देश के हवाई अड्डों के आसपास बेकाबू होते निर्माण कार्यों पर लगाम लगाने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया है। इस जनहित याचिका में पिछले साल अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे का विशेष रूप से हवाला दिया गया था, जिसमें विमान में सवार यात्रियों और जमीन पर मौजूद लोगों समेत कुल 260 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मातादीन शुक्ला के माध्यम से शकील शेख की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से नीतिगत मामला है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नियमों का निर्धारण करना सरकार का काम है, इसलिए न्यायपालिका इस विषय में सीधे दखल नहीं दे सकती।

बेकाबू निर्माण से हवाई पट्टियों पर बढ़ा जोखिम
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील शुक्ला ने कोर्ट में दलील दी कि आज पूरे देश के हवाई अड्डों के भीतर और आसपास बुनियादी ढांचे से जुड़े गंभीर खतरे पैदा हो गए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि हवाई अड्डों के आसपास तेजी से बढ़ रहे शहरी ढांचे को नियंत्रित करने के लिए हमारे पास कोई सख्त नियमावली या पुख्ता नियम मौजूद नहीं हैं।

वकील ने पिछले साल 12 जून को हुए एयर इंडिया की उड़ान AI171 के क्रैश होने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने अदालत को बताया कि उस भयावह हादसे में कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। विमान जिस जगह क्रैश होकर गिरा, वह बीजे मेडिकल कॉलेज का परिसर था, जहां मौजूद 19 डॉक्टरों और छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। याचिका में केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को हवाई अड्डों के आसपास निर्माण नियंत्रित करने के लिए नियम बनाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

नीतिगत मामला बताकर सुप्रीम कोर्ट ने झाड़ा पल्ला
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील से सीधे कहा कि चूंकि यह मामला पूरी तरह से नीति निर्माण से जुड़ा है, इसलिए कोर्ट इस याचिका पर आगे सुनवाई करने का इच्छुक नहीं है। उन्होंने वकील से पूछा कि क्या वे इस याचिका को वापस लेना चाहेंगे? अदालत के कड़े रुख और रुख की गंभीरता को भांपते हुए अधिवक्ता शुक्ला याचिका वापस लेने पर सहमत हो गए। इसके तुरंत बाद, देश की शीर्ष अदालत ने याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज करते हुए मामले को बंद कर दिया।

क्या था पिछले साल का वो दर्दनाक हादसा?
उल्लेखनीय है कि 12 जून 2025 को एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान (पंजीकरण VT-ANB) अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन के लिए उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई थी। उड़ान भरने के शुरुआती चरण में हुए इस हादसे में चालक दल के सभी 12 सदस्यों की जान चली गई थी, जबकि सिर्फ एक यात्री चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बचा था।

विमान टेकऑफ के कुछ ही पलों बाद मेघानीनगर स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर पर जा गिरा था। मरने वाले यात्रियों में भारत, ब्रिटेन, पुर्तगाल और कनाडा के नागरिक शामिल थे। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान भरने के तुरंत बाद महज एक सेकंड के भीतर विमान के दोनों इंजनों में ईंधन की आपूर्ति रुक गई थी। ब्यूरो इस मामले की विस्तृत अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है।
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