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West Bengal UCC Bill: UCC Bill to be tabled in the Bengal Assembly on Monday; Congress and TMC oppose it!
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West Bengal UCC Bill: सोमवार को बंगाल विधानसभा में आएगा यूसीसी बिल, विरोध में उतरी कांग्रेस-TMC !
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sat, 27 Jun 2026 02:45 AM IST
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पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। खबरों के अनुसार, राज्य सरकार सोमवार को विधानसभा में UCC से संबंधित एक विधेयक पेश कर सकती है। विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस की अध्यक्षता में हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया कि विधेयक का मसौदा सभी विधायकों को ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके बाद सोमवार को सदन में इस पर चर्चा होगी। यदि यह विधेयक विधानसभा से पारित हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो सकता है जहां सभी समुदायों के लिए समान व्यक्तिगत कानून लागू करने की व्यवस्था की जाएगी। वर्तमान में उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है, जबकि गुजरात और असम में भी इस दिशा में पहल की जा चुकी है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में वादा किया था कि यदि वह पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है तो छह महीने के भीतर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेगी। इसी बीच कांग्रेस ने प्रस्तावित UCC का विरोध करने का ऐलान किया है।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि उनकी पार्टी के विधानसभा में दो विधायक हैं और दोनों इस विधेयक का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐसे कानून को लागू करने से पहले समाज के सभी वर्गों और समुदायों से व्यापक चर्चा और संवाद होना चाहिए। शुभंकर सरकार ने यह भी कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है, जहां अनेक धर्म, भाषाएं, संस्कृतियां और विचारधाराएं साथ-साथ रहती हैं। उनके अनुसार, देश किसी एक विचारधारा, विशेष रूप से 'मनुवादी' सोच के आधार पर नहीं चल सकता। उन्होंने कहा कि "एक राष्ट्र, एक निशान" जैसी अवधारणा अपनी जगह हो सकती है, लेकिन भारत की बहुलतावादी पहचान, लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। कांग्रेस का मानना है कि UCC जैसे संवेदनशील विषय पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय सभी हितधारकों की राय लेना जरूरी है ताकि किसी भी समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। वहीं भाजपा का तर्क है कि समान नागरिक संहिता संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों के अनुरूप है और इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार तथा समान कानूनी व्यवस्था मिलेगी। इस मुद्दे पर राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में और अधिक बहस तथा टकराव देखने को मिल सकता है, क्योंकि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष को मजबूती से जनता के सामने रखने की तैयारी में हैं।
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