सिरोही जिले के पिंडवाड़ा उपखंड क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर आसपास के क्षेत्रों द्वारा शुरू किया गया विरोध तीन महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी लगातार जारी है। ये लोग इस परियोजना को निरस्त करवाने की मांग पर अड़े हुए है। खनन संघर्ष के बैनर तले 1 दर्जन गांवों के लोग अब 28 जनवरी 2026 से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दे रहे है। ऐसे में पंचायतीराज मंत्री ओटाराम देवासी के सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिए गए बयान से एक बार फिर माहौल गर्मा गया है। लोग देवासी के इस बयान पर कड़ा आक्रोश जता रहे है।
गौरतलब है कि इस वीडियो में मंत्री देवासी के साथ जालौर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी एवं क्षेत्रीय विधायक समाराम गरासिया भी साथ में नजर आ रहे है। वीडियो में मंत्री देवासी कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर यह कहते दिख रहे हैं कि लोगों को भ्रमित किया जा रहा है, किसी की जमीन नहीं जा रही है। इस बयान के सामने आते ही पिंडवाड़ा क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों और 12 गांवों के लोगों में सोशल मीडिया और प्रत्यक्ष रूप से आक्रोश फैल गया। खनन संघर्ष समिति ने मंत्री के बयान को आधी सच्चाई बताते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही स्थानीय लोगों का कहना है क्षेत्र कि पीड़ित जनता पिछले तीन महीने से जल, जमीन और जंगल के लिए कि सड़क पर संघर्ष कर रहीं है। राज्य मंत्री कितनी बार सीधे जनता के बीच आए।
जमीन नहीं जा रही, तो पूरी प्रक्रिया क्यों?
संघर्ष समिति का कहना है कि यदि वास्तव में किसी की जमीन नहीं जा रही है, तो फिर खनन परियोजना से जुड़ी पूरी प्रक्रिया क्यों और कैसे शुरू की गई। समिति ने सवाल उठाए कि जब जमीन अधिग्रहण का मुद्दा नहीं था, तो पर्यावरणीय जनसुनवाई क्यों करवाई गई।।जनसुनवाई के दौरान स्थानीय लोगों की आपत्तियों को क्यों नजर अंदाज किया जा रहा है। क्यों उस पर सरकार एक्शन नही लें रहीं और जनसुवाई कों अभी तक निरस्त नही किया गया है। आखिर किस दबाव में इस खनन परियोजना को आगे बढ़ाया गया है।
सीएम से मुलाकात, वार्ता विफल और “चुप रहने” की हिदायत
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात को लेकर भी सवाल उठाए हैं। समिति सदस्यों का कहना है कि यदि मामला इतना सरल था, तो मुख्यमंत्री से मुलाकात की जरूरत क्यों पड़ी। जब वार्ता के बाद भी समाधान नहीं निकला, तो यह क्यों कहा गया कि “वार्ता विफल होने की बात बाहर मीडिया में न बताएं”। समिति सदस्यों का आरोप है कि जनता को भ्रमित करने के लिए आधी-अधूरी जानकारी फैलाई जा रही है।
TOR, SDM का पत्र और कागजी हेरफेर के आरोप
संघर्ष समिति सदस्यों ने प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कमलेश मेटाकास्ट का टीओआर किस आधार पर तैयार किया गया है। पिंडवाड़ा एस डीएम के उस पत्र का आधार क्या था, जिसमें प्रस्तावित क्षेत्र में “एक भी कीमती पेड़ नहीं, केवल कांटेदार झाड़ियां” होने की बात कही गई है। सिंचित भूमि को असिंचित कैसे दर्शाया गया है। कथित गलत तथ्यों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई है।
598 घर विस्थापन और फर्जी सहमति पत्रों का मुद्दा
संघर्ष समिति सदस्यों का दावा है कि कागजों में 598 घरों के विस्थापन का उल्लेख है जो सीधे तौर पर मंत्री के जमीन नहीं जा रही वाले बयान पर सवाल खड़ा करता है।
इसके साथ ही ग्रामीणों से फर्जी सहमति पत्र लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। समिति का कहना है कि इस मामले में रोहिड़ा व स्वरूपगंज थाने में रिपोर्ट दी गई, लेकिन अब तक कार्रवाई का कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला न मामला दर्ज हुआ ऐसा क्यों है।
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मंत्रीजी आए देंगे तथ्यों के साथ जवाब
संघर्ष समिति सदस्यों का कहना है कि मंत्री चार ग्राम पंचायतों और 12 गांवों की जनता के सामने आएं, हम हर सवाल का जवाब हर दस्तावेज के साथ देंगे। इन्होंने 1700 करोड़ के एमओयू और सीमेंट प्लांट की जमीन पर भी सवाल उठाए है। संघर्ष समिति सदस्यों ने यह भी पूछा है कि खनन प्रस्ताव के पीछे किसका दबाव था। सिरोही एडीएम को कंपनी के लिए सीमेंट प्लांट की जमीन उपलब्ध कराने का पत्र क्यों लिखना पड़ा है। राज्य सरकार ने 1700 करोड़ रुपये का एमओयू किन शर्तों पर किया है।