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US Fed Rate Cut: America reduced interest rates, what will be its impact on India?
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US Fed Rate Cut : अमेरिका ने घटाई ब्याज दरें, आखिर भारत पर क्या होगा इसका असर?
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Fri, 19 Sep 2025 01:25 AM IST
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पहली बार US फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर में कटौती की है ऐसे में इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा चलिए बताते है। तो 25 बेसिस प्वाइंट की दर कटौती कर ब्याज दरें 4 फीसदी से 4.25 फीसदी कर दी गई हैं. महंगाई और मंदी की आशंकाओं के बीच लिया गया यह फैसला निवेशकों और वैश्विक बाजारों के लिए अहम माना जा रहा है.इस फैसले के बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत ब्याज दरें अब 4 फीसदी से 4.25 फीसदी के दायरे में आ गई हैं। खबरो की मानें तो इसका असर अमेरिका ही नहीं, बल्कि भारत पर भी दिखाई देगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेड रेट कट से भारतीय रुपया, शेयर बाजार, पेट्रोल-डीजल की कीमतें और यहां तक कि विदेशी निवेश FII पर भी सीधा असर पड़ेगा। खैर इसके साथ ही फेड ने संकेत दिया है कि वह इस साल दो और बार कटौती कर सकता है।
ऐसे में एक सवाल ये भी की आखिर ये फैसला इतना जरूरी क्यों तो बता दे की 2024 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने तीन बार दरें घटाईं थीं, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ (Import Tariffs) नीति के प्रभाव को देखते हुए 2025 की शुरुआत में दरें स्थिर रखी गई थीं. अब अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेतों और रोजगार में गिरावट को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.
फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने ब्याज दरों की घोषणा करते हुए कहा कि देश में रोजगार का हाल चिंताजनक है। हाल के महीनों में नई भर्तियां लगभग थम गई हैं और बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। ऐसे में ब्याज दर घटने से होम लोन, कार लोन और बिज़नेस लोन सस्ते हो जाएंगे। उम्मीद है कि इससे खर्च और निवेश बढ़ेगा तथा रोजगार में सुधार होगा।
Inflation में वृद्धि के बावजूद, हालिया सरकारी रिपोर्टों से यह भी पता चला है कि हाल के महीनों में नियुक्तियों में तेजी से कमी आई है और यह पिछले साल के अनुमान से भी कम रही है। अगस्त में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अभी भी न्यूनतम स्तर पर है। और पिछले हफ्ते साप्ताहिक बेरोजगारी दावों में तेजी से वृद्धि हुई। यह इस बात का संकेत है कि छंटनी बढ़ सकती है।
आमतौर पर, जब बेरोजगारी बढ़ती है, तो फेड अपनी मुख्य ब्याज दरों में कटौती करता है ताकि ज्यादा खर्च और विकास को बढ़ावा मिले। लेकिन बढ़ती मुद्रास्फीति के बीच, फेड इसके उलट ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है या कम से कम उन्हें अपरिवर्तित रखता है। पिछले महीने, अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने संकेत दिया था कि फेड के अधिकारी रोजगार को लेकर ज्यादा चिंतित हैं, और अगले हफ्ते होने वाली अपनी बैठक में वे ब्याज दरों में कटौती कर सकते हैं। फिर भी, लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति फेड को बहुत जल्दी ब्याज दरों में कटौती करने से रोक सकती है।
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