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यरूशलम में अल-अक्सा मस्जिद पर तनाव बढ़ा: जॉर्डन ने इस्लामिक देशों की आपात बैठक बुलाई; इस्राइल पर क्या आरोप?

Wed, 05 Aug 2026 04:26 AM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी, अम्मान।
एजेंसी, अम्मान। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 05 Aug 2026 04:26 AM IST
सार

पश्चिम एशिया में ईरान-इस्राइल जंग के बीच यरूशलम में अल-अक्सा मस्जिद पर तनाव बढ़ गया है। जॉर्डन ने इस्लामिक देशों की आपात बैठक बुलाई है।
  • जॉर्डन का आरोप- मस्जिद परिसर पर कब्जा करना चाहता है इस्राइल।
  • यथास्थिति से छेड़छाड़ पर क्षेत्र में धार्मिक युद्ध भड़कने की दी चेतावनी।
  • अल-अक्सा मस्जिद परिसर को अपना पवित्र स्थल मानते हैं यहूदी।

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Al-Aqsa Mosque Jerusalem Tensions escalate Jordan calls Islamic nations emergency meet allegations On Israel
अल-अक्सा मस्जिद के आधार पर टकराव की आशंका - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

यरूशलम के सबसे पवित्र मुस्लिम धार्मिक स्थल अल-अक्सा मस्जिद परिसर पर इस्राइल के कब्जे के बढ़ते खतरे को लेकर पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव गहरा गया है। जॉर्डन ने इस स्थिति को अत्यंत गंभीर बताते हुए आगाह किया है कि अगर ऐतिहासिक धार्मिक व्यवस्था से खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो यह मामला पूरे क्षेत्र में एक भयानक धार्मिक युद्ध का रूप ले सकता है। इस संकट पर चर्चा करने के लिए जॉर्डन ने अरब और इस्लामिक जगत के देशों के विदेश मंत्रियों की बुधवार को आपातकालीन बैठक बुलाई है।

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मंत्री की अगुवाई में 2,000 से अधिक इस्राइली नागरिक मस्जिद पहुंचे
अंतरराष्ट्रीय समझौतों और ऐतिहासिक परंपरा के तहत अल-अक्सा मस्जिद और डोम ऑफ द रॉक (कुब्बत अल-सखरा) परिसर की देखरेख जॉर्डन का राजपरिवार करता है। नियम के मुताबिक, इस परिसर में केवल मुसलमानों को ही नमाज अदा करने की इजाजत है, लेकिन यह यहूदियों के लिए भी पवित्र स्थल (टेंपल माउंट) माना जाता है। हाल के दिनों में इस्राइल के सरकार समर्थित कुछ गुटों की ओर से इस परिसर में घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं। 23 जुलाई को इस्राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्वीर की अगुआई में लगभग 2,000 से अधिक इस्राइली नागरिक परिसर में प्रवेश कर धार्मिक अनुष्ठान किए।
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जॉर्डन के आह्वान पर बैठक में कौन-कौन आएगा?

  • अरब लीग देशों के विदेश मंत्रियों के साथ तुर्किये, इंडोनेशिया, मलयेशिया और पाकिस्तान भी शामिल होंगे।

अम्मान और जॉर्डन के विदेश मंत्री ने और क्या कहा?

  • यरुशलम बारुद का ढेर है। हम कानूनी रूप से विरोध कर खतरे से आगाह करने की कोशिश कर रहे हैं।
  • फलस्तीनी लोगों को बड़े पैमाने पर वेस्ट बैंक से निर्वासित किए जाने की आशंका।
  • ऐसा होने पर फलस्तीनी शरणार्थी बड़ी संख्या में जॉर्डन जा सकते हैं, इससे देश में अस्थिरता का खतरा।

  • विदेश मंत्री के मुताबिक अल-अक्सा पर इस्राइल का कब्जा लक्ष्मण रेखा लांघने जैसा।
  • फलस्तीनी लोगों को इस्राइल जॉर्डन में विस्थापित करना चाहता है, हम ऐसा नहीं होने देंगे।
  • जॉर्डन के मुताबिक अल-अक्सा पर कब्जे की कोशिश अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन। इससे फलस्तीनी लोगों के अपनी भूमि पर रहने के अधिकार छिनेंगे, क्षेत्रीय तनाव बढ़ेगा।

अम्मान को क्या आशंका है?

  • अक्तूबर में होने वाले चुनाव से पहले वेस्ट बैंक में अशांति फैलाने की ताक में है इस्राइल। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सत्ता से बेदखल होने की संभावना के बीच स्थायी बदलाव के प्रयास में हैं धुर दक्षिणपंथी राजनेता।

यहूदियों के प्रवेश पर जॉर्डन ने जताई चिंता
जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि अल-अक्सा की यथास्थिति से छेड़छाड़ करना एक चिंगारी की तरह है। यरूशलम बारूद का ढेर बन चुका है। अगर यह आग भड़की, तो इसका असर केवल फलस्तीन या जॉर्डन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे इस्लामिक जगत को अपनी चपेट में ले लेगा। सफादी की ओर से बुलाई गई आपात बैठक में अरब लीग के सदस्यों के अलावा तुर्की, इंडोनेशिया, मलेशिया और पाकिस्तान जैसे प्रमुख मुस्लिम देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं। जॉर्डन की कोशिश है कि कानूनी और राजनयिक रास्तों के जरिये इस्राइल पर वैश्विक दबाव बनाया जा सके।

जॉर्डन के सामने दोहरा संकट
जॉर्डन के लिए यह केवल धार्मिक आस्था का सवाल नहीं है, बल्कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व से भी जुड़ा मुद्दा है। उसे आशंका है कि इस्राइल में आगामी चुनावों को देखते हुए यहूदी सरकार वेस्ट बैंक से फलस्तीनियों को बड़े पैमाने पर बेदखल कर सकती है। यदि फलस्तीनी शरणार्थी जॉर्डन का रुख करते हैं, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था और आबादी के संतुलन पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। जॉर्डन ने साफ कर दिया है कि फलस्तीनियों को उनकी जमीन से हटाना एक रेड लाइन है, जिसे किसी भी कीमत पर पार नहीं होने दिया जाएगा।

वहीं, इस्राइल ने गाजा युद्ध को लेकर जॉर्डन की आलोचनाओं के जवाब में उसे दी जाने वाली पानी की आपूर्ति आधी कर दी है। जल संकट से जूझ रहे जॉर्डन के लिए यह बड़ा झटका है। इसके अलावा, अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और इस्राइल के साथ संबंधों को लेकर भी जॉर्डन की जनता में भारी गुस्सा देखा जा रहा है।

 

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