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Hindi News ›   World ›   SpaceX rocket crashes Moon Weighing 4.5 tonnes and traveling at 8,690 km/h has the threat to Earth increased

चांद से टकराया स्पेसएक्स रॉकेट: 4.5 टन वजनी, 8,690 किमी/घंटा रफ्तार से गिरा नीचे, क्या धरती के लिए बढ़ा खतरा?

Wed, 05 Aug 2026 05:18 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 05 Aug 2026 05:18 PM IST
सार

स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट का लगभग 4,500 किलोग्राम वजनी अपर स्टेज 19 महीने तक अंतरिक्ष में भटकने के बाद चंद्रमा के आइंस्टीन क्रेटर के पास टकराया। यह हिस्सा ब्लू घोस्ट-1 और हाकुटो-आर मिशन 2 को लॉन्च करने के बाद कक्षा में रह गया था। 

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SpaceX rocket crashes  Moon Weighing 4.5 tonnes and traveling at 8,690 km/h has the threat to Earth increased
चांद से टकराया  स्पेस एक्स रॉकेट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

स्पेस एक्स के फाल्कन-9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा भारतीय समयानुसार दोपहर लगभग 12:05 बजे चंद्रमा पर आइंस्टीन क्रेटर के पास टकराया है। हालांकि, इस टक्कर की पुष्टि होने में कुछ घंटे लग सकते हैं।
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किस मिशन के तहत किया गया था लॉन्च? 
लगभग 4,500 किलोग्राम वजन वाला यह ऊपरी हिस्सा, चंद्रमा के लिए ब्लू घोस्ट मिशन लॉन्च करने के बाद 19 महीनों से अंतरिक्ष में घूम रहा था, और इसके टकराने के रास्ते को कुछ सेकंड और कुछ सौ मीटर की सटीकता के साथ ट्रैक किया गया था।
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असल में चांद से क्या टकराया?
कई एजेंसियां इस घटनाक्रम पर नजर रख रही हैं। इस बात की काफी संभावना है कि आने वाले दिनों में चंद्रमा के ऊपर चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर नए क्रेटर का पता लगा लेंगे। बता दें कि यह पूरा रॉकेट नहीं था। यह फाल्कन 9 का ऊपरी हिस्सा था। यानी रॉकेट के दो हिस्सों में से दूसरा हिस्सा, जो दोबारा इस्तेमाल होने वाले पहले हिस्से (फर्स्ट स्टेज) के अलग होने के बाद चालू होता है।
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कब लॉन्च किया गया था यह मिशन? 
लगभग 12 मीटर लंबा और करीब 4,500 किलोग्राम वजन वाला यह हिस्सा 15 जनवरी, 2025 को लॉन्च किया गया था। यह फायरफ्लाई एयरोस्पेस के 'ब्लू घोस्ट-1' और आईस्पेस  के 'हाकुटो-आर मिशन 2' लैंडर्स को चांद की ओर ले जा रहा था।

इसे दुर्घटनाग्रस्त होने में इतने महीने क्यों लगे?
यह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच एक चौड़े, अस्थिर घेरे में चक्कर लगाता रह गया। कई महीनों तक, पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के हल्के खिंचाव और खुद सूरज की रोशनी के हल्के दबाव (जिसे सोलर रेडिएशन प्रेशर कहते हैं) ने हर बार इसके रास्ते को थोड़ा और बदल दिया।


आखिरकार, इन छोटे-छोटे बदलावों के कारण यह सीधे जाकर टकराया। स्पेस एक्स ने बताया कि स्टेज का ईंधन निकाल दिया गया था और उसे सुरक्षित बना दिया गया था, लेकिन इतनी ज्यादा ऊर्जा वाले रास्ते पर चल रहे स्टेज के लिए कंट्रोल के साथ उसे नष्ट करने वाला 'बर्न' करना मुमकिन नहीं है।  इसके साथ ही नासा ने कहा है कि इस से धरती को कोई खतरा नहीं है। 
 
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