Aldrich Ames: एल्ड्रिच एम्स का निधन, CIA की गोपनीय जानकारी सोवियत संघ को देने का लगा था आरोप
सीआईए के पूर्व अधिकारी और कुख्यात जासूस एल्ड्रिच एम्स की 84 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई। उन्होंने 31 वर्षों तक सीआईए में सेवा दी। उनपर अमेरिकी खुफिया जानकारी रूस को देने के आरोप थे।
विस्तार
सीआईए के गद्दार एल्ड्रिच एम्स का 84 वर्ष के आयु मैरीलैंड की एक जेल में मृत्यु हो गई है। जेल ब्यूरो के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि एम्स की मौत सोमवार को हुई। एल्ड्रिच एम्स पर आरोप था कि उन्होंने अमेरिकी की खुफिया जानकारी रूस को दे थी। एम्स ने सीआईए में 31 साल तक सेवा दी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें 1985 से लेकर 1994 में अमेरिकी खुफिया जानकारी के बदले मॉस्को से 25 लाख अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया गया था।
खुलासों में 10 रूसी अधिकारियों और एक पूर्वी यूरोपीय व्यक्ति की पहचान शामिल
उनके खुलासों में 10 रूसी अधिकारियों और एक पूर्वी यूरोपीय व्यक्ति की पहचान शामिल थी, जो संयुक्त राज्य अमेरिका या ग्रेट ब्रिटेन के लिए जासूसी कर रहे थे। इसके साथ ही जासूसी गिरोह चला रहे थे। इसमें गुप्त रूप से बातें सुनना और सामान्य जासूसी प्रक्रियाएं भी शामिल थीं। उनके विश्वासघात को लौह पर्दे के पीछे काम कर रहे पश्चिमी एजेंटों की फांसी का कारण माना जाता है। शीत युद्ध के दौरान यह सीआईए के लिए एक बड़ा झटका था।
यह भी पढ़ें- Iran: ईरान में निर्वासित युवराज पहलवी ने की जनता से कार्रवाई की अपील; विरोधी प्रदर्शनों में अब तक 36 मौतें
एम्स ने बिना मुकदमे के ही आरोप स्वीकार किया
उन्होंने बिना मुकदमे के जासूसी और कर चोरी के आरोप स्वीकार कर लिए और उन्हें बिना पैरोल के आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अभियोजकों ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक संयुक्त राज्य अमेरिका को बहुमूल्य खुफिया जानकारी से वंचित रखा। उन्होंने कर्ज चुकाने के लिए पैसे लेने के निराशाजनक इरादों से किए गए विश्वासघात के लिए गहराई से शर्म और अपराधबोध व्यक्त किया। लेकिन उन्होंने अपने द्वारा किए गए नुकसान को कम करके बताया और अदालत से कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका को स्पष्ट रूप से नुकसान पहुंचाया है या मॉस्को की स्पष्ट रूप से मदद की है।
वित्तीय परेशानियों के कारण जासूसी किया -एम्स
उन्होंने अदालत से कहा, "ये जासूसी युद्ध एक तमाशा हैं, जिनका वर्षों से हमारे महत्वपूर्ण सुरक्षा हितों पर कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ा है," उन्होंने दुनिया भर में फैले मानव जासूसों के विशाल नेटवर्क से किसी भी देश के नेताओं को मिलने वाले लाभ पर सवाल उठाया। सजा सुनाए जाने से एक दिन पहले द वाशिंगटन पोस्ट को दिए गए जेल के एक साक्षात्कार में एम्स ने कहा कि वह तत्काल और निरंतर वित्तीय परेशानियों के कारण जासूसी करने के लिए प्रेरित हुआ था।
यह भी पढ़ें- Sarabjit Kaur: तीर्थ पर गईं भारत की सरबजीत का PAK में निकाह, अब गिरफ्तारी के बाद लाहौर के शेल्टर होम में फंसीं
एफबीआई द्वारा जारी मामले के विवरण के अनुसार, एम्स वर्जीनिया के लैंगली स्थित सीआईए मुख्यालय में सोवियत/पूर्वी यूरोपीय विभाग में कार्यरत थे, जब उन्होंने पहली बार केजीबी से संपर्क किया। सीआईए के लिए रोम में तैनात रहने के दौरान और वाशिंगटन लौटने के बाद भी उन्होंने सोवियत संघ को गुप्त जानकारी देना जारी रखा। इसी बीच अमेरिकी खुफिया समूह यह पता लगाने की पुरजोर कोशिश कर रहा था कि इतने सारे एजेंट मॉस्को में क्यों पकड़े जा रहे थे। एम्स की जासूसी उसी समय हुई जब एफबीआई एजेंट रॉबर्ट हैंसन भी जासूसी कर रहे थे। हैंसन को 2001 में पकड़ा गया था और उन पर 14 लाख अमेरिकी डॉलर नकद और हीरे लेकर मॉस्को को गुप्त जानकारी बेचने का आरोप लगाया गया था। उनकी मृत्यु 2023 में जेल में हुई। एम्स की पत्नी, रोसारियो ने जासूसी में उसकी सहायता करने के कम गंभीर आरोपों को स्वीकार कर लिया और उसे 63 महीने जेल की सजा सुनाई गई।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.