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Pakistan: ऑपरेशन सिंदूर के बाद से खौफ में पाकिस्तान, US को पाले में लाने के लिए हर महीने लुटा रहा 50 हजार डॉलर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 08 Jan 2026 10:37 AM IST
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सार
अमेरिकी कानून के तहत, विदेशी सरकारों और संबंधित संस्थाओं को लॉबिंग और जनसंपर्क समझौतों का सार्वजनिक रूप से खुलासा करना अनिवार्य है। इन दस्तावेजों में उनके नाम पर किए गए अनुबंधों, गतिविधियों और भुगतानों का रिकॉर्ड होता है।
पाकिस्तान की ओर से अमेरिका को साधने की कोशिश जारी है।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कंगाल पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई की वजह से आवाम रोटी को तरस रही है। इसके बावजूद पाकिस्तान अपने एजेंडे को अमेरिका में आगे बढ़ाने के लिए लाखों डॉलर लुटा रहा है। विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (एफएआरए) के तहत दाखिल दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान खुद को अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही से बचाने की कोशिश में लगा हुआ है।
इन दस्तावेजों से साफ है कि बीते साल मई में भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर चलाए जाने के बाद से पाकिस्तान भारी दबाव में है। उसे भविष्य में भी इसी तरह की कार्रवाई की आशंका सता रही है। जिससे बचने के लिए वह अमेरिका को साधने की कोशिश में जुटा हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप से लेकर अमेरिकी मीडिया तक को पाकिस्तान के पाले में लाने की कोशिश
अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्लामाबाद ने अपने हवाई अड्डों और आतंकी शिविरों को बचाने के लिए वॉशिंगटन से मदद मांगी थी। एफएआरए दस्तावेजों से पता चलता है कि पाकिस्तान ने लाखों डॉलर के अनुबंध और भुगतान किए हैं। इसके जरिए अमेरिकी कांग्रेस, कार्यपालिका, विचारकों और मीडिया को अपने पाले में करने की कोशिश की जा रही है।
ये भी पढ़ें: US Strike Venezuela: अमेरिकी ऑपरेशन में मारे गए वेनेजुएला के सैनिकों को भावपूर्ण विदाई, सात दिन का शोक घोषित
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से खौफ में पाकिस्तान
दस्तावेजों के मुताबिक जेवलिन एडवाइजर्स एलएलसी को अप्रैल में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए पंजीकृत किया गया था। यह पहलगाम हमले के ठीक दो दिन बाद 24 अप्रैल, 2025 हुआ था। पाकिस्तान के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जेवलिन को हर महीने 50,000 डॉलर का मासिक शुल्क दिया जा रहा है।
जेवलिन के मुताबिक उसका काम अमेरिकी कार्यकारी शाखा, कांग्रेस और जनता को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर पाकिस्तान के रुख से अवगत कराना है। इनमें जम्मू और कश्मीर विवाद के साथ पाकिस्तान-भारत रिश्ते भी मुद्दों में शामिल हैं।
ये भी पढ़ें: Trump Tariff on Russian Oil: क्या 500% टैरिफ लगाएगा अमेरिका? ट्रंप के सहयोगी बोले- बिल को मंजूरी, सीनेट में...
अमेरिका को साधने में लाखों डॉलर उड़ा रहा पाकिस्तान
एक अलग दस्तावेज से पता चला है कि इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अमेरिका में पैरवी और सार्वजनिक नीति प्रचार पर 900,000 डॉलर खर्च किए। यह पाकिस्तान स्थित एक थिंक टैंक है जो राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक हाइपरफोकल कम्युनिकेशंस एलएलसी से अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को बेहतर बनाने के मकसद से अमेरिकी सरकार से संपर्क करने के लिए अनुबंध किया गया है।
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डोनाल्ड ट्रंप से लेकर अमेरिकी मीडिया तक को पाकिस्तान के पाले में लाने की कोशिश
अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्लामाबाद ने अपने हवाई अड्डों और आतंकी शिविरों को बचाने के लिए वॉशिंगटन से मदद मांगी थी। एफएआरए दस्तावेजों से पता चलता है कि पाकिस्तान ने लाखों डॉलर के अनुबंध और भुगतान किए हैं। इसके जरिए अमेरिकी कांग्रेस, कार्यपालिका, विचारकों और मीडिया को अपने पाले में करने की कोशिश की जा रही है।
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दस्तावेजों के मुताबिक जेवलिन एडवाइजर्स एलएलसी को अप्रैल में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए पंजीकृत किया गया था। यह पहलगाम हमले के ठीक दो दिन बाद 24 अप्रैल, 2025 हुआ था। पाकिस्तान के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जेवलिन को हर महीने 50,000 डॉलर का मासिक शुल्क दिया जा रहा है।
जेवलिन के मुताबिक उसका काम अमेरिकी कार्यकारी शाखा, कांग्रेस और जनता को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर पाकिस्तान के रुख से अवगत कराना है। इनमें जम्मू और कश्मीर विवाद के साथ पाकिस्तान-भारत रिश्ते भी मुद्दों में शामिल हैं।
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एक अलग दस्तावेज से पता चला है कि इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अमेरिका में पैरवी और सार्वजनिक नीति प्रचार पर 900,000 डॉलर खर्च किए। यह पाकिस्तान स्थित एक थिंक टैंक है जो राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक हाइपरफोकल कम्युनिकेशंस एलएलसी से अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को बेहतर बनाने के मकसद से अमेरिकी सरकार से संपर्क करने के लिए अनुबंध किया गया है।
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