US: पुतिन पर कड़े प्रतिबंध की तैयारी में ट्रंप, बेसेंट बोले- EU भी लगाए पाबंदी तो ढह जाएगी रूसी अर्थव्यवस्था
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर कुल 50% टैरिफ लगा दिया है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अगर अमेरिका और यूरोप ने और द्वतीय प्रतिबंध लगाए तो रूस की अर्थव्यवस्था ढह जाएगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत की तेल खरीद पर नाराजगी जताई थी। भारत ने इन टैरिफ को अनुचित बताते हुए साफ किया कि ऊर्जा खरीद उसकी राष्ट्रीय आवश्यकता और हित पर आधारित है।
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विस्तार
दरअसल, अमेरिका ने हाल ही में भारत से रूस से तेल खरीदने को लेकर बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। यह 25% रेसिप्रोकल टैरिफ के अलावा है जो पहले ही लागू था। इस तरह भारत पर कुल 50% ड्यूटी लागू हो गई है, जो 27 अगस्त से प्रभावी हुई। अमेरिका का दावा है कि भारत की यह खरीद रूस की युद्ध मशीन को वित्तीय मदद दे रही है।
यूरोपीय सहयोग की जरूरत
बेसेंट ने कहा कि अमेरिका दबाव बढ़ाने के लिए तैयार है, लेकिन इसमें यूरोपीय देशों का साथ मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब यह दौड़ है कि कितने दिन तक यूक्रेन की सेना टिक पाती है और कितने दिन तक रूसी अर्थव्यवस्था। अगर अमेरिका और यूरोप मिलकर और सेकेंडरी टैरिफ लगा दें, तो रूस की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी और पुतिन बातचीत की मेज पर आ जाएंगे।
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भारत पर ट्रंप की नाराजगी
राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को लेकर निराशा जताई थी। उन्होंने कहा था हमें बहुत बड़ा टैरिफ लगाना पड़ा है। पीएम मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं और मेरे साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन भारत द्वारा रूस से इतनी ज्यादा तेल खरीदना निराशाजनक है। आगे उन्होंने कहा था कि यह कदम अमेरिका-भारत संबंधों को प्रभावित कर रहा है, जो पिछले दो दशकों के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं।
भारत का जवाब
भारत ने अमेरिका के टैरिफ को अनुचित और अव्यावहारिक बताया था। भारतीय सरकार का कहना है कि ऊर्जा खरीदना देश की राष्ट्रीय जरूरत और बाज़ार की वास्तविकताओं पर आधारित है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा, चाहे दबाव कितना भी हो।
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अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा
अमेरिका और रूस के बीच तनाव पहले ही गहराया हुआ है, और भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ ने इसमें नया मोड़ जोड़ दिया है। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का मानना है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तो वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधों की साख कमजोर हो जाएगी। वहीं भारत लगातार यह दोहरा रहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से पीछे नहीं हटेगा।
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