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Singapore: भारतीय मूल की महिला समेत तीन एक्टिविस्ट दोषी, फिलिस्तीन का समर्थन करने पर लगा लाखों का जुर्माना

पीटीआई, सिंगापुर Published by: Riya Dubey Updated Thu, 30 Apr 2026 02:19 PM IST
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सार

सिंगापुर में फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन करने पर भारतीय मूल की एक महिला समेत तीन एक्टिविस्ट को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक पर 2,341 डॉलर का जुर्माना लगाया गया। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटते हुए कहा कि महिलाओं को यह समझ होना चाहिए था कि वे प्रतिबंधित क्षेत्र में जुलूस निकाल रही हैं।

Three activists, including an Indian-origin woman, convicted and fined lakhs for supporting Palestine
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार

सिंगापुर में फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन करने के मामले में भारतीय मूल की एक महिला समेत तीन महिला एक्टिविस्ट को दोषी ठहराया गया है। अदालत ने प्रत्येक पर 2,341 अमेरिकी डॉलर (करीब 2.2 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया है। यह फैसला उस समय आया जब हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई बरी करने की राहत को पलट दिया।

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क्या है मामला?

स्ट्रेट्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मलय मूल की मोस्सम्मद सोबिकुन नाहर (26), सिटी अमीरा मोहम्मद असरोरी (30) और भारतीय मूल की अन्नामलाई कोकिला पार्वती (37) पर 2 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति भवन इस्ताना के बाहर एक जुलूस आयोजित करने का आरोप था। यह क्षेत्र सिंगापुर के सार्वजनिक व्यवस्था कानून के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र माना जाता है।

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कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर क्या कहा?

हाई कोर्ट के न्यायाधीश सी की ओन ने अभियोजन पक्ष की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि तीनों महिलाओं को यह समझ होना चाहिए था कि वे जिस मार्ग से जुलूस निकाल रही हैं, वह प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है। अदालत ने माना कि निचली अदालत ने मामले के मेंटल एलिमेंट यानी इरादे से जुड़े कानूनी परीक्षण को सही ढंग से लागू नहीं किया।

अब तक क्या-क्या हुआ?

इससे पहले अक्तूबर 2025 में जिला अदालत ने तीनों महिलाओं को बरी कर दिया था। जिला जज जॉन एनजी ने अपने फैसले में कहा था कि हालांकि महिलाओं ने जुलूस निकाला, लेकिन उन्हें यह उचित रूप से पता नहीं था कि वह इलाका प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा था कि आरोप साबित करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की है, जिसमें शारीरिक कृत्य के साथ मानसिक तत्व भी शामिल है।


हालांकि, डिप्टी पब्लिक प्रॉसीक्यूटर हे हंग चुन ने हाई कोर्ट में दलील दी कि महिलाओं के खिलाफ आरोप वास्तविक जानकारी पर नहीं बल्कि इस आधार पर थे कि उन्हें तर्कसंगत रूप से पता होना चाहिए था कि यह क्षेत्र प्रतिबंधित है। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस पहले ही इस्राइल-हमास संघर्ष से जुड़े किसी भी आयोजन पर रोक लगाने की सलाह जारी कर चुकी थी।

अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि दो आरोपियों सिटी और सोबिकुन को पहले इसी मुद्दे पर एक कार्यक्रम रद्द होने की जानकारी थी, जो एक चेतावनी संकेत था। इसके अलावा, सार्वजनिक सभाओं से जुड़े नियमों की जानकारी ऑनलाइन हर समय उपलब्ध रहती है।

वहीं, बचाव पक्ष के वकील डेरेक वोंग ने अदालत में कहा कि कानून की जानकारी होना और यह जानना कि कौन सा क्षेत्र प्रतिबंधित है, दोनों अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने दलील दी कि निचली अदालत ने सही कानूनी परीक्षण लागू किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि करीब 70 लोग प्लाजा सिंगापुरा शॉपिंग मॉल के बाहर इकट्ठा हुए थे और वहां से इस्ताना की ओर बढ़े। इस दौरान उन्होंने तरबूज के चित्र वाले छाते पकड़े हुए थे, जो फिलिस्तीनी झंडे के रंगों का प्रतीक माना जाता है।



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