Pakistan: अमेरिका और चीन के टकराव में पिस रहा है पाकिस्तान, संतुलन बनाना हो रहा है मुश्किल
Pakistan: विश्लेषकों के मुताबिक पाकिस्तान की सबसे बड़ी मुश्किल कर्ज चुकाने में बढ़ रही चुनौती है। उस पर चीन और व्यापारिक बैकों- दोनों का कर्ज बढ़ता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पिछले साल एक रिपोर्ट में बताया था कि पाकिस्तान सरकार पर 25.7 बिलियन डॉलर का चीन का ऋण है...
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पाकिस्तान के लिए अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बना कर चलना लगातार ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है। अमेरिका और चीन में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान सरकार को अस्पष्ट नीति अपनानी पड़ रही है। शहबाज शरीफ सरकार इन दोनों में से किसी देश को नाराज करने की स्थिति में खुद को नहीं पा रही है।
विश्लेषकों के मुताबिक पाकिस्तान की सबसे बड़ी मुश्किल कर्ज चुकाने में बढ़ रही चुनौती है। उस पर चीन और व्यापारिक बैकों- दोनों का कर्ज बढ़ता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पिछले साल एक रिपोर्ट में बताया था कि पाकिस्तान सरकार पर 25.7 बिलियन डॉलर का चीन का ऋण है। यह उस पर मौजूद कुल विदेशी कर्ज का 27.4 फीसदी था। तब उस पर 90 बिलियन डॉलर कर्ज था। अब कुल मिला कर पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज 130 बिलियन डॉलर हो चुका है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की हाल की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन ने पाकिस्तान को इस वर्ष नौ बिलियन डॉलर की और वित्तीय सहायता देने का आश्वासन दिया। इससे पाकिस्तान को ऋण चुकाने में फौरी मदद मिलेगी। लेकिन साथ ही चीनी कर्ज का बोझ और बढ़ जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान चीन को नाराज करने की स्थिति में बिल्कुल ही नहीं है।
पाकिस्तान के भंडार में फिलहाल सिर्फ दो महीने के आयात का बिल चुकाने लायक विदेशी मुद्रा है। इसके अलावा अगले वित्त वर्ष में उस पर 24 बिलियन डॉलर कर्ज चुकाने पर खर्च करने होंगे।
शहबाज शरीफ सरकार बनने के बाद अमेरिका से पाकिस्तान के रिश्ते सुधरे हैं। उस वजह से उसे फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के शिकंजे से मुक्ति मिली है। साथ ही उसके साथ अमेरिका ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग भी शुरू किया है। इससे पाकिस्तान के कूटनीतिक हलकों में ये उम्मीद जगी है कि अमेरिकी सहायता का पुराना दौर लौट सकता है, जब अमेरिका खुले हाथ से पाकिस्तान को मदद देता था। लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक इसमें सबसे बड़ी रुकावट गुजरे वर्षों में चीन की पाकिस्तान में बनी पैठ है।
विश्लेषकों के मुताबिक अभी तक अमेरिका ने पाकिस्तान पर दोनों में से किसी पक्ष को चुनने का दबाव नहीं डाला है। लेकिन निकट भविष्य में ये स्थिति बदल सकती है। अमेरिका पाकिस्तान और चीन के बीच गहराते रिश्तों पर कई बार चिंता जता चुका है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन के वरिष्ठ सलाहकार डेरेक चॉलेट ने पिछले महीने पाकिस्तान के अखबार द डॉन को दिए एक इंटरव्यू में कहा था- ‘चीन ऐसी भूमिका निभा रहा है, जो कई अर्थों में दक्षिण एशिया, पूर्व एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूरी दुनिया के हित में नहीं है।’
फिलहाल, पाकिस्तानी नेतृत्व को उम्मीद है कि अमेरिका की ये राय उसके लिए मुसीबत खड़ी नहीं करेगी। पाकिस्तान के सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने वेबसाइट द क्रैडल.को से कहा कि चीन और अमेरिका दोनों को पाकिस्तान से संबंध रखने में फायदा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सामने इन दोनों देशों से रिश्ते में संतुलन बनाने की चुनौती 1960 के दशक में भी पेश आई थी। तब पाकिस्तान ने अपनी जनता के हित को ध्यान में रखते हुए विदेश नीति संबंधी रुख तय किए थे।
लेकिन कई टीकाकार इस राय से सहमत नहीं हैं। उनके मुताबिक इस बार हालात अलग हैं, जब मुख्य होड़ अमेरिका और चीन के बीच ही छिड़ी हुई है।