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बांग्लादेश: रमजान पर कैरम-टीवी बैन, पुलिस का अजीबोगरीब फरमान; शीर्ष अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Mon, 23 Feb 2026 10:57 PM IST
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सार

रमजान के महीने में कुश्तिया सदर उप जिला में एक पुलिस अधिकारी ने स्थानीय दुकानों में कैरम खेलने और टीवी देखना बंद करने का फरमान सुना दिया। हालांकि, जनता की ओर से आदेश की लानत-मलानत होने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस आदेश से पल्ला झाड़ लिया है।

Bangladesh Police officers order suspension of carrom games TV in local shops during Ramadan
बांग्लादेश पुलिस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

बांग्लादेश के कुश्तिया सदर उप जिला में एक पुलिस अधिकारी ने रमजान के दौरान एक चाय की दुकान के मालिक को कैरम खेलना बंद करने और टेलीविजन देखने का आदेश दिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों के किसी भी निर्देश के अभाव के बावजूद ये आदेश जारी किया गया।
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यह घटना पाटिकबारी बाजार इलाके में कुश्तिया-3 जमात-ए-इस्लामी के सांसद आमिर हमजा के दौरे के दौरान हुई। सांसद के साथ इस्लामिक यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत पाटिकबारी पुलिस कैंप के प्रभारी मोशिउल आजम भी थे।
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पुलिस अधिकारी ने दिए आदेश
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में मोशिउल आजम को चाय की दुकान के मालिक की ओर गुस्से से उंगली उठाते हुए देखा जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो 20 फरवरी की रात का बताया जा रहा है। वीडियो में यह कहते हुए दिखाया गया है, 'रमजान के दौरान न कैरम, न टीवी - यह आखिरी फैसला है।'

बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र द डेली स्टार ने पुलिस अधिकारी के हवाले से यह बात कही, 'वे वहां कैरम खेल रहे हैं। क्या मैंने इसे बंद नहीं कराया था? यह अभी भी क्यों चल रहा है? क्या मैं तुम्हारी पिटाई करवा दूं? क्या मैंने कुछ दिन पहले बाजार समिति को फोन करके यह नहीं कहा था कि तरावीह के दौरान एक महीने तक न कैरम चलेगा, न टीवी? यह अभी भी क्यों चल रहा है?'

साथ में खड़े थे सांसद आमिर हमजा
उस समय, पुलिस अधिकारी के बगल में खड़े सांसद आमिर हमजा ने अपेक्षाकृत शांत स्वर में कहा, 'यह रमजान का महीना है, इबादत का महीना। आप जो भी करें, कम से कम नमाज के समय ये काम न करें।' रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगली रात, 21 फरवरी को चाय की दुकान समेत बाजार की ज्यादातर दुकानें बंद थीं। कुछ प्रतिष्ठान आधे शटर खुले रखकर खुले थे, क्योंकि अंदर काम जारी था।

बाजार में रमजान के स्वामित्व वाली एक और चाय की दुकान खुली रही। टेलीविजन चालू था, लेकिन कैरम का कोई खेल नहीं खेला जा रहा था। टेलीविजन देखने के संबंध में पुलिस की चेतावनी के बारे में पूछे जाने पर रमजान ने अपना सिर झुका लिया और कहा, 'यहां केवल कुछ ही लोग बैठते हैं। वे बस थोड़ी देर के लिए टीवी देखते हैं।'

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आदेश पर क्या बोले स्थानीय लोग?
उस समय स्टॉल पर पहुंचे पाटिकबारी यूनियन के वार्ड परिषद सदस्य काशेम ने कहा कि अचानक सब कुछ बंद करना उचित नहीं है, क्योंकि युवाओं को कुछ मनोरंजन की आवश्यकता होती है। हालांकि, डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामिक यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी मसूद राणा ने कहा कि अधीनस्थों को ऐसे कोई निर्देश नहीं दिए गए थे।

कुश्तिया के पुलिस अधीक्षक जसीम उद्दीन ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह घटना किसी आधिकारिक पुलिस आदेश से जुड़ी नहीं है। उन्होंने कहा, 'रमजान के दौरान चाय की दुकानें खुली रहनी चाहिए या नहीं, यह कानून का मामला नहीं है। यह लोगों की भावनाओं का मामला है कि वे इसका पालन करते हैं या नहीं। हम इसके लिए किसी को दंडित नहीं कर सकते।'

(इनपुट आईएएनएस से)

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