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US-Israel: ट्रंप-नेतन्याहू में बढ़ती दूरियां, पेंटागन को इस्राइली जासूसी का डर
अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 08 Jun 2026 06:45 AM IST
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सार
लेबनान पर हमले को लेकर अमेरिका और इस्राइली नेतृत्व में मतभेद पैदा हो गए हैं। तल्खी इतनी बढ़ गई है कि बीते दिनों ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन कर लेबनान पर हमले को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। अब अमेरिकी अधिकारियों को डर सता रहा है कि इस्राइल की सरकार उनकी जासूसी करा सकती है।
ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाकात
- फोटो : PTI
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विस्तार
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच टकराव व बढ़ती रणनीतिक दूरियों ने पेंटागन की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय को इस्राइली जासूसी का भय सताने लगा है। उसने चेतावनी दी है कि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी कड़ी इस्राइली निगरानी का निशाना बन सकते हैं। एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के दो मौजूदा व एक पूर्व अधिकारी ने बताया है कि पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (डीआईए) ने हाल ही में इस्राइल के लिए काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे के स्तर को क्रिटिकल यानी गंभीर कर दिया है। यह उनका सबसे ऊंचा आंतरिक मूल्यांकन स्तर है।
एक मौजूदा अधिकारी ने अमेरिकी प्रसारक को बताया कि अमेरिका पहले से ही इस्राइल की आधिकारिक यात्राओं के दौरान सुरक्षा के कड़े उपाय बरतता है क्योंकि इस्राइली जासूसी एजेंसियों को जानकारी जुटाने के मामले में बहुत आक्रामक माना जाता रहा है। पेंटागन की नई चिंताओं से पता चलता है कि इस्राइल पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के संबंध में अमेरिकी रणनीतिक चर्चाओं व फैसलों की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस्राइल जाने पर पहले से ही अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्राइल यात्रा के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधि अस्थायी कंप्यूटर, बर्नर फोन और बहुत कड़े कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करते हैं। पूर्व राजनयिकों, खुफिया अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि इस्राइल में रहने के दौरान अमेरिकी अधिकारी अक्सर होटल के कमरों या ऐसी जगहों पर गोपनीय मामलों पर चर्चा करने से बचते हैं जहां सुरक्षा में सेंध लगने का खतरा संभव है।
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खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमताओं पर जताई चिंता
एक मौजूदा अधिकारी ने अमेरिकी प्रसारक को बताया कि अमेरिका पहले से ही इस्राइल की आधिकारिक यात्राओं के दौरान सुरक्षा के कड़े उपाय बरतता है क्योंकि इस्राइली जासूसी एजेंसियों को जानकारी जुटाने के मामले में बहुत आक्रामक माना जाता रहा है। पेंटागन की नई चिंताओं से पता चलता है कि इस्राइल पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के संबंध में अमेरिकी रणनीतिक चर्चाओं व फैसलों की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
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एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस्राइल जाने पर पहले से ही अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्राइल यात्रा के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधि अस्थायी कंप्यूटर, बर्नर फोन और बहुत कड़े कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करते हैं। पूर्व राजनयिकों, खुफिया अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि इस्राइल में रहने के दौरान अमेरिकी अधिकारी अक्सर होटल के कमरों या ऐसी जगहों पर गोपनीय मामलों पर चर्चा करने से बचते हैं जहां सुरक्षा में सेंध लगने का खतरा संभव है।
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खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमताओं पर जताई चिंता
- हालात की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने अमेरिकी प्रसारक को बताया कि डीआईए ने एक आंतरिक नोटिस और सात पन्नों का आकलन दस्तावेज जारी किया था। इसमें इस्राइल की खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमताओं को लेकर चिंता जताई गई थी।
- एक अधिकारी के अनुसार, रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि इस्राइल की मानव जासूसी और तकनीकी खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता गंभीर स्तर पर है। आंतरिक दस्तावेज में कई विशिष्ट उदाहरणों का भी उल्लेख है, जिन्होंने चिंता और बढ़ा दी है।
- अधिकारियों का मानना है कि अमेरिकी प्रतिनिधि जासूसी से बचने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाएंगे और दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया अप्रभावित रहेगी। हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा है कि यह पूरी खबर गलत है और ऐसे व्यक्ति से आई है जिसे घटनाओं की सही जानकारी नहीं है।