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क्लिंटन के डिकॉय प्लेन का राज: ट्रंप के विमान बदलने से जुड़ी कहानी, 26 साल पहले पाकिस्तान में हुआ क्या था?
Wed, 12 Aug 2026 06:05 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, वाशिंगटन।
एएनआई, वाशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 12 Aug 2026 06:05 PM IST
सार
मार्च 2000 में बिल क्लिंटन के पाकिस्तान दौरे पर सुरक्षा के लिए 'डिकॉय' (चकमा देने वाले) विमान का इस्तेमाल हुआ था। एयर फोर्स वन के निशान वाले पहले विमान से क्लिंटन का हमशक्ल सीक्रेट सर्विस एजेंट उतरा, जबकि क्लिंटन बाद में बिना निशान वाले दूसरे विमान से सुरक्षित उतरे। 26 साल बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी उसी राह पर चले। आखिर तब पाकिस्तान में हुआ क्या था? आइए, जानते हैं।
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डिकॉय प्लेन का खेल!
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के मार्च 2000 के पाकिस्तान दौरे से जुड़ा एक बड़ा सुरक्षा राज 26 साल बाद सामने आया है। व्हाइट हाउस की दिग्गज पत्रकार सुसान पेज ने बताया है कि क्लिंटन के भारत से पाकिस्तान रवाना होने से पहले अमेरिकी प्रशासन ने पत्रकारों को ऑफ-द-रिकॉर्ड ब्रीफिंग दी थी। इसमें पाकिस्तान की उड़ान के दौरान उठाए जा रहे असाधारण सुरक्षा कदमों की जानकारी दी गई थी। इनमें डिकॉय (चकमा देने वाले) विमान का इस्तेमाल भी शामिल था।
उस समय सुसान पेज व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन की चीफ थीं। अब वह यूएसए टुडे की वाशिंगटन ब्यूरो चीफ हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी थी कि पाकिस्तान यात्रा के दौरान राष्ट्रपति क्लिंटन के साथ-साथ यात्रा कवर कर रहे पत्रकारों की जान को भी गंभीर खतरा था।
पेज ने कहा कि उन्होंने इस घटना के बारे में पहले कभी बात नहीं की, क्योंकि ब्रीफिंग पूरी तरह ऑफ-द-रिकॉर्ड थी। लेकिन 26 साल से अधिक समय बीत चुका है और क्लिंटन के इस्लामाबाद पहुंचते ही पूरा छल सामने आ गया था। इसलिए अब उन्होंने इसके बारे में बताना उचित समझा।
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आखिर पाकिस्तान में हुआ क्या था?
मार्च 2000 में एयर फोर्स वन के निशान वाला एक अमरीकी विमान इस्लामाबाद में टेलीविजन कैमरों के सामने उतरा। विमान का दरवाजा खुला और सबसे पहले एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी बाहर आया। वह दिखने में हूबहू राष्ट्रपति बिल क्लिंटन जैसा था। इसके कुछ ही समय बाद एक बिना निशान वाला दूसरा विमान वहां पहुंचा। असल में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन इसी दूसरे विमान में मौजूद थे और वहीं से बाहर निकले। यानी पहला विमान और उसमें मौजूद व्यक्ति एक तरह से डिकॉय (भटकाने वाले) थे, जबकि राष्ट्रपति को दूसरे सुरक्षित विमान से उतारा गया था।
क्लिंटन के ऑपरेशन में क्या हुआ था?
क्या ट्रंप के मामले में भी अपनाई गई ऐसी ही रणनीति?
क्लिंटन से जुड़ा यह खुलासा ऐसे समय हुआ है, जब 'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक गुप्त सुरक्षा ऑपरेशन की रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने तुर्किये से रवाना होते समय ट्रंप ने ईरानी खतरे के कारण गुप्त रूप से अपना विमान बदल लिया था।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को एयरपोर्ट के एक कैटरिंग ट्रक के जरिए एक बिना निशान वाले अमेरिकी एयर फोर्स C-32A विमान तक पहुंचाया गया। दूसरी ओर, प्रेस प्रतिनिधियों और कई व्हाइट हाउस सहयोगियों को यह विश्वास दिलाया गया कि ट्रंप पूर्व एयर फोर्स वन पर ही मौजूद हैं। राष्ट्रपति का मुख्य विमान प्रेस और बाकी स्टाफ को लेकर डिकॉय की भूमिका में उड़ता रहा।
इस मामले में ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों को विमान बदलने या खतरे की गंभीरता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। डिकॉय विमान में मौजूद मीडिया कर्मियों को पूरी यात्रा के दौरान खिड़कियों के शेड नीचे रखने का निर्देश दिया गया था।
यह भी पढ़ें: Explainer: अपना सबसे सुरक्षित विमान छोड़ा, खाने वाले कंटेनर में छिपे, फिर अमेरिका पहुंचे ट्रंप; किस बात का था डर?
व्हाइट हाउस का क्या कहना है?
व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कथित विमान बदलने की घटना का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया। हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए उठाए गए इन कड़े कदमों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के कई दुश्मन राष्ट्रपति की मौत चाहते हैं और इन खतरों से निपटने के लिए हर उपलब्ध साधन का इस्तेमाल किया जाता है।
बाद में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान से लगातार खतरा बना हुआ है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'लेकिन अगर मैं जाता हूं, तो आप भी जाते हैं। है न?' इसके बाद उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि शायद किसी दिन पत्रकार अपना पेशा बदलना चाहेंगे।
क्या होता है व्हाइट हाउस प्रेस पूल?
व्हाइट हाउस प्रेस पूल पत्रकारों का एक तय और बारी-बारी से बदलने वाला समूह होता है। ये पत्रकार अमरीकी राष्ट्रपति के साथ हर यात्रा में साथ रहते हैं और उनकी गतिविधियों की रिपोर्टिंग दूसरे तमाम मीडिया संस्थानों के लिए करते हैं। जब सभी पत्रकारों को राष्ट्रपति के साथ यात्रा करने का मौका नहीं मिलता, तब यही व्यवस्था राष्ट्रपति की आवाजाही और आधिकारिक गतिविधियों का स्वतंत्र और निष्पक्ष रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में मदद करती है।
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उस समय सुसान पेज व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन की चीफ थीं। अब वह यूएसए टुडे की वाशिंगटन ब्यूरो चीफ हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी थी कि पाकिस्तान यात्रा के दौरान राष्ट्रपति क्लिंटन के साथ-साथ यात्रा कवर कर रहे पत्रकारों की जान को भी गंभीर खतरा था।
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पेज ने कहा कि उन्होंने इस घटना के बारे में पहले कभी बात नहीं की, क्योंकि ब्रीफिंग पूरी तरह ऑफ-द-रिकॉर्ड थी। लेकिन 26 साल से अधिक समय बीत चुका है और क्लिंटन के इस्लामाबाद पहुंचते ही पूरा छल सामने आ गया था। इसलिए अब उन्होंने इसके बारे में बताना उचित समझा।
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आखिर पाकिस्तान में हुआ क्या था?
मार्च 2000 में एयर फोर्स वन के निशान वाला एक अमरीकी विमान इस्लामाबाद में टेलीविजन कैमरों के सामने उतरा। विमान का दरवाजा खुला और सबसे पहले एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी बाहर आया। वह दिखने में हूबहू राष्ट्रपति बिल क्लिंटन जैसा था। इसके कुछ ही समय बाद एक बिना निशान वाला दूसरा विमान वहां पहुंचा। असल में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन इसी दूसरे विमान में मौजूद थे और वहीं से बाहर निकले। यानी पहला विमान और उसमें मौजूद व्यक्ति एक तरह से डिकॉय (भटकाने वाले) थे, जबकि राष्ट्रपति को दूसरे सुरक्षित विमान से उतारा गया था।
क्लिंटन के ऑपरेशन में क्या हुआ था?
- बिल क्लिंटन मार्च 2000 में भारत से पाकिस्तान पहुंचे थे।
- एयर फोर्स वन के निशान वाला विमान कैमरों के सामने एयरपोर्ट पर उतरा।
- क्लिंटन जैसे दिखने वाला एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी पहले बाहर आया।
- इसके बाद बिना किसी आधिकारिक निशान वाला एक दूसरा विमान पहुंचा।
- राष्ट्रपति क्लिंटन वास्तव में इसी दूसरे विमान से सुरक्षित बाहर निकले।
क्या ट्रंप के मामले में भी अपनाई गई ऐसी ही रणनीति?
क्लिंटन से जुड़ा यह खुलासा ऐसे समय हुआ है, जब 'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक गुप्त सुरक्षा ऑपरेशन की रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने तुर्किये से रवाना होते समय ट्रंप ने ईरानी खतरे के कारण गुप्त रूप से अपना विमान बदल लिया था।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को एयरपोर्ट के एक कैटरिंग ट्रक के जरिए एक बिना निशान वाले अमेरिकी एयर फोर्स C-32A विमान तक पहुंचाया गया। दूसरी ओर, प्रेस प्रतिनिधियों और कई व्हाइट हाउस सहयोगियों को यह विश्वास दिलाया गया कि ट्रंप पूर्व एयर फोर्स वन पर ही मौजूद हैं। राष्ट्रपति का मुख्य विमान प्रेस और बाकी स्टाफ को लेकर डिकॉय की भूमिका में उड़ता रहा।
इस मामले में ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों को विमान बदलने या खतरे की गंभीरता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। डिकॉय विमान में मौजूद मीडिया कर्मियों को पूरी यात्रा के दौरान खिड़कियों के शेड नीचे रखने का निर्देश दिया गया था।
यह भी पढ़ें: Explainer: अपना सबसे सुरक्षित विमान छोड़ा, खाने वाले कंटेनर में छिपे, फिर अमेरिका पहुंचे ट्रंप; किस बात का था डर?
व्हाइट हाउस का क्या कहना है?
व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कथित विमान बदलने की घटना का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया। हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए उठाए गए इन कड़े कदमों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के कई दुश्मन राष्ट्रपति की मौत चाहते हैं और इन खतरों से निपटने के लिए हर उपलब्ध साधन का इस्तेमाल किया जाता है।
बाद में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान से लगातार खतरा बना हुआ है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'लेकिन अगर मैं जाता हूं, तो आप भी जाते हैं। है न?' इसके बाद उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि शायद किसी दिन पत्रकार अपना पेशा बदलना चाहेंगे।
क्या होता है व्हाइट हाउस प्रेस पूल?
व्हाइट हाउस प्रेस पूल पत्रकारों का एक तय और बारी-बारी से बदलने वाला समूह होता है। ये पत्रकार अमरीकी राष्ट्रपति के साथ हर यात्रा में साथ रहते हैं और उनकी गतिविधियों की रिपोर्टिंग दूसरे तमाम मीडिया संस्थानों के लिए करते हैं। जब सभी पत्रकारों को राष्ट्रपति के साथ यात्रा करने का मौका नहीं मिलता, तब यही व्यवस्था राष्ट्रपति की आवाजाही और आधिकारिक गतिविधियों का स्वतंत्र और निष्पक्ष रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में मदद करती है।