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Hindi News ›   World ›   Britain: Liz Truss can be overshadowed by his own promises what do experts say

ब्रिटेनः लिज ट्रस पर भारी पड़ सकते हैं खुद उनके ही वादे, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

Sun, 28 Aug 2022 02:58 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, लंदन
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, लंदन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 28 Aug 2022 02:58 PM IST
सार

विश्लेषकों ने कहा है कि चुनाव जीतने के बाद वादों से मुकर जाने का ब्रिटिश नेताओं का पुराना इतिहास रहा है। लेकिन ट्रस के कुछ कट्टर समर्थकों को लगता है कि ट्रस वैसी नहीं हैं।

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Britain: Liz Truss can be overshadowed by his own promises what do experts say
लिज ट्रस - फोटो : social media

विस्तार

ब्रिटेन में लिज ट्रस के जैसे-जैसे कंजरवेटिव पार्टी का नेता चुने जाने की संभावना मजबूत हो रही है, विश्लेषकों का ध्यान उनके वायदों पर टिकने लगा है। कहा जा रहा है कि पार्टी के नेता पद के लिए हो रहे चुनाव के दौरान ट्रस ने आसमान से तारे तोड़ कर लाने जैसे वायदे लोगों से किए हैं। संभव है कि प्रधानमंत्री बनने पर कुछ महीनों के अंदर ही वे इन वायदों के बोझ से दब जाएं। 

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लगभग पूरे ब्रिटिश मीडिया का आकलन है कि पांच सितंबर को कंजरवेटिव पार्टी का नेता चुने जाने के बाद लिज ट्रस छह सितंबर को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगी। छह हफ्तों तक चले चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने ऐसे लोक-लुभावन वादे किए हैं, जिन्हें पूरा करना असंभव माना जा रहा है।  

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ट्रस ने कहा है कि प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद पहले ही पहले ही दिन वे टैक्स में कटौती का फैसला करेंगी। इससे पार्टी के उन तबकों का समर्थन उन्हें हासिल हुआ है, जो निम्न टैक्स दर की नीति को पसंद करते हैं। इसके अलावा उन्होंने मौजूदा महंगाई के बीच आम परिवारों को मदद पहुंचाने की योजना लाने का वादा भी किया है। 

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वेबसाइट पोलिटिको.ईयू की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब उनके समर्थक और विरोधी दोनों समान रूप से इन वादों के पूरा होने को लेकर शक जता रहे हैं। यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या नेता पद के चुनाव में विजयी होने के बाद ट्रस इन वादों से मुकर जाएंगी। 

विपक्षी लेबर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने इस वेबसाइट से कहा- ‘यह समझना मुश्किल है कि ये वादे वे कैसे पूरा करेंगी। जब उनके सामने सिर्फ एक लाख 80 हजार कंजरवेटिव सदस्य नहीं, बल्कि पूरा देश होगा, तो वे 30 बिलियन पाउंड की टैक्स कटौती को कैसे वाजिब ठहराएंगी? साथ ही उन्होंने आम परिवारों को भी मदद देने का वादा किया है। क्या इसके लिए उनकी सरकार कर्ज लेगी? हम सभी जानते हैं कि इतना पैसा ब्रिटिश सरकार के पास नहीं है।’ 

विश्लेषकों ने कहा है कि चुनाव जीतने के बाद वादों से मुकर जाने का ब्रिटिश नेताओं का पुराना इतिहास रहा है। लेकिन ट्रस के कुछ कट्टर समर्थकों को लगता है कि ट्रस वैसी नहीं हैं। उनके समर्थक एक कंजरवेटिव सांसद ने कहा- ‘वे हमेशा अपने नजरिए में चरमपंथी रही हैं। इसलिए वे अपना वादा जरूर निभाएंगी।’ मगर ट्रस के निकट सहयोगी जैकब रीस-मॉग ने हाल में ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ में एक लेख लिख कर ट्रस से अनुरोध किया कि वे अपने वादों पर पुनर्विचार करें।  

विश्लेषकों के मुताबिक ट्रस का इस मामले में असल रुख क्या रहेगा, इसका कुछ संकेत इससे मिलेगा कि वे किसे वित्त मंत्री बनाती हैं। ब्रिटिश मीडिया का अनुमान है कि वे यह पद मौजूदा वाणिज्य मंत्री क्वासी क्वार्तेंग को देंगी। ट्रस ने क्वार्तेंग के साथ मिल कर 2010 में ‘ब्रिटेनिया अनचेन्ड’ (मुक्त ब्रिटेन) शीर्षक से धुर दक्षिणपंथी आर्थिक कार्यक्रम जारी किया था। तब से दोनों करीबी रहे हैं, लेकिन क्वार्तेंग कंजरवेटिव विचारों के नेता हैं, जो जन कल्याण के कार्यों पर खुले हाथ से धन लुटाने के विरोधी रहे हैं। अगर वे अपनी राय पर कायम रहे, तो उसका मतलब यही होगा कि ट्रस अपने वादे नहीं निभा पाएंगी।

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