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अमेरिका में जाति विवाद गहराया: भारतीय और हिंदू समुदाय को निशाना बनाने का आरोप, एचएएफ ने अदालत का किया रुख

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Riya Dubey Updated Thu, 09 Apr 2026 10:19 AM IST
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सार

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने कैलिफोर्निया की नागरिक अधिकार एजेंसी के खिलाफ अमेरिकी अपीलीय अदालत में याचिका दायर की है। संगठन का आरोप है कि एजेंसी ने जाति के मुद्दे को गलत तरीके से हिंदू धर्म और भारतीय समुदाय से जोड़कर उन्हें निशाना बनाया।

Caste dispute deepens in America: Allegations of targeting Indian and Hindu communities
अमेरिका में जाति आधारित भेदभाव को लेकर विवाद - फोटो : IANS
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विस्तार

अमेरिका में जाति आधारित भेदभाव को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कैलिफोर्निया की नागरिक अधिकार नियामक एजेंसी के खिलाफ नौवीं सर्किट अपील न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। संगठन का आरोप है कि एजेंसी ने गलत तरीके से जाति को हिंदू धर्म से जोड़ते हुए भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों को निशाना बनाया है।
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6 अप्रैल को दाखिल जवाबी याचिका में एचएएफ ने अदालत से अनुरोध किया है कि निचली अदालत द्वारा उसके मुकदमे को खारिज करने में जिन प्रक्रियात्मक बाधाओं का हवाला दिया गया था, उन्हें हटाया जाए। संगठन का कहना है कि जिला अदालत ने उसके दावों के मूल मुद्दों पर विचार किए बिना ही मामला खारिज कर दिया।
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क्यों हो रहा यह विवाद?

यह पूरा विवाद कैलिफोर्निया नागरिक अधिकार विभाग (CRD) द्वारा सिस्को सिस्टम्स और उसके दो प्रबंधकों के खिलाफ दर्ज शिकायत से जुड़ा है। इस शिकायत में जाति के आधार पर भेदभाव के आरोप लगाए गए थे और यह कार्रवाई कैलिफोर्निया के फेयर एम्प्लॉयमेंट एंड हाउसिंग एक्ट के तहत की गई थी। सीआरडी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उसने सिस्को और उसके पूर्व प्रबंधकों के खिलाफ जाति-आधारित भेदभाव का मामला दर्ज किया है।

एचएएफ का आरोप है कि सीआरडी ने अपनी कार्रवाई में जाति को हिंदू धर्म और भारतीय मूल के कर्मचारियों से जोड़ने की कोशिश की। संगठन के मुताबिक, एजेंसी की शिकायत में जाति शब्द का बार-बार इस्तेमाल किया गया और यह धारणा बनाई गई कि भारतीय कर्मचारियों के बीच जाति-आधारित भेदभाव होता है, जिसे कंपनी को रोकना चाहिए था।

एजेंसी की कार्रवाई नस्लवादी और तथ्यहीन धारणाओं पर आधारित है

संगठन ने यह भी कहा कि एजेंसी की प्रस्तुति भारतीयों और हिंदुओं के बारे में नस्लवादी और तथ्यहीन धारणाओं पर आधारित है। एचएएफ ने सीआरडी के एक पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें भारत की जाति व्यवस्था को कठोर हिंदू सामाजिक और धार्मिक पदानुक्रम बताया गया था। हालांकि, बाद में विभाग ने इस विवादित वाक्यांश को हटा दिया और मामले को अप्रासंगिक बताया, लेकिन संगठन का कहना है कि इससे मूल समस्या खत्म नहीं होती।

फाउंडेशन का कहना है कि हिंदू सामाजिक और धार्मिक पदानुक्रम जैसे शब्द हटाने के बावजूद सीआरडी अब भी कंपनी के भारतीय, दक्षिण एशियाई और हिंदू कर्मचारियों पर जाति से जुड़ी नीतियां लागू करने की कोशिश कर रहा है।

इस मामले का असर केवल एक केस तक सीमित नहीं

एचएएफ की सीनियर लीगल डायरेक्टर निधि शाह ने चेतावनी दी कि इस मामले का असर सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू अमेरिकी, भारतीय अमेरिकी और दक्षिण एशियाई अमेरिकी समुदाय इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं।

शाह ने आरोप लगाया कि नागरिक अधिकार विभाग अपनी प्रवर्तन शक्तियों का इस्तेमाल उन्हीं अल्पसंख्यक समूहों को अलग करने के लिए कर रहा है, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उस पर है। उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया के लोग, नियोक्ता और कारोबारी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी जाति के आधार पर कार्रवाई करते हुए इसका दोष हिंदू धर्म पर डाल रही है और यह आशंका जताई कि भविष्य में और हिंदू संगठनों या व्यक्तियों को निशाना बनाया जा सकता है।

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