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'ग्रीनलैंड को याद रखें': अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का नया हमला, नाटो पर साधा निशाना; सहयोगियों पर भी उठाए सवाल

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Shivam Garg Updated Thu, 09 Apr 2026 07:42 AM IST
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सार

क्या ग्रीनलैंड सिर्फ बर्फ का टुकड़ा है या वैश्विक सत्ता की नई जंग का केंद्र? ट्रंप के हालिया बयान ने नाटो, यूरोप और दुनिया भर में नई बहस और तनाव को जन्म दे दिया है।

US President Donald Trump Revives Greenland Remark, Criticizes NATO After Iran Ceasefire
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : PTI
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विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर विवादित टिप्पणी कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। ईरान के साथ हालिया संघर्ष विराम के बाद ट्रंप ने नाटो देशों पर तीखा हमला बोला और सहयोग की कमी पर सवाल उठाए।

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ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा 'नाटो हमारे साथ तब नहीं था जब हमें उनकी जरूरत थी और आगे भी नहीं होगा। ग्रीनलैंड को याद रखें, वह बड़ा और खराब तरीके से संचालित बर्फ का टुकड़ा!'
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ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, लंबे समय से अमेरिका की रणनीतिक नजर में रहा है। ट्रंप पहले भी इस क्षेत्र को खरीदने या नियंत्रण में लेने की बात कह चुके हैं। ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति और खनिज संसाधन इसे वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण बनाते हैं, खासकर रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच।

NATO पर ट्रंप का निशाना
नाटो  को लेकर ट्रंप की नाराजगी नई नहीं है, लेकिन इस बार उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हुआ है। ट्रंप का कहना है कि युद्ध के दौरान कई सहयोगी देश अमेरिका के साथ खड़े नहीं हुए। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और नाटो देशों ने अपेक्षित समर्थन नहीं दिया।

यूरोप में बढ़ी चिंता
ट्रंप के बयानों से यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ गई है। फ्रांस और जर्मनी ने पहले ही यूरोपीय संघ से सुरक्षा मामलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की अपील की थी। यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला वहां की जनता ही करेगी और किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ईरान के साथ थम गई जंग
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्ध विराम समझौता हुआ है। दोनों देशों ने 10 सूत्रीय योजना पर सहमति जताई है और आगे की बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बैठक तय की गई है। यह समझौता कई हफ्तों से जारी तनाव और संघर्ष के बाद संभव हो पाया है, जिससे फिलहाल हालात में कुछ स्थिरता आई है।

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