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US China: अमेरिकी एफ-35 जेट की रफ्तार धीमी करेगा चीन, दुर्लभ खनिजों को बना रहा हथियार

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Nitin Gautam Updated Wed, 11 Mar 2026 06:27 AM IST
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सार

चीन की सरकार बड़ी ही चालाकी से उन दुर्लभ खनिजों पर अपनी पकड़ बना रही है, जिनका इस्तेमाल आधुनिक सैन्य उपकरण बनाने में होता है। इसके जरिए चीन, अमेरिका के कई अत्याधुनिक हथियारों को बिना एक गोली चलाए ही बेअसर करने की रणनीति बना रहा है। 

china could impact us f-35 jet speed with rare earth supply
दुर्लभ खनिजों को हथियार बना रहा चीन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

वैश्विक तनाव और ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के बीच अमेरिका को चित करने के लिए चीन की रणनीति तैयार है। रेयर अर्थ खनिजों व टेक आपूर्ति शृंखला पर मजबूत पकड़ की बदौलत चीन बगैर युद्ध और बिना एक गोली चलाए भविष्य में अमेरिका के अत्याधुनिक एफ-35 फाइटर जेट की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार चीन का फोकस उन अहम कच्चे संसाधनों और तकनीकी सप्लाई चेन पर नियंत्रण बढ़ाने पर है, जिनके बिना आधुनिक सैन्य उपकरण बनाना मुश्किल हो जाता है।
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चीन का दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर पकड़
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी एफ-35 समेत कई उन्नत हथियार प्रणालियों में रेयर अर्थ खनिजों का व्यापक इस्तेमाल होता है। ये धातुएं जेट इंजन, सेंसर, रडार और मिसाइल सिस्टम के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं। चीन पहले से ही दुनिया में इन खनिजों की प्रोसेसिंग का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है और हाल के वर्षों में इनके निर्यात पर कड़े नियम भी लागू किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार चीन की नई औद्योगिक और तकनीकी योजनाओं में एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ रेयर अर्थ संसाधनों पर पकड़ मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
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अमेरिका भी खतरे से वाकिफ
अमेरिका भी 2027 तक रक्षा क्षेत्र में चीनी रेयर अर्थ खनिजों पर निर्भरता घटाने की योजना बना रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नई खदानें विकसित करने और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने में समय लगेगा, लेकिन इस संबंध में योजना बन चुकी है। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले समय में महाशक्तियों के बीच मुकाबला केवल हथियारों से नहीं बल्कि संसाधनों और आपूर्ति शृंखला के नियंत्रण से भी तय हो सकता है, जहां बिना गोली चलाए भी रणनीतिक बढ़त हासिल की जा सकती है।

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