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युद्ध में क्लस्टर बम का इस्तेमाल कर रहा ईरान: तेहरान ने जारी किया हमले का वीडियो, आम लोगों के लिए खतरनाक कैसे?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: Shubham Kumar Updated Wed, 11 Mar 2026 07:52 AM IST
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सार

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच इस्राइल ने एक बड़ा दावा कर दुनियाभर की चिंताओं को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। दावा यह है कि ईरान इस युद्ध में उसके खिलाफ क्लस्टर म्यूनिशन यानी क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है। ये ऐसे हथियार होते हैं जो हवा में फटकर दर्जनों छोटे बमों को बड़े इलाके में फैला देते हैं, जिससे आम नागरिकों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

West Asia conflict Israel alleges Iran is using cluster bombs posing a significant risk to civilians
क्लस्टर बम, कितना खतरनाक। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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पश्चिम एशिया में बीते 12 दिनों से छिड़ा युद्ध अब और ज्यादा भयावह रूप लेता जा रहा है। ईरान और इस्राइल के बीच जारी हमलों की तेज होती आग ने पूरे इलाके को युद्ध के दहलीज पर ला कर खड़ा कर दिया। एक ओर इस्राइल पर मिसाइलों की बरसात हो रही है, तो दूसरी ओर अमेरिका और इस्राइल की जवाबी कार्रवाई ने हालात को विस्फोटक बना दिया है। इसी बीच अब इस्राइल ने सनसनीखेज दावा किया है कि ईरान इस युद्ध में बेहद खतरनाक क्लस्टर म्यूनिशन यानी क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है। इन हथियारों के कारण इस्राइल की पहले से ही दबाव में चल रही एयर डिफेंस प्रणाली के सामने अतिरिक्त चुनौती पैदा हो गई है और आम नागरिकों के लिए खतरा बढ़ गया है।


बता दें कि क्लस्टर म्यूनिशन ऐसे हथियार होते हैं जिनमें एक बड़ा मिसाइल या बम (जिसे पैरेंट म्यूनिशन कहा जाता है) हवा में ऊंचाई पर जाकर फटता है और उससे दर्जनों छोटे-छोटे बम (सब-म्यूनिशन या बॉम्बलेट) अलग-अलग दिशाओं में फैल जाते हैं। इतना ही नहीं ये छोटे बम लगभग 7 से 10 किलोमीटर की ऊंचाई पर फैलकर जमीन की ओर गिरते हैं और कई सौ मीटर से लेकर कई किलोमीटर तक के इलाके में फैल सकते हैं। रात के समय ये गिरते हुए नारंगी रंग की आग के गोले जैसे दिखाई दे सकते हैं।

ईरान ने जारी किया वीडियो
दूसरी ओर ईरान के सरकारी न्यूज चैनल इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) ने हमले का वीडियो जारी किया है। वीडियो में दिख रहा है कि क्लस्टर बम इस्राइल के आसमान में फटता है और इसके अंदर से कई छोटे बम अलग-अलग जगह गिरते हैं। आईआरआईबी ने बताया कि ईरान ने यह हमला अमेरिका और इस्राइल के आक्रमणों के जवाब में किया। इस हमले में दक्षिणी तेल अवीव के हेइला उपग्रह संचार केंद्र, बेयर याकोव, पश्चिमी यरूशलम और हाइफा में मौजूद सैन्य केंद्रों को निशाना बनाया गया।

              
                                                                                          

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आम लोगों के लिए खतरनाक कैसे?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि क्लस्टर बम इमारतों को उतना नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन खुले में मौजूद लोगों, गाड़ियों और दुकानों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इस्राइल के सुरक्षा विशेषज्ञ येहोशुआ कालिस्की के अनुसार क्लस्टर बम असल में इमारतों से ज्यादा लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए खतरनाक होते हैं। ऐसे में इस्राइल में इसका ज्यादा खतरा इसलिए है, क्योंकि ईरान के कई हमले घनी आबादी वाले इलाकों की ओर किए जा रहे हैं।

अब तक तीन लोगों की मौत
मीडिया रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि हाल ही में इस्राइल में एक निर्माण स्थल पर क्लस्टर बमों के कारण कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से दो लोग मंगलवार को मध्य इस्राइल में मारे गए। दूसरी ओर इस बात में भी कोई दोहराई नहीं है कि इस्राइल के पास एरो मिसाइल डिफेंस सिस्टम, जो लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए है और आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम, जो छोटी दूरी के रॉकेट को स्थिर है। ऐसी दुनिया की उन्नत एयर डिफेंस प्रणालियां हैं। लेकिन समस्या तब होती है जब मिसाइल हवा में ही फटकर कई छोटे बम फैला देती है। अगर ऐसा हो जाए तो उन्हें रोकना लगभग असंभव हो जाता है क्योंकि दर्जनों छोटे बम अलग-अलग दिशाओं में गिरने लगते हैं।

क्लस्टर बम को लेकर समस्या भी, समझिए कैसे?
हालांकि क्लस्टर बमों के साथ एक बड़ी समस्या यह भी है कि इनके कई छोटे बम फटते ही नहीं। ऐसे बम जमीन पर पड़े रहते हैं और बाद में किसी के छूने या हलचल से लैंडमाइन की तरह फट सकते हैं। इसी कारण इस्राइल की पुलिस और सेना ने लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी अज्ञात वस्तु को न छुएं और तुरंत अधिकारियों को सूचना दें। 

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दावा- ईरान रोज कर रहा इस्तेमाल
इस्राइली सेना के अनुसार ईरान लगभग हर दिन क्लस्टर म्यूनिशन का इस्तेमाल कर रहा है। उनका कहना है कि इन मिसाइलों के वारहेड में लगभग 20 से 24 छोटे बम होते हैं, जिनमें हर एक में करीब 5 किलोग्राम तक विस्फोटक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ईरान जिन मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है उनमें मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल और कम दूरी की मिसाइल शामिल है। इनमें कई वारहेड या क्लस्टर बम ले जाने की क्षमता होती है।

दुनिया के कई देश कर चुके हैं प्रतिबंध
क्लस्टर म्यूनिशन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से विवाद है। 120 से ज्यादा देशों ने इन्हें प्रतिबंधित करने वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे क्लस्टर युद्ध सामग्री पर कन्वेंशन कहा जाता है। हालांकि कुछ बड़े देश इसमें शामिल नहीं हैं, जैसे इस्राइल, अमेरिका और ईरान।  गौरतलब है कि क्लस्टर बमों का इस्तेमाल नया नहीं है। इतिहास में कई बड़े युद्धों में इनका प्रयोग हुआ है। इससे पहले दूसरे विश्व युद्ध, जब नाजी जर्मनी ने ब्रिटेन पर बटरफ्लाई बम गिराए, 2006 लेबनान के साथ जंग, जब इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच युद्ध हुआ और साल 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच इस बम क इस्तेमाल हो चुका है। 

 

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