Netanyahu: नेतन्याहू ने ईरान की जनता को बगावत के लिए उकसाया, कहा- अयातुल्ला शासन हटाने का मौका न जाने दें
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की जनता को सीधा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह आजादी की ऐतिहासिक लड़ाई है और ईरान के लोगों के पास अयातुल्ला शासन को हटाने का बड़ा मौका है। नेतन्याहू ने दावा किया कि अमेरिका और इस्राइल मिलकर तेहरान के शासकों पर पहले से ज्यादा दबाव बना रहे हैं।
विस्तार
नेतन्याहू ने कहा कि यह अवसर बार-बार नहीं आता। उनके मुताबिक मौजूदा हालात ईरान के लोगों के लिए एक बड़ा राजनीतिक मोड़ बन सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इस्राइल मिलकर तेहरान के शासकों पर पहले से कहीं ज्यादा दबाव बना रहे हैं और इससे सत्ता परिवर्तन का रास्ता बन सकता है।
People of Iran,
— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) March 10, 2026
We are waging a historic war for liberty.
This is a once in a lifetime opportunity for you to remove the Ayatollah regime and gain your freedom.
Together with the United States, we are hitting the Tyrants of Teheran harder than ever.
क्या कहा नेतन्याहू ने ईरान की जनता से?
नेतन्याहू ने अपने संदेश में कहा कि ईरान की जनता आजादी चाहती है और यह संघर्ष उसी दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा मौका है जब लोग अपने भविष्य को बदल सकते हैं। नेतन्याहू ने कहा कि जब सही समय आएगा तो बदलाव की मशाल ईरान की जनता के हाथ में होगी और उन्हें उस क्षण के लिए तैयार रहना चाहिए।
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अमेरिका और इस्राइल की रणनीति क्या है?
नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल और मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ईरान के शासकों पर लगातार दबाव बना रहे हैं। उनके मुताबिक दोनों देश मिलकर तेहरान के सत्ता ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सैन्य और रणनीतिक दबाव के जरिए ईरान के अंदर बदलाव की परिस्थितियां तैयार की जा रही हैं।
ईरान के अंदरूनी हालात पर क्या असर पड़ सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान से ईरान की आंतरिक राजनीति पर असर पड़ सकता है। ईरान लंबे समय से धार्मिक नेतृत्व वाले शासन के तहत चल रहा है। ऐसे में बाहरी दबाव और युद्ध की स्थिति देश के अंदर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है। हालांकि ईरान की सरकार लगातार इस तरह के बयानों को विदेशी हस्तक्षेप करार देती रही है।
क्या यह बयान क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाएगा?
पश्चिम एशिया में पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। ऐसे समय में नेतन्याहू का यह बयान क्षेत्रीय राजनीति को और संवेदनशील बना सकता है। अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद ईरान भी कई जगह जवाबी कार्रवाई कर चुका है। इस वजह से पूरे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस संघर्ष पर टिकी हुई है।
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