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South China Sea: दक्षिण चीन सागर में चीन-फिलीपींस फिर आमने-सामने, नौकाओं पर पानी की बौछार से क्यों बढ़ा तनाव?

Fri, 24 Jul 2026 02:23 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मनीला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मनीला। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 24 Jul 2026 02:23 PM IST
सार

South China Sea: दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। चीन के तटरक्षक जहाजों ने फिलीपींस की नौकाओं पर पानी की तेज बौछार छोड़ी, जिसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। जानिए विवादित समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों के बीच टकराव क्यों बढ़ रहा है।

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China forces fire water cannon at Philippine ships in third faceoff this week in South China Sea
दक्षिण चीन सागर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/फिलीपीन तटरक्षक बल

विस्तार

फिलीपींस ने कहा कि शुक्रवार को दक्षिण चीन सागर में चीन के तटरक्षक बल के जहाजों ने उसकी मत्स्य विभाग की दो नौकाओं पर तेज पानी की बौछार छोड़ी। इस सप्ताह विवादित समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों के बीच यह तीसरी बड़ी झड़प है। यह घटना ऐसे समय हुई, जब मनीला में एशियाई और पश्चिमी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक चल रही है, जिसमें चीन की समुद्री गतिविधियों पर चिंता जताई गई।
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फिलीपींस के तटरक्षक बल ने क्या कहा?
फिलीपींस के तटरक्षक बल के अनुसार, यह घटना स्कारबोरो शोल के पास हुई। चीन का एक तटरक्षक जहाज सरकारी मत्स्य विभाग की नौका बीआरपी दातुक्स पडुहिनोग के सिर्फ सात मीटर तक करीब आया। फिलीपींस ने कहा कि चीन ने यह कदम बेहद लापरवाही से उठाया, जिससे दोनों जहाजों के टकराने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
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फिलीपीन तटरक्षक बल ने चीन की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उसने कहा कि स्कारबोरो शोल फिलीपींस का अभिन्न अंग है और इसके आसपास का समुद्री क्षेत्र देश की क्षेत्रीय सीमा और विशेष आर्थिक क्षेत्र का हिस्सा है। फिलीपींस के तटरक्षक बल के अनुसार, गुरुवार को भी स्कारबोरो शोल के पास उसकी मत्स्य विभाग की दो नौकाओं को चीन के तटरक्षक जहाजों ने परेशान किया था। इस दौरान एक नौका पर पानी की तेज बौछार लगभग मार दी गई थी।
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चीन ने क्या कहा?
वहीं, चीन के तटरक्षक बल ने दोहराया कि स्कारबोरो शोल पर उसका संप्रभु अधिकार है। उसका कहना है कि उसने वहां अवैध रूप से काम कर रहे फिलीपींस के कई जहाजों के खिलाफ नियंत्रण संबंधी कार्रवाई की। चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, जबकि 2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता फैसले में उसके इस दावे को खारिज कर दिया गया था।

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आसियान की बैठक में क्या चर्चा हुई?
  • दशकों पुराने इस समुद्री विवाद पर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन और एशियाई तथा पश्चिमी देशों के विदेश मंत्रियों की तीन दिन की बैठक में भी चर्चा हुई।
  • बैठक मंगलवार से मनीला में बंद कमरे में चल रही है। इसमें पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्ष पर भी बातचीत हुई।
  • दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को दक्षिण चीन सागर विवाद पर चर्चा की।
  • संयुक्त बयान में कहा गया कि कुछ देशों के विदेश मंत्रियों ने समुद्र में जमीन बनाने, विवादित गतिविधियों, गंभीर घटनाओं, लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली कार्रवाइयों और समुद्री पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई।
  • 11 देशों के इस क्षेत्रीय संगठन के विदेश मंत्रियों ने चीन के साथ प्रस्तावित आचार संहिता पर बातचीत में हुई अहम प्रगति का स्वागत किया। इस प्रस्तावित समझौते का मकसद विवादित समुद्री क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव को रोकना है।उन्होंने कहा कि इस साल बातचीत पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

रुबियो-वांग यी की मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार को मनीला में बैठक की। यह मुलाकात दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन की बैठक के दौरान हुई। दोनों नेताओं ने सोमवार को सेकेंड थॉमस शोल के पास फिलीपींस और चीन के बीच हुई झड़प पर भी चर्चा की। उस घटना में चीन के तटरक्षक बल के जवानों ने लकड़ी के डंडों से हमला किया था, जिससे फिलीपींस के नौसेना के दो जवान घायल हो गए थे।


अमेरिकी विदेश मंत्री ने क्या कहा?
मार्को रुबियो ने इस घटना को तनाव बढ़ाने वाली बताया। उन्होंने कहा कि इन विवादों को बहुत सावधानी से संभालने की जरूरत है, क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच किसी भी तरह का टकराव पूरी दुनिया पर बड़ा असर डाल सकता है।

कई देशों के साथ चीन का विवाद
ट्रंप प्रशासन लगातार दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक गतिविधियों की आलोचना करता रहा है। इस समुद्री क्षेत्र को लेकर चीन का फिलीपींस समेत कई छोटे देशों से विवाद है। अमेरिका, एशिया में फिलीपींस का सबसे पुराना संधि सहयोगी है। ताइवान, वियतनाम, मलयेशिया और ब्रुनेई का भी चीन के साथ इस क्षेत्र को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।
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