क्या चीन में बढ़ रही तानाशाही?: संसद सत्र से पहले नौ सांसदों पर गाज, जानें जिनपिंग ने क्यों की ये कार्रवाई
चीन में संसद सत्र से ठीक पहले सेना के नौ सेना से जुड़े सांसदों को हटाने के फैसले ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। आधिकारिक कारण भले साफ न हों, लेकिन लगातार सैन्य कार्रवाई से सत्ता केंद्रीकरण की चर्चा तेज हो गई है। क्या शी जिनपिंग सेना और राजनीति पर पूरी पकड़ मजबूत कर रहे हैं? आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
विस्तार
चीन में सत्ता और सेना के भीतर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सालाना संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन की संसद ने सेना से जुड़े नौ वरिष्ठ सांसदों को पद से हटा दिया है। आधिकारिक तौर पर इसे प्रशासनिक फैसला बताया गया है, लेकिन लगातार हो रही कार्रवाइयों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चीन में सत्ता पूरी तरह एक व्यक्ति के नियंत्रण में जाती दिख रही है। संसद सत्र से पहले उठाया गया यह कदम राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
संसद बैठक से पहले अचानक फैसला क्यों?
चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस यानी एनपीसी की स्थायी समिति ने गुरुवार को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस से जुड़े नौ प्रतिनिधियों को सांसदों यानी डेप्युटी की सूची से हटा दिया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब चीन में मार्च की शुरुआत से वार्षिक ‘टू सेशंस’ बैठक शुरू होने जा रही है। इसमें एनपीसी और चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस की बैठक होती है, जहां देश की आर्थिक, सैन्य और विदेश नीति तय की जाती है।
सेना से जुड़े किन सांसदों पर हुई कार्रवाई?
हटाए गए लोगों में पांच फुल जनरल, एक लेफ्टिनेंट जनरल और तीन मेजर जनरल शामिल हैं। संसद में सेना और सशस्त्र पुलिस प्रतिनिधिमंडल की संख्या अब घटकर 243 रह गई है। चीन की संसद में कुल करीब 2900 सदस्य होते हैं, जिनमें ज्यादातर कम्युनिस्ट पार्टी समर्थित नेता होते हैं। हालांकि सरकार ने हटाने की स्पष्ट वजह नहीं बताई, लेकिन इसे कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।
सेना के भीतर आखिर क्या हो रहा है?
- साल 2024 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के शीर्ष अधिकारियों पर बड़े स्तर पर कार्रवाई हुई।
- शी जिनपिंग सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के प्रमुख हैं, जो सेना की सर्वोच्च कमान है।
- हाल ही में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल झांग योउशिया को गंभीर अनुशासन उल्लंघन और भ्रष्टाचार मामलों में जांच के दायरे में लाया गया।
- झांग योउशिया सेना के सबसे शक्तिशाली वर्दीधारी अधिकारी माने जाते थे।
- उनकी जांच के बाद सात सदस्यीय सैन्य आयोग में केवल शी जिनपिंग और जनरल झांग शेंगमिन सक्रिय सदस्य बचे बताए जा रहे हैं।
क्या विरोध की आवाजों पर कार्रवाई हो रही है?
लगातार सैन्य अधिकारियों को हटाने और जांच की कार्रवाई ने चीन की राजनीति को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार विरोधी अभियान नहीं बल्कि सत्ता के भीतर संभावित विरोध को खत्म करने की रणनीति भी हो सकती है। चीन में सत्ता संरचना पहले ही काफी केंद्रीकृत मानी जाती है और अब सेना पर सीधा नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।
संसद सत्र में क्या होंगे बड़े फैसले?
चार मार्च से शुरू होने वाले संसद सत्र में चीन की आर्थिक नीति, सैन्य रणनीति, व्यापार और कूटनीतिक दिशा से जुड़े बड़े फैसले सामने आएंगे। इसी दौरान चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना को मंजूरी दी जाएगी, जो वर्ष 2030 तक देश की नीति दिशा तय करेगी। ऐसे अहम सत्र से पहले सेना और संसद में बदलाव यह संकेत देता है कि नेतृत्व किसी भी असहमति से पहले व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रित रखना चाहता है।
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