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चालाकी: श्रीलंका के साइन बोर्डों पर चीनी भाषा ने ली जगह, बवाल मचने के बाद वापस लिया फैसला
Sat, 29 May 2021 04:48 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 29 May 2021 04:48 PM IST
सार
चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है, हर समय पड़ोसी देशों को परेशान करने की कोशिश में जुटा रहता है। नया विवाद श्रीलंका के साइन बोर्डों पर मंडारिन भाषा लिखने को लेकर है। श्रीलंका ने चीन की इस चालाकी का विरोध किया है।
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श्रीलंका
- फोटो : PTI
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विस्तार
चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध मधुर रखने के पक्ष में बिलकुल नहीं दिखता। पहले म्यांमार..फिर भारत, नेपाल और अब श्रीलंका पर अपनी नजर गराए हुए है। नेपाल के बाद श्रीलंका में भी चीन ने अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए सांस्कृतिक दखलंदाजी शुरू कर दी है। श्रीलंका में हाल में ही दो सरकारी परियोजनाओं के साइन बोर्डों पर वहां की अधिकारिक और दक्षिण भारतीय भाषा तमिल को हटाकर चीनी भाषा मंडारिन को जगह दी गई है। कोलंबो में सेंट्रल पार्क का निर्माण कर रही चीनी कंपनी ने वहां पर तमिल भाषा की जगह मंडारिन को जगह दी, जिसके बाद बवाल मचना शुरू हो गया।
श्रीलंका के साइन बोर्डों पर चीनी भाषा का इस्तेमाल
श्रीलंकाई अटर्नी जनरल दप्पुला दे लिवेरा ने सिघंला (श्रीलंका की मूल भाषा), मंडारिन और अंग्रेजी भाषाओं वाले साइन बोर्ड का अनावरण किया था। इससे श्रीलंका में विवाद खड़े हो गए हैं। इन साइन बोर्डों पर श्रीलंका की अधिकारिक भाषा तामिल को क्यों नहीं है रखा गया। वहीं साइन बोर्डों पर चीनी भाषा मंडारिन को क्यों लिखा गया है। यह श्रीलंका की तीन अधिकारिक भाषाओं (सिंघला, तामिल और अंग्रेजी) की नीति के विरुद्ध है। यह विवाद उस वक्त और बड़ा हो गया जब चीन ने अटर्नी जनरल डिपार्टमेंट को एक स्मार्ट लाइब्रेरी भेंट की।
सोशल मीडिया पर चीन की हरकतों की कड़ी आलोचना
श्रीलंका साइन बोर्डों पर चीनी भाषा लिखने का मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। लोगों ने चीन की इस हरकत पर आपत्ति जताई और कड़ी आलोचना की, जिसके बाद साइन बोर्ड को तत्काल हटा लिया गया। जब मीडिया ने इस पर अटर्नी जनरल कार्यालय से प्रतिक्रिया जानने की कोशिश को तो कार्यालय के अधिकारी ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
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चीनी दूतावास ने ट्वीट कर दी सफाई
हालांकि डैमेज कंट्रोल के लिए चीनी दूतावास ने ट्वीट करके कहा,"हमने जेवी बिल्डिंग साइट के साइन बोर्ड पर त्रिभाषायी नियमों का पालन नहीं होने की बात देखी थी। हम श्रीलंका की तीनों अधिकारिक भाषाओं का सम्मान करते हैं और चीन ऐसी हरकतों की निंदा करता है। चीनी दूतावास ने एक के बाद एक ट्वीट कर इसपर सफाई पेश की। दूतावास की ओर से किए गए ट्वीट में कई साइन बोर्ड की तस्वीरें साझा की गई, जिसमें तमिल भाषा भी शामिल थी।
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श्रीलंका के साइन बोर्डों पर चीनी भाषा का इस्तेमाल
श्रीलंकाई अटर्नी जनरल दप्पुला दे लिवेरा ने सिघंला (श्रीलंका की मूल भाषा), मंडारिन और अंग्रेजी भाषाओं वाले साइन बोर्ड का अनावरण किया था। इससे श्रीलंका में विवाद खड़े हो गए हैं। इन साइन बोर्डों पर श्रीलंका की अधिकारिक भाषा तामिल को क्यों नहीं है रखा गया। वहीं साइन बोर्डों पर चीनी भाषा मंडारिन को क्यों लिखा गया है। यह श्रीलंका की तीन अधिकारिक भाषाओं (सिंघला, तामिल और अंग्रेजी) की नीति के विरुद्ध है। यह विवाद उस वक्त और बड़ा हो गया जब चीन ने अटर्नी जनरल डिपार्टमेंट को एक स्मार्ट लाइब्रेरी भेंट की।
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सोशल मीडिया पर चीन की हरकतों की कड़ी आलोचना
श्रीलंका साइन बोर्डों पर चीनी भाषा लिखने का मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। लोगों ने चीन की इस हरकत पर आपत्ति जताई और कड़ी आलोचना की, जिसके बाद साइन बोर्ड को तत्काल हटा लिया गया। जब मीडिया ने इस पर अटर्नी जनरल कार्यालय से प्रतिक्रिया जानने की कोशिश को तो कार्यालय के अधिकारी ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
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चीनी दूतावास ने ट्वीट कर दी सफाई
हालांकि डैमेज कंट्रोल के लिए चीनी दूतावास ने ट्वीट करके कहा,"हमने जेवी बिल्डिंग साइट के साइन बोर्ड पर त्रिभाषायी नियमों का पालन नहीं होने की बात देखी थी। हम श्रीलंका की तीनों अधिकारिक भाषाओं का सम्मान करते हैं और चीन ऐसी हरकतों की निंदा करता है। चीनी दूतावास ने एक के बाद एक ट्वीट कर इसपर सफाई पेश की। दूतावास की ओर से किए गए ट्वीट में कई साइन बोर्ड की तस्वीरें साझा की गई, जिसमें तमिल भाषा भी शामिल थी।