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US: बाइडन ने उपराष्ट्रपति रहते छिपाई थीं यूक्रेन में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें, CIA की फाइलों से हुआ खुलासा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 08 Oct 2025 10:35 AM IST
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सार
CIA's Disclosure On Joe Biden: 2015 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन में भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषण दिया था। इसके बाद यूक्रेन ने अमेरिका पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया था, क्योंकि उस समय उनके बेटे हंटर बाइडन बुरिज्मा कंपनी से करोड़ों कमा रहे थे। सीआईए की रिपोर्ट में यह नाराजगी दबा दी गई थी।
जो बाइडन, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिकी खुफिया एजेंसी के पुराने रिकॉर्ड से एक बड़ा खुलासा हुआ है। इन फाइलों के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और उस समय के उपराष्ट्रपति जो बाइडन ने दिसंबर 2015 में यूक्रेन यात्रा के दौरान भ्रष्टाचार पर जो भाषण दिया था, उसके पीछे एक बड़ी कहानी छिपाई गई थी। यूक्रेन के अधिकारियों ने उस समय अमेरिकी रुख को 'दोहरा मापदंड' बताया था, लेकिन यह नाराजगी अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट से हटा दी गई थी। यह जानकारी हाल ही में उजागर की गई सीआईए की फाइलों से सामने आई है।
यह भी पढ़ें - US Tariffs: 'अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक ट्रंप के टैरिफ', IMF की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री ने की निंदा
क्या है पूरा मामला?
दिसंबर 2015 में जो बाइडन ने यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा किया था, वहां उन्होंने यूक्रेनी संसद में भाषण देकर कहा था कि भ्रष्टाचार 'कैंसर' की तरह है और इसे जड़ से खत्म करना होगा। इस भाषण के बाद यूक्रेनी अधिकारी नाराज थे। उनका कहना था कि अमेरिका खुद भ्रष्टाचार पर दोहरी नीति अपना रहा है, क्योंकि उस समय बाइडन के बेटे हंटर बाइडन यूक्रेन की ऊर्जा कंपनी बुरिज्मा होल्डिंग्स में काम कर रहे थे और हर साल लगभग 1 मिलियन डॉलर का मेहनताना ले रहे थे। यूक्रेनी अधिकारियों ने निजी तौर पर कहा था कि जब अमेरिका ही इस तरह के पारिवारिक संबंधों को नजरअंदाज कर रहा है, तो उसे दूसरों को भ्रष्टाचार पर भाषण देने का कोई हक नहीं बनता।
क्यों दबाई गई रिपोर्ट?
सीआईए की उजागर की गई फाइलों के अनुसार, यूक्रेन की इस नाराजगी की रिपोर्ट तैयार तो हुई थी, लेकिन इसे तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कॉलिन काह्ल के अनुरोध पर राष्ट्रपति के दैनिक खुफिया ब्रीफ (पीडीबी) में शामिल नहीं किया गया। सीआईए के एक अधिकारी की तरफ से 10 फरवरी 2016 को भेजे गए ईमेल में साफ लिखा गया- काह्ल चाहते हैं कि यह रिपोर्ट प्रसारित न की जाए।' यह ईमेल उस समय राष्ट्रपति बराक ओबामा को रोजाना ब्रीफ देने वाले अधिकारी माइकल डेम्पसी ने भेजा था। डेम्पसी सीधे खुफिया प्रमुख जेम्स क्लैपर को रिपोर्ट करते थे। बता दें कि क्लैपर पर पहले से ही रूसगेट स्कैंडल में भूमिका को लेकर जांच के दायरे में हैं।
क्यों अहम है सीआईए का ये खुलासा?
राष्ट्रपति की दैनिक खुफिया रिपोर्ट में दुनिया भर की अहम राजनीतिक और सुरक्षा जानकारियां दी जाती हैं ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति समय रहते किसी भी संकट से निपटने की तैयारी कर सकें। यूक्रेन की इस नाराजगी को रिपोर्ट से हटा देना यह दिखाता है कि अमेरिकी प्रशासन ने उस समय बाइडन परिवार से जुड़े विवाद को छुपाने की कोशिश की थी। इसके अलावा, इसी दौरान अमेरिकी मीडिया में भी हंटर बाइडन के यूक्रेन से जुड़े वित्तीय लेनदेन पर सवाल उठ रहे थे। यूक्रेनी अधिकारियों ने इस अमेरिकी मीडिया कवरेज को 'दोहरा रवैया' कहा था।
यह भी पढ़ें - US: 'भारत अपने फैसले खुद लेता है, हम निर्देश नहीं दे सकते', रूसी तेल खरीद पर बोले ट्रंप के व्यापार सलाहकार
कैसे सामने आई रिपोर्ट, अब क्यों चर्चा?
इन पुरानी फाइलों को हाल ही में सीआईए के आंतरिक समीक्षा अभियान के दौरान खोजा गया। यह जांच अभियान जॉन रैटक्लिफ के निर्देश पर हुआ, जो उस समय सीआईए निदेशक थे। इसके बाद ही यह रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। जो बाइडन अब पूर्व राष्ट्रपति हैं और 82 वर्ष के हो चुके हैं। लेकिन यह मामला इसलिए अहम बन गया है क्योंकि 2024 के बाद अमेरिकी राजनीति में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बहस चल रही है।
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क्या है पूरा मामला?
दिसंबर 2015 में जो बाइडन ने यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा किया था, वहां उन्होंने यूक्रेनी संसद में भाषण देकर कहा था कि भ्रष्टाचार 'कैंसर' की तरह है और इसे जड़ से खत्म करना होगा। इस भाषण के बाद यूक्रेनी अधिकारी नाराज थे। उनका कहना था कि अमेरिका खुद भ्रष्टाचार पर दोहरी नीति अपना रहा है, क्योंकि उस समय बाइडन के बेटे हंटर बाइडन यूक्रेन की ऊर्जा कंपनी बुरिज्मा होल्डिंग्स में काम कर रहे थे और हर साल लगभग 1 मिलियन डॉलर का मेहनताना ले रहे थे। यूक्रेनी अधिकारियों ने निजी तौर पर कहा था कि जब अमेरिका ही इस तरह के पारिवारिक संबंधों को नजरअंदाज कर रहा है, तो उसे दूसरों को भ्रष्टाचार पर भाषण देने का कोई हक नहीं बनता।
क्यों दबाई गई रिपोर्ट?
सीआईए की उजागर की गई फाइलों के अनुसार, यूक्रेन की इस नाराजगी की रिपोर्ट तैयार तो हुई थी, लेकिन इसे तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कॉलिन काह्ल के अनुरोध पर राष्ट्रपति के दैनिक खुफिया ब्रीफ (पीडीबी) में शामिल नहीं किया गया। सीआईए के एक अधिकारी की तरफ से 10 फरवरी 2016 को भेजे गए ईमेल में साफ लिखा गया- काह्ल चाहते हैं कि यह रिपोर्ट प्रसारित न की जाए।' यह ईमेल उस समय राष्ट्रपति बराक ओबामा को रोजाना ब्रीफ देने वाले अधिकारी माइकल डेम्पसी ने भेजा था। डेम्पसी सीधे खुफिया प्रमुख जेम्स क्लैपर को रिपोर्ट करते थे। बता दें कि क्लैपर पर पहले से ही रूसगेट स्कैंडल में भूमिका को लेकर जांच के दायरे में हैं।
क्यों अहम है सीआईए का ये खुलासा?
राष्ट्रपति की दैनिक खुफिया रिपोर्ट में दुनिया भर की अहम राजनीतिक और सुरक्षा जानकारियां दी जाती हैं ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति समय रहते किसी भी संकट से निपटने की तैयारी कर सकें। यूक्रेन की इस नाराजगी को रिपोर्ट से हटा देना यह दिखाता है कि अमेरिकी प्रशासन ने उस समय बाइडन परिवार से जुड़े विवाद को छुपाने की कोशिश की थी। इसके अलावा, इसी दौरान अमेरिकी मीडिया में भी हंटर बाइडन के यूक्रेन से जुड़े वित्तीय लेनदेन पर सवाल उठ रहे थे। यूक्रेनी अधिकारियों ने इस अमेरिकी मीडिया कवरेज को 'दोहरा रवैया' कहा था।
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कैसे सामने आई रिपोर्ट, अब क्यों चर्चा?
इन पुरानी फाइलों को हाल ही में सीआईए के आंतरिक समीक्षा अभियान के दौरान खोजा गया। यह जांच अभियान जॉन रैटक्लिफ के निर्देश पर हुआ, जो उस समय सीआईए निदेशक थे। इसके बाद ही यह रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। जो बाइडन अब पूर्व राष्ट्रपति हैं और 82 वर्ष के हो चुके हैं। लेकिन यह मामला इसलिए अहम बन गया है क्योंकि 2024 के बाद अमेरिकी राजनीति में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बहस चल रही है।
